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Post at: Sep 06 2021

बाल-केंद्रित जलवायु जोखिम सूचकांक : यूनिसेफ

वर्तमान परिप्रेक्ष्य 

  • 19 अगस्त, 2021 को यूनिसेफ ने ‘जलवायु संकट बाल अधिकार संकट: बच्‍चों का जलवायु जोखिम सूचकांक (Climate Crisis is a child rights crisis: The Children Climate Risk Index-(CCRI) जारी किया।

रिपोर्ट के संदर्भ में 

  • यह सूचकांक बच्‍चों के दृष्टिकोण से प्रथम व्यापक विश्लेषण है।
  • यह आवश्यक सेवाओं तक बच्‍चों की पहुंच के आधार पर बच्‍चों के जलवायु और  पर्यावरण आघात, जैसे कि चक्रवात और ग्रीष्म लहर (Heat Waves) के साथ-साथ उन आघातों के प्रति उनकी सुभेद्यता के आधार पर देशों का सूचकांक तैयार करता है।
  • इस रिपोर्ट का निर्माण युवा स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्त्री ग्रेटा थनबर्ग के नेतृत्व वाले वैश्विक जलवायु ग्रेटा थनबर्ग के नेतृत्व वाले हड़ताल आंदोलन की तीसरी वर्षगांठ पर फ्राइडे फॉर फ्‍यूचर (Fridays for Future) के सहयोग से किया गया है।
  • यह रिपोर्ट 163 देशों के विश्लेषण पर आधारित है।
  • इस रिपोर्ट में 33 देशों को उच्‍च जोखिम श्रेणी में रखा गया है, जहां लगभग 1 अरब बच्‍चे निवास करते हैं। यह संख्या विश्व के कुल बच्‍चों की संख्या (2.2 अरब) का लगभग आधा है।
  • भारत भी इन 33 देशों में शामिल है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
वैश्विक स्तर पर

  • विश्व के लगभग प्रत्येक बच्‍चे को आठ में से कम-से-कम एक जलवायुवीय और पर्यावरणीय खतरे का सामना करना पड़ता है। ये खतरे हैं- चक्रवात, ग्रीष्म लहर, वेक्टर जनित बीमारियां और शीशा प्रदूषण।
  • दुनिया के 850 मिलियन बच्‍चों में से प्रत्येक 3 बच्‍चों में से 1 बच्‍चा कम-से-कम 4 जलवायुवीय एवं पर्यावरणीय खतरों के प्रति सुभेद्य है।
  • 330 मिलियन बच्‍चों में से प्रत्येक 7 में से 1 बच्‍चा कम -से-कम 5 बड़े-बड़े जलवायुवीय एवं पर्यावरणीय खतरों के प्रति सुभेद्य है।

सूचकांक का विश्लेषण

  • मध्य अफ्रीकी गणराज्य सूचकांक में शीर्ष देश है, जहां के बच्‍चे जलवायु जोखिम में सर्वाधिक सुभेद्य हैं।
  • आइसलैंड सूचकांक में सबसे नीचे 163वें स्थान पर है। अर्थात यहां के बच्‍चे जलवायु जोखिम में सबसे कम सुभेद्य हैं।
  • अत्यंत जोखिम वाले लगभग एक-चौथाई (33 में से 8) देश 5 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या के विस्थापन की समस्या झेल रहे हैं।
  • अत्यंत उच्‍च जोखिम वाले देशों (80% से अधिक) में से किसी भी देश ने सेंडाई फ्रेमवर्क के तहत आपदा जोखिम न्यूनता (Disaster Risk Reduction-DRR) रणनीति नहीं अपनाया है।
  • अत्यंत उच्‍च जोखिम वाले देश कुल वैश्विक अधिकारिक विकास सहयोग (Official Development Assistance-ODA) के तहत सिर्फ 9.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का सहयोग प्राप्त कर रहे हैं।

उच्‍च जोखिम वाले 5 देश-

निम्न जोखिम वाले 5 देश-

विश्व की विभिन्‍न आपदाओं के प्रति संवेदनशील बच्‍चे

अन्य निष्कर्ष 

  • 33 अत्यंत जोखिम वाले देश सामूहिक रूप से वैश्विक कार्बन डाइआॅक्साइड उत्सर्जन में केवल 9.38 प्रतिशत का योगदान करते हैं, जबकि यहां के बच्‍चे सर्वाधिक प्रभावित (जलवायु परिवर्तन से) हैं।
  • इसके विपरीत 10 सबसे अधिक उत्सर्जन करने वाले देश सामूहिक रूप से वैश्विक उत्सर्जन का 70 प्रतिशत कार्बन डाइआॅक्साइड (CO2) उत्सर्जित करते हैं।
  • वैश्विक कार्बन डाइआॅक्साइड उत्सर्जन में चीन 30.30 प्रतिशत के साथ जहां शीर्ष पर है, वहीं सं. रा. अमेरिका 14.63 प्रतिशत के साथ द्वितीय एवं भारत 7.15 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है।
  • बच्‍चे जलवायु परिवर्तन के प्रति जिम्मेदार न होते हुए भी सबसे ज्यादा पीड़ित हैं।

भारत एवं सार्क

  • इस रिपोर्ट में भारत को 33 अत्यंत जोखिम वाले देशों में शामिल किया गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत जोखिम के मामले में 26वें स्थान पर है।
  • जबकि सार्क देशों में पाकिस्तान सर्वाधिक सुभेद्य एवं भूटान सबसे कम सुभेद्य देश है।

रिपोर्ट में सार्क देशों की स्थिति

  • ब्रिक्स देशों में भारत के बच्‍चे जहां सर्वाधिक सुभेद्य स्थिति में है,वहीं रूस के बच्‍चे सबसे कम सुभेद्य हैं।

BRICS देशों की स्थिति

इस समस्या के समाधान के लिए यूनिसेफ के 5 सुझाव/आह्वान

 संकलन-अशोक कुमार तिवारी


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