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Post at: Sep 03 2021

राष्ट्रीय खाद्य तेल -पॉम (ताड़) मिशन

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 18 अगस्त, 2021 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय  मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने ताड़ के तेल के लिए एक नए मिशन ‘राष्ट्रीय खाद्य तेल- पॉम (ताड़) मिशन’ की शुरुआत को मंजूरी प्रदान की।
  • इस मिशन के केंद्र में पूर्वोत्तर एवं अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को रखा गया है। 

कारण

  • वर्तमान में भारत खाद्य तेलों की घरेलू जरूरतों को पूर्ण करने के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर है।
  • आयात निर्भरता को कम करने के लिए यह मिशन सहायक सिद्ध हो सकता है।
  • भारत विश्व का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक है और 80 हजार करोड़ रुपये की लागत से 133.50 लाख टन आयात करता है।
  • अन्य तिलहनों की तुलना में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से ताड़ के तेल का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 10 से 46 गुना अधिक होता है।

उद्देश्य 

  • घरेलू खाद्य तेल की कीमतों को कम करना।
  • आयात पर निर्भरता कम करना। कुल वनस्पति तेल के आयात में पॉम ऑयल की हिस्सेदारी लगभग 62 (वर्ष 2019) प्रतिशत है।
  • ताड़ तेल के क्षेत्र में 6.5 लाख हेक्टेयर वृद्धि करना और वर्ष 2025-26 तक बढ़ाकर 10 लाख हेक्टेयर करना है, जो वर्तमान में 3.7 लाख हेक्टेयर है।
  • कच्‍चे ताड़-तेल (Palm Oil)  के उत्पादन में वृद्धि करना। वर्ष 2025-26 में इसे 11.20 लाख टन व वर्ष 2029-30 तक इसे 28 लाख टन पहंुचाना है।

मुख्य बिंदु

  • इस योजना के लिए 11040 करोड़ रु. का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है
  • कुल परिव्यय में से 8844 करोड़ रु. केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि 2196 करोड़ रु. राज्य सरकार वहन करेंगे।
  • इसमें आय से अधिक खर्च होने की स्थिति में घाटे की भरपाई की व्यवस्था भी की गई है।
  •  इस योजना के अंतर्गत ताड़ (तेल) किसानों को वित्तीय सहायता एवं पारिश्रमिक प्रदान किया जाएगा।
  • इस योजना में दो क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है-

मूल्य निर्धारण-

  • ताड़ तेल के किसान ताजे फलों के गुच्‍छे तैयार करते हैं, जिनके बीज से तेल निकलता है। अभी तक इसके मूल्य (ताजे फलों के गुच्‍छे) का निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बाजार  की परिस्थितियों के आधार पर किया जाता था।
  • यह पहला अवसर है, जब सरकार ने व्यवहार्यता मूल्य (Viability Price) के माध्यम से किसानों को उचित मूल्य का आश्वासन दिया है।

रोपण और बीज उद्यान के लिए सहायता 

  • सरकार ने ताड़ के उत्पादकों को रोपण सामग्री के लिए प्रति हेक्टेयर 29000 रुपये देने का वादा किया है, जो पहले 12000 रुपये प्रति हेक्टेयर था।
  • पौधरोपण सामग्री की कमी को दूर करने के लिए बीज रोपड़ बागानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी-
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र एवं अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के लिए  1 करोड़ रु. प्रति 15 हेक्टेयर। 
  • शेष भारत में 80 लाख रुपये प्रति 15 हेक्टेयर।

 बीजारोपण बागानों (पौधशालाओं) के लिए-

  • पूर्वोत्तर एवं अंडमान क्षेत्र 50 लाख रुपए।
  • शेष भारत 40 लाख रुपए।

लाभ


खाद्य तेल के उत्पादन में वृद्धि के लिए भारत के अन्य प्रयास

  1. तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन-1986
  2. ताड़ तेल (Palm Oil) पर राष्ट्रीय मिशन, 2014-15 
  3. पीली क्रांति
  4. खरीफ रणनीति, 2021

संकलन-अशोक कुमार तिवारी
 


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