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Post at: Sep 23 2021

नीति आयोग का ‘शून्य’ अभियान

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 15 सितंबर, 2021 को रॉकी माउंटेन इंस्टीट्‍यूट (RMI: Rockey Mountain Institute)  और आरएमआई इंडिया के साथ साझेदारी में नीति (NITI) आयोग ने ‘शून्य’ नामक एक अभियान शुरू किया।
  • शून्य अभियान ई-कॉमर्स कंपनियों (E-Commerce) फ्‍लीट एग्रीगेटर्स, मूल उपकरण निर्माताओं और लाजिस्टिक्स कंपनियों के बीच शून्य-प्रदूषणकारी वाहनों को बढ़ावा देने की एक पहल है।

पृष्ठभूमि

  • ईंधन की खपत और उसके प्रयोग के चलते देश में वायु प्रदूषण का खतरा दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है।
  • ऐसे में पिछले कुछ वर्षों से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने  को लेकर सरकार एवं अन्य संस्थाओं द्वारा प्रयास किया जा रहा है।
  • इस संदर्भ में वर्ष 2015 में भारत सरकार द्वारा फेम (FAME: Faster Adoption and Manufacturing of Hybrid and Electric Vehicles) योजना प्रारंभ की गई थी।
  • इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2022 तक देशभर में 60-70 लाख हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को सड़क पर उतारने का लक्ष्य था।

महत्वपूर्ण बिंदु 

  • नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत की अध्यक्षता में महिंद्रा इलेक्ट्रिक, टाटा मोटर्स, अशोक लीलैंड, सन मोबिलिटी, लाइटनिंग लािजस्टिक्स, जोमैटो, बिग बास्केट, ब्लूडार्ट, हीरो इलेक्ट्रिक और स्विगी सहित 30 कंपनियों ने अभियान के उद्‍घाटन बैठक में भाग लिया तथा अभियान काे अपना समर्थन दिया।
  • आगे उद्योग जगत की अन्य कंपनियों को भी इस अभियान से जोड़ने का लक्ष्य है। 
  • इस अभियान के हिस्से के रूप में अंतिम मील वितरण (Final mile delivery) के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV: Electric Vehicle) को अपनाने की दिशा में उद्योग जगत के प्रयासों को मान्यता प्रदान करने और उन्हें बढ़ावा देने हेतु  कार्पोरेट ब्रांडिग एवं प्रमाणन संबंधी एक कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
  • एक ऑनलाइन ट्रैकिंग प्‍लेटफॉर्म, इलेक्ट्रिक वाहनों के संदर्भ में विद्युतीकृत किलोमीटर, कार्बन संबंधी बचत और स्वच्‍छ वितरण वाहनों से होने वाले अन्य लाभों से जुड़े आंकड़ों के माध्यम से इस अभियान के प्रभाव काे साझा करेगा।
  • शहरी क्षेत्र में वितरण (Delivery) करने वाले वाहनों के बेड़े को त्वरित गति से पूर्ण विद्युतीकरण करने का समर्थन किया गया।

उद्देश्य 

  • स्वच्‍छ प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।
  • इलेक्ट्राॅनिक वाहनों से होने वाले स्वास्थ्य, पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों के बारे में जागरूकता फैलाना।
  • प्रदूषण की समस्या में कमी लाना।
  • शहरी माल ढुलाई क्षेत्र में प्रदूषण कम करना।

महत्व

  • ई-कॉमर्स बाजार को बढ़ावा मिलेगा
  • 2013 से 2017 के मध्य ऑनलाइन खुदरा बाजार में तेजी से वृद्धि हुई है।
  • वर्ष 2019 में भारत में ई-कॉमर्स का आकार 4 बिलियन डॉलर था।
  • वर्ष 2026 तक इसके 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर तथा वर्ष 2030 तक इसके 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

उत्सर्जन में कमी 

  • भारत में माल ढुलाई से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड के कुल उत्सर्जन का 10 प्रतिशत शहरी मालवाहक वाहनों से होता है।
  • वर्ष 2030 तक इस उत्सर्जन में 114 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों से काफी कम उत्सर्जन होता है तथा बेहतर वायु गुणवत्ता के लिए ये अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
  • अपने निर्माण के समय भी ईवी (EV)  आंतरिक दहन इंजन की तुलना में 15-40 प्रतिशत कम उत्सर्जन करते हैं।
  • इनकी परिचालन लागत भी न्यून होती है।

ऊर्जा सुरक्षा

  • ऊर्जा की कमी की चुनौती हल होगी।
  • जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी।
  • नवीकरणीय एवं स्वच्‍छ स्रोतों को बढ़ावा मिलेगा।

चुनौतियां

  • इलेक्ट्राॅनिक उपकरणों के उत्पादन तकनीक के लिए दूसरों पर निर्भरता जैसे बैटरी, अर्द्धचालक आदि।
  • लीथियम आयन बैटरी के आयात के लिए चीन एवं जापान पर निर्भरता।

ढांचागत कमियां

  • चार्जिंग स्टेशनों की कमी।
  • बैटरी के जल्द डिस्चार्ज होने की समस्या।

कच्‍चा माल की समस्या 

  • लीथियम एवं कोबाल्ट के अपर्याप्त भंडार (इन घटकों का प्रयोग बैटरी निर्माण में होता है)।
  • कुशल कामगारों का अभाव : भारत में ईवी की सर्विसिंग के लिए कुशल कामगारों का अभाव है।

  • अभी हाल ही में नीति आयोग ने विश्व संसाधन संस्थान (WRI : World Resources Institute)  के साथ संयुक्त रूप से एनडीसी-ट्रांसपोर्ट इनीशिएटिव फॉर एशिया (NDC-TIA) परियोजना के रूप में भारत में फोरम फॉर डीकार्बोनाइजिंग ट्रांसपोर्ट की शुरूआत की थी।
  • इसका उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन कम करना है।


 

संकलन- अशोक कुमार तिवारी


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