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Post at: Sep 01 2021

ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के प्रयोग पर राष्ट्रीय मिशन

पृष्ठभूमि 

  • हाल ही में उत्तर-पश्चिम भारत में धूम-कोहरे (Smog) की स्थिति उत्पन्न हो गई थी‚ जिसका प्रमुख कारण खेतों में पराली जलाने (Stubble burning) को माना गया था।
  • धान एवं अन्य फसलों की कटाई के बाद अवशेष के रूप में प्राप्त पराली को खेतों में जलाने की बजाए उसे संग्रहीत एवं प्रसंस्कृत कर उसका बायोमास ईंधन के रूप में ऊर्जा उत्पादन में प्रयोग किया जा सकता है।
  • एक अनुमान के अनुसार‚ उत्तर-पश्चिम भारत में लगभग 30-40 मिलियन मीट्रिक टन ‘धान की भूसी’ (Paddy Straw) अप्रयुक्त रह जाती है और उसे जला दिया जाता है।
  • यदि इस अवशेष (पराली) को कोयला आधारित ऊर्जा संयंत्रों में कोयले के साथ मिश्रित कर उसका दहन किया जाए‚ तो इससे प्रति वर्ष 45000 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया जा सकेगा।

बायोमास को-फायरिंग 

  • किसी बॉयलर के भीतर प्राकृतिक गैस तथा कोयले जैसे अन्य ईंधनों के साथ बायोमास पदार्थों के सम्मिश्रण तथा दहन को बायोमास को-फायरिंग (Biomass Co-firing) कहते हैं।
     

बायोमास को-फायरिंग के लाभ

  • बायोमास को-फायरिंग में कृषि्ा अवशेष के बृहद-स्तरीय उपभोग हेतु बाजार के सृजन की क्षमता है।
  • बायोमास को-फायरिंग के माध्यम से कृषि अवशेष को पर्यावरण अनुकूल एवं लागत-प्रभावी विधि से विद्युत में परिवर्तित किया जा सकता है‚ साथ ही इससे वायु की खराब गुणवत्ता की समस्या से निपटने में भी मदद मिलेगी।
  • कृषि अवशेष के बाजार में विक्रय से किसानों को अतिरिक्त आय भी प्राप्त होगी।
  • UNFCCC ने कोयला-आधारित ऊर्जा संयंत्रों से कार्बन उत्सर्जन को कम करने के संदर्भ में बायोमास को-फायरिंग को एक ‘कार्बन-रहित प्रौद्योगिकी’ (Carbon Neutral Technology) के रूप में मान्यता दी है।

वर्तमान संदर्भ 

  • मई‚ 2021 में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा ‘कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के प्रयोग पर एक राष्ट्रीय मिशन’ स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
  • प्रस्तावित राष्ट्रीय मिशन की अवधि न्यूनतम 5 वर्ष होगी।

उद्देश्य 

  • तापीय ऊर्जा संयंत्रों से अधिक मात्रा में कार्बन-रहित ऊर्जा उत्पादन हेतु बायोमास को-फायरिंग के वर्तमान 5 प्रतिशत के स्तर में वृद्धि कर उसे उच्च स्तर तक ले जाना।
  • बायोमास पेलेट (Biomass Pellets) तथा कृषि अवशेषों की आपूर्ति शृंखला में बाधाओं को दूर करना एवं व़िद्युत संयंत्रों तक इसके परिवहन को सुगम बनाना। 
  • बायोमास को-फायरिंग के संबंध में नियामक मुद्दों पर विचार करना।

मिशन के लाभ 

  • यह मिशन खेती में पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान करेगा।
  • यह मिशन ताप विद्युत उत्पादन से होने वाले कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद करेगा।
  • यह मिशन देश में ऊर्जा संबंधी बदलाव तथा स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की तरफ बढ़ने में हमारी मदद करेगा।

प्रस्तावित संरचना

  • इस मिशन के अंतर्गत विद्युत मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में एक संचालन समिति (Steering Committee) की परिकल्पना की गई है‚ जिसमें नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय आदि के प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारक शामिल होंगे।
  • प्रस्तावित राष्ट्रीय मिशन में NTPC लिमिटेड रसद एवं बुनियादी ढांचा संबंधी सहायता देने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

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