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उत्तर प्रदेश बजट, 2021-22 भाग - 1

वर्ष 2020 पूरे विश्व के लिए अत्यंत चुनौती भरा वर्ष रहा। विश्व के महाशक्ति कहे जाने वाले देशों की चिकित्सा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था कोविड-19 वैश्विक महामारी के समक्ष असहाय दिखी। भय, मृत्यु और लाचारी के इस अंधकार भरे काल में भारत के नेतृत्व और भारत की जनता ने पूरे विश्व के समक्ष अनुशासन, संयम और कर्मठता का अप्रति्ाम उदाहरण प्रस्तुत किया। जनप्रति्ानिधियों, चिकित्सकों, पैरामेडिकल कर्मियों, पुलिस बल, सरकारी कर्मचारियों तथा जनसामान्य ने कोविड-19 की विभीषिका के समक्ष जिस एकजुटता और जुझारूपन का परिचय दिया, उसका वर्णन शब्दों में किया जाना संभव नहीं है। देश की आबादी का छठा हिस्सा उत्तर प्रदेश में निवास करता है। ऐसी स्थिति्ा में राज्य में कोरोना महामारी से निपटने की चुनौती और भी अधिक हो जाती है। लेकिन यह अत्यंत हर्ष और संतोष का विषय है कि देश के वैज्ञानिकों ने कोविड-19 की वैक्सीन अपेक्षाकृत रूप से कम समय में तैयार कर ली। राज्य में वैक्सीन हेतु कोल्ड चेन की व्यवस्था करते हुए टीकाकरण अभियान भी प्रारंभ हो चुका है। जरूरत है सभी को मिलकर इस टीकाकरण अभियान को सफल बनाने तथा कोरोना महामारी को हराने की।
समग्र एवं समावेशी विकास द्वारा प्रदेश के विभिन्न वर्गों का ,स्वावलंबन से सशक्तीकरण, जो सरकार के केंद्र बिंदु में है, का ध्यान रखते हुए 22 फरवरी, 2021 को उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए कुल 550270.78 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार के बजट इति्ाहास का यह पहला डिजिटल बजट (Paperless Budget) तथा वर्तमान सरकार का पांचवां पूर्ण बजट है। कोरोना महामारी का तीखा दंश झेलने के बावजूद राज्य के विकास की बड़ी लकीर खींचने हेतु सरकार ने हौंसला दिखाते हुए जहां बुनियादी ढांचे के विकास को रफ्तार देने हेतु पर्याप्त धन मुहैया कराया है, वहीं श्रमिकों, महिलाओं, किसानों और युवाओं को भी सौगातें देने के लिए खजाना खोला है। कोरोना आपदा से सबक लेते हुए सरकार ने कोविड टीकाकरण समेत स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने हेतु भी कदम उठाए हैं। अयोध्या और काशी पर फोकस बरकरार रख सांस्कृति्ाक राष्ट्रवाद का परचम भी लहराया है, तो गो-माता के प्रति्ा अपने सरोकारों को भी विस्तार दिया है। बजट में 27598.4 करोड़ रुपये की नई योजनाओं को शामिल करते हुए राजकोषीय घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद 4 प्रति्ाशत से अधिक होने का जोखिम भी उठाया है।
इस बजट के माध्यम से वित्त मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने हेतु ,आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश, के विकास मंत्र पर कार्य करने का लक्ष्य रखा है। आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की अवधारणा के चार स्तंभ होंगे– 1. अवस्थापना विकास, 
2. जनस्वास्थ्य, 3. मानव संपदा एवं सामाजिक-सांस्कृति्ाक विकास तथा 4. कृषि एवं संबद्ध क्रिया-कलापों का विकास। इस ,आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश, के लक्ष्य को जन-स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा, स्वदेशी को बढ़ावा, स्वावलंबन तथा सशक्तीकरण पर केंद्रित योजनाओं और कार्यक्रमों को गति्ा प्रदान करते हुए प्राप्त किया जाएगा।
राजस्व एवं पूंजी लेखे का व्यय (Revenue & Capital Account Expenditure)

  • सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट का आकार 550270.78 करोड़ रुपये है, जो विगत वर्ष के बजट अनुमान (512860.72 करोड़ रुपये) की तुलना में 7.29 प्रति्ाशत तथा संशोधित अनुमान की तुलना में 32.68 प्रति्ाशत अधिक है। इस कुल व्यय में 395130.35 करोड़ रुपये राजस्व लेखे का व्यय तथा 155140.43 करोड़ रुपये पूंजी लेखे का व्यय शामिल है। 

राजस्व एवं पूंजी लेखें की प्राप्तियां (Revenue & Capital Account Receipts) 

  • बजट 2021-22 में कुल प्राप्तियां 506181.84 करोड़ रुपये अनुमानित है, जबकि विगत वर्ष के बजट में यह 500558.53 करोड़ रुपये अनुमानित थीं। कुल प्राप्तियों में 418340.44 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्तियां तथा 87841.40 करोड़ रुपये की पूंजीगत प्राप्तियां सम्मिलित हैं। राजस्व प्राप्तियों में कर राजस्व का अंश 305740.30 करोड़ रुपये है, जिसमें से स्वयं का कर राजस्व 186345 करोड़ रुपये तथा केंद्रीय करों में राज्य का अंश 119395.30 करोड़ रुपये सम्मिलित है। बजट 2021-22 में राज्य के स्वयं के कर राजस्व में वर्ष 2020-21 के संशोधित अनुमानों (124866.94 करोड़ रुपये) की तुलना में 61478.06 करोड़ रुपये (49.23%) की वृद्धि प्रदर्शित है।

लोक लेखा (Public Account)
    वित्तीय वर्ष 2021-22 में लोक लेखा के अंतर्गत लेन-देनों से 5500 करोड़ रुपये की शुद्ध प्राप्ति का अनुमान है, जो वर्ष 2020-21 की शुद्ध प्राप्ति के मूल अनुमान 8500 करोड़ रुपये से 3000 करोड़ रुपये कम है।
समस्त लेन-देनों का शुद्ध परिणाम
    वर्ष 2021-22 के बजट अनुमानों में वर्षभर के समस्त लेन-देनों का शुद्ध परिणाम (–) 37988.94 करोड़ रुपये अनुमानित है। प्रारंभिक शेष तथा समस्त लेन-देनों के उपर्युक्त शुद्ध परिणाम के आधार पर अंति्ाम शेष (–) 23955.82 करोड़ रुपये अनुमानित है।

