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Post at: Aug 31 2021

ग्लोबल विंड वर्कफोर्स आउटलुक, 2021-25

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 1 जून, 2021 को में ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल ने ग्लोबल विंड वर्कफोर्स आउटलुक (2021-25) रिपोर्ट जारी की। 
  • यह रिपोर्ट 10 देशों मे अभितटीय (Onshore) एवं अपतटीय (Offshore) पवन क्षेत्रक में रोजगार सृजन एवं प्रशिक्षण संबंधित अनुसंधान विकास पर प्रकाश डालती है।
  • रिपोर्ट वैश्विक पवन ऊर्जा उद्योग में वृद्धि पर प्रकाश डालने के साथ-साथ, आपूर्ति पक्ष में, रोजगार के अवसरों में वृद्धि पर प्रकाश डालती है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • अगले पांच वर्षों में तटवर्ती और अपतटीय पवन पूर्वानुमान (संभावित पवन ऊर्जा) के सुरक्षित वितरण के लिए 5 लाख श्रमिकों को जीडब्ल्यूओ (GWO) मानक के अनुरूप प्रशिक्षण की आवश्यकता है। 


  • वैश्विक कार्यबल के प्रशिक्षण की आवश्यकताओं में से 70% से अधिक मात्र 10 देशों से संबंधित है। ये देश हैं- ब्राजील, चीन, जापान, भारत, मेक्सिको, मोरक्‍को, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त राज्य अमेरिका एवं वियतनाम ।
  • इन 10 देशों को लगभग 340,000 मानव संसाधन कर्मियों की आवश्यकता है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2024 तक छ: लक्षित बाजारों में अनुमानित प्रतिष्ठानों के निर्माण एवं संचालन के लिए लगभग 77,000 प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता है।
  • पवन ऊर्जा  मूल्य श्रृंखला के निर्माण, स्थापना, संचालन और रख-रखाव से संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के लिए जीडब्ल्यूओ (GWO) मानक के अनुसार प्रशिक्षण क़ी आवश्यकता है, इसमें खरीद, निर्माण (सबसे अधिक श्रम गहन खंड)और परिवहन क्षेत्र में रोजगार को शामिल नहीं किया गया है।
  • पवन कार्यबल (Workforce) के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक मानकीकृत प्रशिक्षण सबसे प्रभावी उपकरण है। 
  • अमेरिका (विश्व में दूसरा सबसे बड़ा पवन ऊर्जा उत्पादक) और चीन (सर्वाधिक पवन ऊर्जा उत्पादक) जो पहले से ही पवन ऊर्जा के बड़े बाजार हैं। जीडब्ल्यूओ मानक के अनुरूप प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने से, वे और रोजगार सृजन में सक्षम हो सकते हैं।
  • उभरती अर्थव्यवस्थाओं को उद्योग (पवन ऊर्जा) की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर अपनी सुरक्षा और तकनीकी नेटवर्क विकसित करने की आवश्यकता है। साथ ही इसका समन्वय वैश्विक सुरक्षा प्रणालियों से करने की आवश्यकता है।
  • दुनिया भर के देशों में प्रशिक्षण और औद्योगिक शिक्षा आपूर्ति श्रृंखला में अप्रयुक्त क्षमताएं विद्यमान हैं। इन्हें जीडब्ल्यूओ के मानक के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान कर, इन क्षमताओं का इष्टतम दोहन किया जा सकता है।

अन्य निष्कर्ष

  • जीडब्ल्यूओ (GWO) वर्ष 2021 के अंत तक 150000 श्रमिकों के प्रशिक्षण का समर्थन करता है।
  • जिसके वर्ष 2022 तक  200000 श्रमिकों तक बढ़ने का अनुमान है।
  • ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (GWEC) का अनुमान है कि, अगले पांच वर्षों में इस क्षेत्र को 280000 से अधिक प्रशिक्षित श्रमिकों की आवश्यक होगी।
  • ग्लोबल विंड आॅर्गेनाइजेशन (GWO) ने पवन ऊर्जा परिनियोजन और वैश्विक ऊर्जा संक्रमण के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण और रोजगार सृजन के महत्व को उजागर करने के लिए जीडब्ल्यूईसी के साथ भागीदारी की।

भारत के संदर्भ में 

  •  ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (GWEC) और एमईसी (MEC)  इंटेलीजेंस इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से जारी इंडिया विंड एनर्जी मार्केट आउटलुक रिपोर्ट, 2025 के अनुसार
    • भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा पवन ऊर्जा बाजार है। जिसकी स्थापित क्षमता  38.6 गीगावाॅट है।
    • भारत को अगले कुछ वर्षों (2021- 2025) में 20 गीगावाॅट से अधिक अतिरिक्त क्षमता स्थापित करने की उम्मीद है। इसमें कुल 100 मेगावाॅट अपतटीय पवन शामिल है। 
    • भारत सरकार ने वर्ष, 2030 तक विद्युत में 40 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा है, जिसमें 140 गीगावाॅट पवन ऊर्जा शामिल है।
    • हालांकि वर्ष 2020 भारत में पवन ऊर्जा के उत्पादन और नीतिगत निर्णयों के नजरिये से महत्वपूर्ण वर्ष था, किंतु कोविड-19 के  प्रभाव के कारण यह क्षेत्र उम्मीद से अधिक दुष्प्रभावित हुआ। 
    • भारत में वर्तमान समय में (केंद्र एवं राज्य को मिलाकर) 10.3 गीगावाॅट की पवन ऊर्जा परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जिनके वर्ष 2023 तक पूर्ण होने की संभावना है। 
    • आने वाले 2-3 वर्षों में परियोजना (पवन ऊर्जा ) स्थापित करने की गति वर्तमान गति की दोगुना होने की संभावना है।
    • वर्ष 2020 में भारत ने ग्रिड उपलब्धता, भूमि आवंटन और बिजली बिक्री समझौतों पर हस्ताक्षर आदि की चुनौतियों के बाद भी 12 गीगावाॅट क्षमता की पवन ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की हैं।
    • वर्ष, 2020 के अंत तक 4500 व्यक्तियों को भारत में GWO प्रशिक्षण प्रदान किया गया था।
    • वर्ष, 2025 तक 12000 से ज्यादा व्यक्तियों को प्रशिक्षित करने की जरूरत होगी।

भारत के बारे में अन्य तथ्य 

काउंसिल ऑन एनर्जी एन्वायरमेंट एंड सेंटर फाॅर एनर्जी फाइनेंस (CEEW-CEF) मार्केट हैंडबुक, 2020-21 (वार्षिक अंक) के अनुसार-

  • भारत ने वर्ष 2020-21 में 12.1 गीगावाॅट (GW) बिजली उत्पादन क्षमता को जोड़ा जिसमें-
  • 7.7 गीगावाॅट अक्षय ऊर्जा स्रोत (64 %) 
  • 3.9 गीगावाॅट कोयला (लिग्‍नाइट) स्रोत से है।
  • वर्ष 2020 में समग्र ऊर्जा क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा (RE)  की हिस्सेदारी 10.1 प्रतिशत थी।

संकलन-अशोक कुमार तिवारी


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