Contact Us - 0532-246-5524,25 | 9335140296
Email - ssgcpl@gmail.com
|
|

Post at: Sep 03 2021

भारतीय विमानपत्तन आर्थिक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2021

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 4 अगस्त, 2021 को संसद में भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (Airports Economic Regulatory Authority of India: AERA) संशोधन विधेयक, 2021 पारित कर दिया गया।
  • उक्त संशोधन विधेयक AERA (एयरा) अधिनियम, 2008 में संशोधन करने का प्रस्ताव करता है।
  • ध्यातव्य है कि AERA (एयरा) संशोधन विधेयक, 2021 को 24 मार्च, 2021 को लोकसभा में पेश किया गया,  जिसे लोक सभा द्वारा 29 जुलाई 2021 को पारित कर दिया गया था।

प्रमुख प्रावधान

  • केंद्र सरकार किसी भी हवाई अड्डे को एक अधिसूचना द्वारा प्रमुख हवाई अड्डे के रूप में नामित कर सकती है।
  • प्रमुख हवाई अड्डों की परिभाषा में संशोधन करके हवाई अड्डों के एक समूह के लिए टैरिफ निर्धारण हेतु एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) (एयरा) को सक्षम बनाया गया है। 
  • केंद्र सरकार, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पी.पी.पी.) मोड के तहत निवेश हेतु एक व्यवहार्य संयोजन बनाने के लिए बोलीदाताओं हेतु एक संयोजन पैकेज के रूप में लाभदायक और गैर-लाभदायक हवाई अड्डों को क्‍लब (युग्‍मित) करने में सक्षम होगी।

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2006 में निजी कंपनियों को हवाई अड्डों का संचालन करने तथा वैमानिकी सेवाओं के लिए टैरिफ निर्धारित करने हेतु एक स्वतंत्र नियामक की आवश्यकता महसूस हुई।
  • इस हेतु वर्ष 2008 में भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (AERA) अधिनियम को अधिनियमित किया गया।
  •  वर्ष 2009 में प्रमुख हवाई अड्डों पर वैमानिकी सेवाएं प्रदान करने हेतु टैरिफ निर्धारण के लिए AERA (एयरा) की स्थापना की गई।
  • यह एक सांविधिक निकाय है तथा इसका मुख्यालय दिल्‍ली में है।
  • AERA प्रमुख हवाई अड्डों पर टैरिफ निर्धारण हेतु कॉस्ट प्‍लस फिलॉसफी का पालन करता है।
  • प्रमुख हवाई अड्डे के रूप में अर्हता प्राप्‍त करने के लिए प्रारंभिक बें‍चमार्क यात्री आवागमन प्रतिवर्ष 1.5 मिलियन यात्री  (MPPA) था, जिसे वर्ष 2019 में प्रतिवर्ष 3.5 मिलियन यात्री कर दिया गया।
  • वर्तमान में देश के 24 प्रमुख हवाई अड्डों के लिए AERA द्वारा टैरिफ का निर्धारण किया जाता है। 
  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) गैर-प्रमुख हवाई अड्डाें के वैमानिकी सेवाओं के लिए शुल्‍कों की मंजूरी देता है।

AERA कानून में संशोधन की आवश्यकता क्‍यों?

  • मौजूदा समय में प्रमुख हवाई अड्डों की वैमानिकी सेवाओं के लिए टैरिफ का निर्धारण AERA (एयरा) द्वारा स्टैंड अलोन आधार पर किया जाता है। परंतु क्‍लब (युग्‍मित) हवाई अड्डों के लिए मौजूदा दौर में टैरिफ निर्धारण का कोई प्रावधान नहीं था।
  • (युग्‍मित का तात्‍पर्य बड़े हवाई अड्डों से छोटे हवाई अड्डों को जोड़ना।)
  • यदि छोटे हवाई अड्डों के लिए टैरिफ का निर्धारण प्रमुख हवाई अड्डों के मानक पर किया जाता है, तो टैरिफ अनुचित रूप से अधिक होगा।
  •  इसलिए प्रमुख हवाई अड्डों की परिभाषा में संशोधन करके हवाई अड्डों के एक समूह के लिए टैरिफ निर्धारण हेतु AERA अधिनियम में एक सक्षम प्रावधान का प्रस्ताव किया गया है।
  •  संशोधन द्वारा यह भी सुनिश्चित करना कि निजी हवाई अड्डा संचालक अपने एकाधिकार का दुरुपयोग न कर सके।

संशोधित अधिनियम के नकारात्‍मक पहलू

  • हवाई अड्डों के समूह की परिभाषा के तहत अर्हता प्राप्‍त करने के लिए किन हवाई अड्डों को एक साथ जोड़ा जाएगा, के मानदण्ड को विधेयक पूरी तरफ स्पष्ट नहीं करता है।
  • पी.पी.पी. मोड के तहत बोलीदाताओं को पैकेज के रूप में प्राप्‍त लाभप्रद हवाई अड्डों के साथ छोटे एवं गैर-लाभकारी हवाई अड्डों का संचालन करना वित्तीय संकट के दौर में चुनौतीपूर्ण होगा। 

सुझाव

  • देश में विमानन सेवाओं के विस्तार तथा प्रमुख हवाई अड्डों के साथ ही छोटे हवाई अड्डों के समग्र विकास हेतु बनाए गए कानून के अधिकाधिक दोहन हेतु प्रमुख सुझाव निम्नवत हो सकते हैं-
  • युग्‍मित  हवाई अड्डों की परिभाषा के तहत अर्हता मानदण्डों को पारदर्शी एवं स्पष्ट करने की आवश्यकता है, ताकि निवेशक बिना किसी दुविधा के पी.पी.पी. मोड की विमानन परियोजनाओं में शामिल हो सके।
  • मौजूदा दौर में वित्तीय संकट का सामना कर रही एयर लाइनों को राहत पैकेज के रूप में विमान (लीज) किराए पर कर छूट जैसे कदम सरकार द्वारा उठाए जाने चाहिए।
  • तभी निजी कंपनियां प्रमुख हवाई अड्डों के साथ छोटे एवं गैर-लाभकारी हवाई अड्डों का संचालन प्रभावी ढंग से कर सकती हैं।

सं. विजय धर पाठक


Comments
List view
Grid view

Current News List