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Post at: Sep 16 2021

किगाली संशोधन को भारत की मंजूरी

चर्चा में क्यों ?

  • अगस्त, 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ओजोन-क्षयकारी पदार्थों (ODS)  से संबंधित माॅन्ट्रियल प्रोटोकाॅल में किए गए किगाली संशोधन के अनुसमर्थन को मंजूरी दी। 
  • उल्‍लेखनीय है कि जुलाई, 2021 के अंत तक यूरोपीय संघ सहित कुल 122 देशों ने इस संशोधन की पुष्टि की है।


किगाली संशोधन की आवश्यकता क्‍यों ?

  • जैसा कि हमें ज्ञात है कि वर्ष 1987 के मॉन्‍ट्रियल प्रोटोकाॅल के तहत ओजोन-क्षयकारी पदार्थों (ODS) को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का प्रावधान किया गया था।
  • इसके तहत क्‍लोरोफ्‍लोकार्बन (CFC), हैलोन्स तथा कार्बन टेट्रा क्‍लोराइड (CCl4) जैसे ओ.डी.एस. को प्रतिबंधित कर गैर-ओ.डी.एस. विकल्प  के रूप में हाइड्रोफ्‍लोरोकार्बन (HFC) को अधिमान्यता दी गई।
  • वस्तुत: एच.एफ.सी. ओजोन रिक्तिकारक नहीं है, लेकिन इसकी ग्‍लोबल वार्मिंग क्षमता कार्बन डाइऑक्‍साइड (CO2) की तुलना में हजार गुना अधिक है।
  • इसीलिए मॉन्‍ट्रियल प्रोटोकाॅल के पक्षकारों द्वारा एच.एफ.सी. को मॉन्‍ट्रियल प्रोट्रोकाॅल के दायरे में लाने हेतु प्रोटोकाॅल में संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई।
  • इसी क्रम में एच.एफ.सी. की समयबद्ध समािप्त हेतु मॉन्‍ट्रियल प्रोटोकाॅल के पक्षकारों ने  किगाली संशोधन को अपनी सहमति दी।

किगाली संशोधन के तहत सहमति के प्रमुख बिंदु

  • कानूनी रूप से बाध्यकारी यह संशोधन 1 जनवरी, 2019 से लागू है।
  • इसके तहत विभिन्‍न अनुसूचियों और समय-सारिणी के साथ देशों की 3 श्रेणियां बनाई गई हैं, जो अपनी समय-सारिणी  के अनुसार, एच.एफ.सी. के उत्पादन और उपभोग में कमी करेंगे।
  • विकसित देश इसके लिए विकासशील देशों को और ज्यादा वित्तीय मदद उपलब्ध कराने पर भी सहमत हुए हैं।
     

  • किगाली संशोधन के तहत मॉन्ट्रियल प्रोटोकाॅल के पक्षकार हाइड्रोफ्‍लोरोकार्बन (HFC) के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध ढंग से कम करेंगे।
  • इस संशोधन के तहत वर्ष 2047 के अंत तक ओजोन रिक्तिकारक पदार्थों में 80-85 प्रतिशत तक की क्रमिक कमी के लिए एक समय-सीमा को मंजूरी दी गई है।
     

किगाली संशोधन के सकारात्मक बिंदु

  • HFCs को चरणबद्ध तरीके से कम करने पर लगभग 105 मिलियन टन कार्बन डाइआॅक्साइड के उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है।
  • इससे वर्ष 2021 तक वैश्विक तापमान वृद्धि में 0.5 डिग्री सेल्सियस तक कमी होने का अनुमान है ।
  • इसके तहत ऊर्जा कुशल प्रौद्योगिकियों को अपनाने से न केवल ऊर्जा दक्षता में लाभ प्राप्त होगा, बल्कि CO2 के उत्सर्जन में कमी से यह जलवायु संतुलन में भी लाभकारी सिद्ध होगा।
  • इससे नई पीढ़ी के वैकल्पिक रेफ्रिजरेंट और घरेलू नवाचार को बढ़ावा देने वाले नए अवसर खुलेंगे।

किगाली संशोधन से संबंधित (संभावित) चुनौतियां 

  •  किगाली पहल का, पहले से जारी सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के साथ तालमेल बनाना चुनौतीपूर्ण होगा।
  • ‘गैर एचएफसी’ वैकल्पिक घरेलू उपकरणों के निर्माण हेतु सक्षम प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण एवं विकास की चुनौती।
  • किगाली संशोधन के तहत अपनाई गई भिन्‍न-भिन्‍न समय-सारिणियां एवं देशों की श्रेणियां इसके वांछित उद्देश्यों की समयबद्ध प्राप्ति में बाधा बन सकती हैं।

संकलन-विजय धर पाठक
 


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