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Post at: Sep 22 2021

13वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 9 सितंबर, 2021 को 13वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आभासी माध्यम से आयोजन किया गया। इस शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई।
  • भारत की अध्यक्षता में संपन्‍न हुआ यह तीसरा शिखर सम्मेलन था। इससे पूर्व भारत ने वर्ष 2016 एवं वर्ष 2012 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की थी। 

पृष्ठभूमि

  • इस शिखर सम्मेलन में सभी 5 सदस्य देशों (भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका) के राष्ट्राध्यक्ष आभासी माध्यम से शामिल हुए।
  • इस वर्ष ब्रिक्स की 15वीं वर्षगांठ है, जैसा इस सम्मेलन की थीम से स्पष्ट होता है।
  • इस वर्ष के सम्मेलन की थीम है : ‘ब्रिक्स @ 15 : निरंतरता, एकीकरण एवं आम सहमति के लिए अंत: ब्रिक्स सहयोग’ ('BRICS@ 15: Intra-BRICS Cooperation for Continuity Consoledation and Consensus')
  • ब्रिक्स का 14वां शिखर सम्मेलन वर्ष 2022 में चीन में आयोजित होगा।
     

 

  • इसकी अध्यक्षता पांचों  देशों (BRICS) द्वारा चक्रीय आधार पर की जाती है।

13वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के महत्वपूर्ण बिंदु

  • ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहली बार : भारत की अध्यक्षता में संपन्‍न 13वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कुछ नई पहले प्रारंभ की गई हैं-

  • इस शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री ने कोविड-19 के बाद ब्रिक्स देशों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए-लोचपूर्ण, अभिनव, विश्वसनीय एवं स्थायित्वपूर्ण पुनर्निर्माण’ (Build - back resiluntly Innovativelly, Credably and Sustainably) के आदर्श वाक्य के साथ ब्रिक्स सहयोग का आह्वान किया।
  • वर्ष 2021 में अध्यक्ष के रूप में भारत अंतर-अंत: ब्रिक्स सहयोग बढ़ाने के लिए तीन स्तंभों पर विशिष्ट कार्य करेगा। वे स्तंभ हैं-

राजनीतिक एवं सुरक्षा संबंधी :  इस स्तंभ के तहत प्राथमिकता वाले क्षेत्र :

  • बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार
  • आतंकवाद निरोधी सहयोग
  • वित्त एवं अर्थव्यवस्था :  इस स्तंभ के केंद्र बिंदु हैं-
  • ब्रिक्स आर्थिक भागीदारी रणनीति, 2020-25 का कार्यान्वयन
  •  ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच का संचालन।
  •  आपदा लचीलापन (Disaster Resilience) पर सहयोग 
  • नवाचार सहयोग 
  •  डिजिटल स्वास्थ्य एवं पारंपरिक चिकित्सा
  •  सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए डिजिटल एवं तकनीकी उपकरणों का उपयोग।

संस्कृति एवं जनसंपर्क
अन्य बिंदु

  • ब्रिक्स आतंकवाद रोधी कार्ययोजना : ब्रिक्स के 13वें शिखर सम्मेलन में यह कार्ययोजना अपनाई गई। इसमें शामिल हैं-
  • कट्टरता एवं साइबर आतंकवाद के खतरों से निपटना।
  • सीमा प्रबंधन एवं खुफिया सूचना का साझाकरण।
  • दिल्‍ली घोषण-पत्र :  इस सम्मेलन में दिल्‍ली घोषणा-पत्र को भी अपनया गया, जिसमें-
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित, संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंगों में सुधार का आह्वान किया गया है।
  • ऐसा पहली बार है, जब ब्रिक्स देशों ने बहुपक्षीय प्रणाली को सुधारने एवं मजबूत करने पर साझा दृष्टिकोण अपनाया है।

अफगानिस्तान एवं अन्य अंतरराष्टीय मुद्दे 

  • इस सम्मेलन में अफगानिस्तान में स्थिरता के लिए समावेशी अंत: अफगान संवाद का आह्वान किया गया।
  • इस सम्मेलन में म्यांमार एवं सीरिया में संघर्ष, कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव, इस्राइल फिलिस्तीन हिंसा और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

ब्रिक्स का महत्व 

  • यह विश्व की आबादी के 41 प्रतिशत, भूमि क्षेत्र के 29.3 प्रतिशत, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 24 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के 16 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है।(स्रोत विश्व बैंक डाटा, 2019)
  • उत्तर और दक्षिण के बीच सेतु 
  • रूस : उत्तर
  • भारत, चीन, ब्राजील एवं दक्षिण अफ्रीका :  दक्षिण
  • साक्षा वैश्विक परिप्रेक्ष्य 
  • बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार का आह्वान (जैसे-संयुक्त राज्य सुरक्षा परिषद)
  • विकास सहयोग 
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना
  • आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था
  • वैक्‍सीन रिसर्च एवं डेवलपमेंट आभासी केंद्र (स्थापित होने की राह पर)

चुनौतियां 

  • आपसी संघर्ष एवं विभिन्‍न समस्याएं 
  • भारत-चीन-सीमा विवाद
  • पश्चिमी देशों के साथ चीन एवं रूस के तनावपूर्ण संबंध
  • ब्राजील एवं दक्षिण अफ्रीका में आंतरिक संघर्ष

 िवषम शासन मॉडल

  • भारत-ब्राजील दक्षिण अफ्रीका चुनावी लोकतंत्र
  • चीन-रूस एकाधिकारवादी शासन प्रणाली।

चीन केंद्रित संगठन 
ब्रिक्स के देश अन्य देशों (ब्रिक्स के) की तुलना में चीन से ज्यादा व्यापार करते हैं। अन्य देशों का चीन के साथ व्यापार असंतुलन।
निष्कर्ष 
ब्रिक्स का भविष्य 5 देशों (BRICS) के आंतरिक एवं बाह्य मुद्दों के समायोजन पर निर्भर करता है। इसके लिए भारत एवं चीन के बीच संवाद एवं सहयोग का होना अति आवश्यक है। दोनों देशों को आपसी विवाद सुलझाकर इस मंच को समावेशी सार्थक एवं वैविश्क स्तर पर प्रभावकारी मंच में बदलना होगा तभी ब्रिक्स का उद्देश्य सफल होगा।

संकलन-  अशोक कुमार तिवारी


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