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Post at: Aug 31 2021

राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 15 अगस्त, 2021 को 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा की।
  • इस मिशन के माध्यम से भारत को हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र (HUB) बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • यह मिशन भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए श्ुरू किया गया है।

मिशन के उद्देश्य 

पृष्ठभूमि

  • राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा सबसे पहले वर्ष, 2021-22 के बजट में की गई थी।
  • यह पेरिस समझौते (2015) के तहत अपने उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करन के लिए भारत की पहल है।

मुख्य बिंदु 

  • हरित ऊर्जा संसाधनों से हाइड्रोजन उत्पादन पर जोर दिया जाएगा।
  • भारत की बढ़ती अक्षय ऊर्जा क्षमता को हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
  • भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सलाना 12 ट्रिलियन रुपये खर्च करता है।
  • देश में लगभग 85 प्रतिशत जीवाश्म ईंधन अभी आयात किए जाते हैं।
  • ग्रीन हाइड्रोजन भारत के लिए महत्वपूर्ण (गेम चेंजर) साबित होगा। क्योंकि भारत अभी अपने तेल की मांग का 85 प्रतिशत और गैस की मांग का 53 प्रतिशत  आयात करता है।

लाभ

  • हाइड्रोजन ईंधन के उपयोग से अपशिष्ट उत्पादन नगण्य।
  • भारत में हरित हाइड्रोजन ऊर्जा सुरक्षा की गारंटी देता है, बल्कि देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में भी सहायक होगा।
  • हाइड्रोजन अन्य ईंधनों (जीवाश्म ईंधन) की तुलना अधिक दक्ष एवं कुशल ईंधन है।
  • हाइड्रोजन का उपयोग ऊर्जा उत्पादन तथा ऑटोमोबाइल में ईंधन के रूप में किया जा सकता है।
  • हाइड्रोजन का अंतरिक्षयान में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • प्रत्यक्ष रूप से हाइड्रोजन का प्रयोग आंतरिक दहन इंजन में डीजल और सीएनजी (CNG)  के मिश्रण के साथ तथा फ्‍यूल /ईंधन सेल में करके बिजली उत्पादन किया जा सकता है।
  • हाइड्रोजन ईंधन से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं होता। 
  • इसके उपयोग के दौरान कोई कार्बन फूटप्रिंट (पदचिह्न) नहीं छूटता।
  • इससे कोई ध्वनि प्रदूषण तथा दृश्यता से संबंधी प्रदूषण नहीं होता है।

चुनौतियां

  • हाइड्रोजन का घनत्व बहुत कम होता है। अत: इसके भंडारण के लिए बड़ी जगह की आवश्यकता होती है।
  • हाइड्रोजन एक रंगहीन और गंधहीन गैस है, जो दहन के बाद एक रंगहीन लौ पैदा करती है। इसलिए सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा करने के लिए तथा गैस रिसाव का पता लगाने के लिए विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है।
  • हाइड्रोजन के उत्पादन भंडारण, परिवहन और मांग निर्माण के लिए अनुसंधान और विकास में भारी निवेश की आवश्यकता है।

भारत में हाइड्रोजन ईंधन

  • भारत में अभी हाइड्रोजन गैस बनाने के लिए दो प्रकार की तकनीकों का प्रयोग होता है-
  1. पानी का इलेक्ट्रोलिसिस करके हाइड्रोजन को अलग किया जाता है। इसमें पानी ही मुख्य स्रोत है।
  2. प्राकृतिक गैस को तोड़ा जाता है, जिसमें हाइड्रोजन और कार्बन अलग हो जाते हैं । इसके दो तरह के फायदे हैं-
  • हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर लिया जाता है।
  • कार्बन का प्रयोग स्पेस, ऑटो, पोत निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक जैसे कामों में होता है।
  • भारत ने वर्ष 1962 में नांगल से विश्व में पहली बार बड़े पैमाने पर क्षारीय इलेक्‍ट्रोलाइजर से हाइड्रोजन उत्पादन किया गया।
  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने वर्ष 2006 में भारत  का पहला हाइड्रोजन और ईंधन सेल रोडमैप प्रस्तुत किया था।
  • इंडियन ऑयल काॅर्पोरेशन लिमिटेड, ने भारत में पहली उच्‍च दाब हाइड्रोजन भंडारण एवं वितरण टर्मिनल दिल्‍ली में स्थापित किया है।
  • इंडिया हाइड्रोजन एलायंस (IH2A) एक उद्योग-नेतृत्व वाला गठबंधन है, जो नीति-निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञो, अनुसंधान एजेंसियों मीडियो को साथ लाता है, ताकि ठोस सार्वजनिक नीति और निजी क्षेत्र की कार्रवाइयों का समर्थन किया जा सके।
  • भारत का पहला (हरित) हाइड्रोजन संयंत्र, इंडियन आयल कॉर्पोरेशन द्वारा मथुरा (उत्तर-प्रदेश) में स्थापित किया जाएगा।
  • एनटीपीसी आरईएल (NTPC REL) ने देश की पहल हरित हाइड्रोजन मोबिलिटी परियोजना स्थापित करने के लिए केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के साथ समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है।
  • भारत उर्वरक और रिफाइनरियों सहित औद्योगिक क्षेत्रों में अमोनिया और मिथेनॉल के उत्पादन हेतु प्रतिवर्ष छह मीट्रिक टन हाइड्रोजन की खपत करता है।
  • उद्योगों की बढ़ती मांग और परिवहन एवं बिजली क्षेत्रों के विस्तार के कारण, यह वर्ष 2050 तक बढ़कर 28 मिलियन टन हो सकता है।
  • वर्ष 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत जीवाश्म ईंधन के समान हो जाएगी।
     

वैश्विक परिदृश्य 

  • कुल उत्पादित हाइड्रोजन का 1 प्रतिशत से कम भाग हरित (Green)  हाइड्रोजन का होता है।
  • जापानी सरकार वर्ष 2050 तक कार्बन तटस्थता हासिल करने के लिए हाइड्रोजन ईंधन से चालित वाहनों को बढ़ावा दे रही है।
  • जापान ने वर्ष 2025 तक हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाले 200000 वाहनों (FCVS)  को सड़क पर उतारने का लक्ष्य रखा है, जो कि वर्ष 2019 में मात्र 3600 ही थे।

दुनिया के विभिन्‍न देशों में हाइड्रोजन ईंधन फिलिंग स्टेशन-

  • जापान ने इन स्टेशनों की संख्या वर्ष 2025 तक 320 तथा इस दशक के अंत तक 1000 करने का लक्ष्य रखा है।

निष्कर्ष

  • राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन भारत की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ, स्वच्‍छ एवं प्रदूषण मुक्त वातावरण का वादा करता है। यह मिशन भारत की आयात निर्भरता को कम करेगा जिससे विदेशी मुद्रा की बचत हो सकेगी।

संकलन-अशोक कुमार तिवारी
 


 

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