Contact Us - 0532-246-5524,25 | 9335140296
Email - ssgcpl@gmail.com
|
|

Post at: Sep 07 2021

इंदौर : भारत का पहला जल आधिक्य शहर

वर्तमान परिप्रेक्ष्य  

  • 11 अगस्त, 2021 को केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय ने इंदौर को भारत का पहला जल आधिक्‍य (Water Plus) शहर घोषित किया।
  • इंदौर ने स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2021 के तहत देश के पहले जल आधिक्‍य शहर (Water Plus city) होने का प्रमाण-पत्र प्राप्‍त किया है।
  • ध्यातव्य है कि इंदौर को भारत के सबसे स्वच्‍छ शहर का दर्जा भी प्राप्‍त है। (लगातार चौथी बार) 

जल आधिक्‍य प्रमाण-पत्र प्राप्‍त करने के मापदंड 

  • एक शहर को उसके प्रशासन के तहत नदियों और नालों में स्वच्‍छता बनाए रखने के लिए वाटर प्‍लस सिटी सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है। 
  • किसी शहर को जल आधिक्‍य (Water Plus) तभी घोषित किया जाता है, जब- घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से छोड़े गए संपूर्ण अपशिष्ट जल को पूर्णतया उपचारित किया जाए।
  • शहर का गंदा पानी बिना उपचार के नदी या नाले में न छोड़ा जाए।
  • शहर के सभी शौचालयों को सीवर लाइन से जोड़ा जाए तथा सार्वजनिक शौचालयों की नियमित साफ-सफाई की जाए।
  • शहर के 30 प्रतिशत सीवर के पानी को पुनर्चकित कर पुन: उपयोग हेतु बनाया जाए।

इंदौर ने यह दर्जा कैसे प्राप्‍त किया ?

  • जल आधिक्‍य की चयन प्रक्रिया में 84 शहरों ने आवेदन किए थे। इसमें से सिर्फ 33 शहरों को जमीनी सत्‍यापन के लिए उचित पाया गया था।
  • इंदौर को निम्नलिखित प्रयास के बाद जल आधिक्‍य शहर का दर्जा प्राप्‍त हुआ
  • नगर निगम इंदौर द्वारा शहर की कान्‍ह सरस्वती नदी एवं शहर में बहने वाले छोटे बड़े 25 नालों में छूटे हुए 1746 सार्वजनिक एवं 5624 घरेलू सीवर आउट फाल की टैपिंग कर नदी-नालों को सीवर मुक्त किया गया।
  • वाटर प्‍लस प्रोटोकॉल के दिशा-निर्देश के अनुसार 147 विशेष प्रकार के यूरिनल (पेशाब घर) का निर्माण किया गया।
  • तालाब, कुआं तथा समस्त जल निकायों (Water Body) की सफाई का कार्य किया गया।
  • इंदौर जल आधिक्‍य शहर के लिए तय सभी 11 मानकों पर खरा उतरा। इसे 100 प्रतिशत अंक मिले।
  • 30 प्रतिशत सीवेज जल को उपचारित कर पुन: उपयोग हेतु बनाया।
  • शहर में 7 सीवेज प्‍लांट लगाए गए, जिसके द्वारा प्रतिदिन 110 मिलियन लीटर पानी को उपचारित कर पुन: उपयोग हेतु बनाया जाता है।

अन्‍य महत्‍वपूर्ण बिंदु  

  • स्वच्‍छ भारत अभियान को अंतिम बिंदु तक ले जाने के लिए सरकार ने सफाई के साथ जल अधिशेष को भी शामिल किया है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य नदियों, तालाबों, जलाशयों, नालों आदि को साफ रखना है। 
  • जिससे नदियों एवं नालों में केवल स्वच्‍छ एवं बरसाती पानी बहे।
  • सीवर के जल का उपचार कर उसे पुन: प्रयोग हेतु तैयार किया जाए।
  • स्वच्‍छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत देश के शहरों का परीक्षण विभिन्‍न स्वच्‍छता मानकों के आधार पर किया जाता है। जैसे - ओडीएफ + (ODF +), ओडीएफ ++ (ODF ++), जल आधिक्‍य + (Water Plus)
  • जल आधिक्‍य का प्रमाण-पत्र उन शहरों को प्राप्‍त होता है, जो ओडीएफ++ (ODF ++) के सभी मानक पूर्ण कर चुके हों। 

संकलन - अशोक कुमार तिवारी


Comments
List view
Grid view

Current News List