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Post at: Sep 21 2021

ऊर्जा संक्रमण सूचकांक, 2021

वर्तमान परिप्रेक्ष्य 

  • 20 अप्रैल, 2021 को विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा ऊर्जा संक्रमण सूचकांक जारी किया गया। 
  • ऊर्जा संक्रमण सूचकांक, 2021 में 115 देशों को शामिल किया गया है।
  • इस सूचकांक में स्वीडन प्रथम स्थान पर, जबकि जिम्बॉब्वे अंतिम (115) स्थान पर रहा।
  • ऊर्जा संक्रमण सूचकांक, 2021 में 115 देशों की सूची में भारत को 87वां स्थान प्राप्त हुआ।

सूचकंाक एवं इसके आयाम 

  • यह सूचकांक ऊर्जा क्षेत्र में 115 देशों के ‘नेट शून्य उत्सर्जन’ पर आधारित है।
  • यह सूचकांक-शून्य उत्सर्जन’ की दौड़ में अग्रणी देशों एवं उनकी स्थिति का विश्लेषण करता है।
  • नेट शून्य उत्सर्जन 
  • यह वह स्थिति है, जिसमें मानव द्वारा उत्सर्जित ‘ग्रीन हाउस गैस’ को वायुमंडल से हटाकर संतुलित कर दिया जाता है।

आयाम 

  • यह सूचकांक निम्नलिखित 6 संकेतकों के आधार पर तैयार किया जाता है-

 

मापन

  • इसका मापन ऊर्जा त्रिकोण के निम्नलिखित संकेतकों के आधार पर किया जाता है-

 

  • संयुक्त राज्य अमेरिका की रैंक 24वीं तथा यूनाइटेड किंगडम की रैंक 7वीं थी।
  • भारत के पड़ोसी देशों में पाकिस्तान की रैंक 104वीं, श्रीलंका की 69वीं, बांग्लादेश की रैंक 97वीं तथा नेपाल की रैंक 92वीं थी। 

भारत 

  • भारत में ऊर्जा की मांग बढ़ी है, किंतु ETI [Energy Transition Index] स्कोर अभी भी निम्न है।
  • भारत में 2016-20 के मध्य 54 बिलियन का वैश्विक ऊर्जा संक्रमण निवेश हुआ है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत स्वतंत्र रूप से अक्षय ऊर्जा उत्पादन के मामले में अग्रणी देश है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने ऊर्जा संक्रमण के लिए एक मजबूत राजनीतिक प्रतिबद्धता और नियामक वातावरण के साथ सब्सिडी सुधारों के माध्यम से ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।

रिपोर्ट से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

  • नवीनतम रिपोर्ट एक संशोधित ईटीआई (ETI) पद्धति पर आधारित है, जो वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में हाल के परिवर्तनों और जलवायु परिवर्तन पर त्वरित कार्यवाही की आवश्यकता पर बल देती है। 
  • कोविड-19 ने ऊर्जा की मांग को प्रभावित किया और इसमें (मांग) काफी गिरावट देखी गई।
  • कोविड-19 की वजह से ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश कम हुआ तथा परियोजनाओं के पूर्ण होने में भी विलंब हुअा है।
  • ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े लोगों के रोजगार भी प्रभावित हुए हैं।

 

निष्कर्ष 
यह रिपोर्ट वैश्विक ऊर्जा संकटों से निपटने में ऊर्जा नीतियों, रोडमैप तथा शासन की रूपरेखा को अधिक मजबूती से लागू करने की आवश्यकता पर बल देती है। जिससे भविष्य में कोविड-19 जैसे अन्य आने वाले संकटों से सक्षम तरीके से निपटा जा सके ।


 


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