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Post at: Sep 23 2021

11वीं भारत-यूके आर्थिक और वित्तीय वार्ता

वर्तमान परिप्रेक्ष्य 

  • 2 सितंबर, 2021 को 11वीं भारत-यूनाइटेड किंगडम आर्थिक और वित्तीय वार्ता का आयोजन आभासी माध्यम से किया गया।
  • इस वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने, जबकि यूके (UK) के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां के वित्त मंत्री (Chancellor of Exchequer) ऋषि सुनक द्वारा किया गया।
  • इस वार्ता में जलवायु परिवर्तन से निपटने और निवेश को गति देने के नए उपायों की घोषणा की गई।

पृष्ठभूमि

  • मई, 2021 में भारत एवं यूके के प्रधानमंत्रियों ने भारत-यूके रोडमैप, 2030 की शुरुआत की थी। जिसका उद्देश्य था-
    • दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं एवं जनमानस को अगले दशक तक और करीब लाना।
    • दोनों देशों से संबंधित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में और सहयोग बढ़ाना।

 मुख्य बिंदु

  • भारत में हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए हरित परियोजनाओं और नवीकरणीय ऊर्जा में सार्वजनिक और निजी निवेश के अंतर्गत 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के पैकेज पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए।
  • इस हरित निवेश में भारत में जलवायु संबंधित परियोजनाओं के लिए कार्य करने वाले यू.के. के विकास वित्त संस्थान सीडीसी (Commonwealth Development Corporation) का 1 बिलियन डॉलर का निवेश भी शामिल है।
    • अभिनव हरित तकनीकी समाधानों पर काम करने वाली कंपनियों को समर्थन देने हेतु दोनों देशों द्वारा यह संयुक्त निवेश किया गया है।
  • भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश करने वाले संयुक्त ग्रीन ग्रोथ इक्‍टिवी फंड में 20 करोड़ डॉलर का निजी और बहुपक्षीय निवेश किया जाएगा।
  • इस वार्ता में एक नई ‘क्‍लाइमेट फाइनेंस लीडर इनशिएटिव (CFLI)  इंडिया पार्टनरशिप’ पर सहमति दी गई जिसमें-
    • सीएफएलआई सतत अवसंरचना (सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा एवं अन्य हरित प्रौद्योगिकी ) के विकास के लिए निजी पूंजी जुटाने के प्रयासों में तेजी लाएगी।
    • इसके लिए सीएफएलआई (CFLI) विभिन्‍न वित्तीय संस्थाओं कॉर्पोरेट्‍स और मौजूदा टिकाऊ वित्तीय पहलों के साथ मिलकर काम करेगा।
    • इस साझेदारी का नेतृत्व सीएफएलआई (CFLI) द्वारा किया जाएगा तथा भारत एवं यूके की सरकारों द्वारा इसका समर्थन किया जाएगा।
  • दोनों देश आगामी भारत-यूके व्यापार वार्ता में सेवा क्षेत्र पर विचार-विमर्श के लिए सहमत नजर आए। यह सहमति-
    • यूके की वित्तीय फर्मों को नए अवसर प्रदान करेगी।
    • भारतीय कंपनियों को लंदन शहर में वित्त तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने में मदद करेगी।

 

  • यूके ने बीमा क्षेत्र में एफडीआई (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत करने के भारत के फैसले का स्वागत किया।
  • दोनों पक्षों ने आपसी आदान-प्रदान और सूचनाओं और प्रतिभाओं को साझा करने के लिए प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी पर एक समझौता-ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
  • दोनों देशों का आर्थिक संबंध पहले से ही मजबूत है इसे वर्ष 2030 दोगुना करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी निर्धारित किया है, जिसमें एक मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत करना भी शामिल है।

 

  • इसी वार्ता में गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक सिटी (GIFT CITY) को वैश्विक सेवा केंद्र में विकसित करने पर केंद्रित एक नई रिपोर्ट जारी की गई।
  • अगली (12वीं) भारत-यूके आर्थिक और वित्तीय वार्ता वर्ष 2022 में लंदन में आयोजित की जाएगी।

लाभ

  • द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे।
  • व्यापार एवं निवेश में वृद्धि होगी।
  • हरित विकास को बढ़ावा मिलेगा।
  • सतत विकास लक्ष्य (17) प्राप्त करने में कुछ हद तक सहायता मिलेगी।
     

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