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Post at: Aug 28 2021

DAP खाद पर सब्सिडी में वृद्धि

वर्तमान संदर्भ-

  • हाल ही में सरकार ने किसानों को डाइ-अमोनियम फाॅस्फेट (Di-Ammonium Phosphate-DAP) उर्वरक पर मिलने वाली सब्सिडी में 140 प्रतिशत की वृिद्ध कर दी है।
  • ऐसा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया आदि की कीमतों में 60 से 70 प्रतिशत वृद्धि के कारण किया गया है, जिससे किसानों के लिए बिक्री मूल्य के मौजूदा स्तर को बनाए रखा जा सके। 

मुख्य बिंदु
डीएपी (DAP) उर्वरक 

  • डीएपी के रूप में लोकप्रिय डाइ-अमोनियम फॉस्फेट भारत में पसंदीदा उर्वरक है। 
  • इसमें फाॅस्फोरस और नाइट्रोजन दोनों होते हैं, जो प्राथमिक सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं तथा 18 आवश्यक पोषक तत्वों का हिस्सा होते हैं। 
  • डीएपी की संरचना में नाइट्रोजन 18 प्रतिशत तथा फाॅस्फोरस 46 प्रतिशत होता है। यह जड़ के विकास में वृद्धि करता है। 

 उर्वरक सब्सिडी 

  • गैर-यूरिया उर्वरकों का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाता है। 
  •  निजी कंपनियों द्वारा इसका निर्धारण किया जाता है।
  •  हालांकि सरकार उचित मूल्य बनाए रखने के लिए इसमें कुछ हस्तक्षेप करती है।
  •  यह सरकार द्वारा पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना के माध्यम से विनियमित किया जाता है। 

पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना

  • यह योजना अप्रैल, 2010 से उर्वरक और रसायन मंत्रालय के उर्वरक विभाग द्वारा क्रियान्वित की जा रही है। 
  • इस योजना के तहत वार्षिक आधार पर तय की गई सब्सिडी की एक निश्चित राशि पोटाश तथा फाॅस्फेट आधारित उर्वरकों के ग्रेड को ध्यान में रखते हुए उसके पोषक तत्‍वों के आधार पर दी जाती है। 
  • इस योजना को लाने का उद्देश्य फाॅस्फोरस और पोटाश उर्वरकों की खपत में वृद्धि करना है, जिससे NPK (4:2:1) के इष्टतम संतुलन को प्राप्‍त किया जा सके। 
  • जिससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार होगा
  • फसलों की उपज में वृिद्ध होगी।             
  • किसानों की आय में वृद्धि होगी।

  •  इस योजना के लागू होने से यूरिया की कीमत में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि गैर-उर्वरकों की कीमत 2.5 से 4 गुना तक बढ़ गई है।
  • NBS गैर-उर्वरकों पर ही लागू होता है, जिससे उर्वरक असंतुलन में भी वृद्धि हुई है।     
  • उर्वरक सब्सिडी भारत में दी जाने वाली दूसरी सबसे बड़ी सब्सिडी है, जिससे अर्थव्यवस्था के वित्तीय स्वास्थ्य के साथ देश की मृदा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
  • सब्सिडी वाली यूरिया की कालाबाजारी होने से इसका लाभ  गैर-कृषि उपयोगकर्ताओं को मिल रहा है तथा पड़ोसी देशों जैसे- नेपाल तथा बांग्‍लादेश में इसकी तस्करी भी की जा रही है।  

सरकार द्वारा सब्सिडी बढ़ाने के निहितार्थ

  • देश में किसानों द्वारा बुवाई के समय उर्वरक प्राप्‍त करना अधिक महत्वपूर्ण है, कीमतों में वृद्धि के कारण बाजार में मुद्रास्फीति में वृद्धि हो जाती है। 
  • इसलिए सरकार ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए सब्सिडी में वृद्धि की। 
  • कोविड-19 के कारण लोगों की आजीविका बुरी तरह से प्रभावित हुई है, ऐसे में किसानों के पास भी आय कम होने के कारण वे इसे खरीद नहीं पाते। 
  • इसीलिए सरकार ने किसानों के विरोध को रोकने के लिए यह कदम उठाया ताकि बिक्री मूल्य के स्तर को पुरानी कीमत पर ही बनाए रखा जा सके। 

आगे की राह
सरकार ने खरीफ की बुवाई से पूर्व सब्सिडी में वृद्धि कर कीमतों को ऊपर जाने से रोक लिया, जिससे किसानों  की आय प्रभावित न हो। सरकार को भविष्य में सब्सिडी पर निर्भरता काे कम करने के लिए जैविक खेती की तरफ  तीव्र गति से बढ़ना होगा। उर्वरकों का उत्पादन  भारत में ही करने पर जोर देना होगा, जिससे कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव को रोका जा सके और लागत को कम किया जा सके। 

सं. विकाश प्रताप सिंह

 


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