  • राजस्व बचत - वर्ष 2021-22 के बजट में 23210.09 करोड़ रुपये की राजस्व बचत अनुमानित है, जबकि वर्ष 2020-21 में यह 27450.88 करोड़ रुपये अनुमानित की गई थी। वर्ष 2020-21 के पुनरीक्षित आंकड़ों के अनुसार, 13160.77 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा होने का अनुमान है। 
  • राजकोषीय घाटा - वर्ष 2021-22 में राजकोषीय घाटा 90729.80 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 4.17 प्रति्ाशत है। वर्ष 2019-20 के वास्तविक आंकड़ों के अनुसार, शुद्ध राजकोषीय बचत 11082.68 करोड़ रुपये है। वर्ष 2020-21 के बजट अनुमानों के अनुसार, राजकोषीय घाटा 53195.46 करोड़ रुपये था, जो पुनरीक्षित अनुमानों के अनुसार ब़ढ़कर 80851.49 करोड़ रुपये होना अनुमानित है।
  • पूंजीगत परिव्यय - वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट में पूंजीगत परिव्यय के अंतर्गत 113767.70 करोड़ रुपये अनुमानित है। वर्ष 2019-20 में पूंजीगत परिव्यय के अंतर्गत वास्तविक रूप से 59998.03 करोड़ रुपये का व्यय किया गया है। वर्ष 2020-21 के बजट अनुमान में पूंजीगत परिव्यय 81209.49 करोड़ रुपये था, जो कि पुनरीक्षित अनुमानों में घटकर 68253.17 करोड़ रुपये होना अनुमानित है।
  • सकल कर प्राप्तियां/सकल राज्य घरेलू उत्पाद - कर राजस्व का सकल राज्य घरेलू उत्पाद के साथ अनुपात वर्ष 2021-22 के बजट में 14.1 प्रति्ाशत अनुमानित है, जबकि वर्ष 2019-20 के वास्तविक आंकड़ों में यह 14.2 प्रति्ाशत तथा वर्ष 2020-21 के संशोधित अनुमानों में यह 11.5 प्रति्ाशत है। यह सकल राज्य घरेलू उत्पाद के सापेक्ष कर राजस्व प्राप्तियों में स्थायित्व सुधार को इंगि्ात करता है।
  • त्र+णकोष/सकल राज्य घरेलू उत्पाद - वर्ष 2011-12 में यह अनुपात 32.8 प्रति्ाशत था, जो क्रमिक रूप से घटकर वर्ष 2019-20 में 29.6 प्रति्ाशत के स्तर पर आ गया। वर्ष 2020-21 के संशोधित अनुमानों में यह 29.2 प्रति्ाशत और वर्ष 2021-22 के बजट अनुमान में 28.1 प्रति्ाशत है। इस अनुपात में क्रमिक कमी होती रही है। 

 

मध्यकालिक राजकोषीय पुन:संरचना नीति, 2021 
उत्तर प्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन नियमावली, 2006 में मध्यकालिक राजकोषीय पुन:संरचना नीति का प्रारूप निर्धारित किया गया है। तद्‌नुसार, निर्धारित प्रारूप पर प्रत्येक वर्ष, वार्षिक बजट के साथ मध्यकालिक राजकोषीय पुन:संरचना नीति-पत्रक प्रस्तुत किया जाता है। अधिनियम तथा नियमावली के संगत प्रावधानों के अनुसार, उत्तर प्रदेश मध्यकालिक राजकोषीय पुन:संरचना नीति, 2021 तैयार की गई है, जिसमें वर्ष 2020-21 के बजट अनुमान एवं संशोधित अनुमान, वर्ष 2021-22 के बजट अनुमान तथा अगले तीन वर्षों अर्थात वर्ष 2022-23, 2023-24 तथा वर्ष 2024-25 के पूर्वानुमान दिए गए हैं।

  • वेतन, पेंशन एवं ब्याज पर होने वाला सम्मिलित व्यय, वर्ष 2021-22 में राजस्व प्राप्तियों का 61.3 प्रति्ाशत तथा राजस्व व्यय का 64.9 प्रति्ाशत अनुमानित है। वर्ष 2024-25 तक इस अनुपात के घटकर क्रमश: 55.7 प्रति्ाशत तथा 62.9 प्रति्ाशत हो जाने का अनुमान है।
  • त्र+ण सेवा पर होने वाला व्यय वर्ष 2021-22 में राजस्व प्राप्तियों के 17.3 प्रति्ाशत के स्तर पर रहने का अनुमान है, जिसके वर्ष 2024-25 तक घटकर 14.9 प्रति्ाशत होना अनुमानित है।

सरकार की त्र+णग्रस्तता
    वर्ष 2020-21 के बजट अनुमान में राज्य की त्र+णग्रस्तता 516184.45 करोड़ रुपये आकलित की गई थी, जिसके सापेक्ष पुनरीक्षित अनुमान 565909.59 करोड़ रुपये है। वर्ष 2021-22 में इसके बढ़कर 611161.85 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है, जो स.रा.घ.उ. का 28.1 प्रति्ाशत है। 


 


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