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Post at: Aug 27 2021

127वां संविधान संशोधन विधेयक

वर्तमान परिप्रेक्ष्य:

  • 11 अगस्त, 2021 को राज्य सभा द्वारा 127वां संविधान संशोधन विधेयक पारित कर दिया गया।
  • 9 अगस्त, 2021 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री (वीरेन्द्र कुमार ) ने लोक सभा में इस विधेयक को पेश किया था।
  • 10 अगस्त, 2021 को लोक सभा ने इसे सर्वसम्मति से पारित किया। लोक सभा में इस विधेयक के पक्ष में 385 मत तथा विपक्ष में शून्य मत पड़े।
  • राज्य सभा ने 11 अगस्त, 2021 को इसे पारित किया। इस सदन में विधेयक के पक्ष में 187 मत एवं विपक्ष में शून्य मत पड़े ।
  • यह विधेयक 102वें संविधान संशोधन अधिनियम के कुछ प्रावधानों को स्पष्ट करने के लिए संसद में पेश किया गया है, जिसमें पिछड़े वर्गों की पहचान करने के लिए राज्यों की शक्ति को बहाल किया गया है।

पृष्ठभूमि

  • मई, 2021 में मराठा आरक्षण के संदर्भ में अपने निर्णय में सर्वोच्‍च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने 102वें संविधान संशोधन अधिनियम को बरकरार रखा।
  • सर्वोच्‍च न्यायालय ने अपने फैसले में यह कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) की सिफारिशों पर, राष्ट्रपति यह निर्धारित करेंगे कि, राज्य ओबीसी (OBC) सूची में किन समुदायों को शामिल कर सकेंगें।
  • पहले यह अधिकार राज्यों के पास (ओबीसी सूची की पहचान एवं निर्दिष्ट करने का) था।
  • भारत में केंद्र एवं राज्यों द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की पृथक-पृथक सूचियां तैयार की जाती हैं।
  • भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 15 (4), 15 (5) और 16 (4) राज्य को सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची की पहचान एवं उन्हें निर्दिष्ट करने के स्पष्ट प्रावधान करती हैं।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

  • 127वां संविधान संशोधन विधेयक अनुच्छेद 342A के खंड 1 और 2 में संशोधन करता है।
  • विधेयक संविधान में एक (342A में) नया खंड 3 जोड़ता है।
  • विधेयक अनुच्छेद 366 (26C ) और 338 B (9) में भी संशोधन करता है ।
  • इस विधेयक को यह स्पष्ट करने के लिए प्रस्तुत किया गया कि है कि राज्य सरकारें ‘ओबीसी की राज्य सूची’, जारी कर सकती हैं।
  • सर्वोच्‍च न्यायालय के निर्णय के पूर्व उपर्युक्त व्यवस्था लागू थी।
  • पिछड़े वर्गों की ‘राज्य सूची’ को पूर्णतया राष्ट्रपति के दायरे से बाहर कर दिया गया है। इस विधेयक के अनुसार, यह सूची राज्य विधानसभा द्वारा अधिसूचित की जाएगी।

संविधान संशोधन

  • संविधान के भाग 20 के अनुच्छेद 368 में संसद को संविधान एवं इसकी व्यवस्था में संशोधन की शक्ति प्रदान की गई है।

संविधान संशोधन की प्रक्रिया

  • भारतीय संविधान को निम्नलिखित रीतियों द्वारा संशोधित किया जा सकता है-
  • साधारण बहुमत द्वारा– संविधान के अनेक उपबंध संसद के दोनों सदनों के साधारण बहुमत से संशोधित किए जा सकते हैं। यह व्यवस्था अनुच्छेद 368 की सीमा से बाहर है। जैसे- नए राज्यों का सृजन अथवा पुनर्गठन।
  • विशेष बहुमत द्वारा– संविधान के ज्यादातर उपबंधों का संशोधन विशेष बहुमत द्वारा किया जाता है अर्थात उस सदन की कुल सदस्य संख्या के आधे से अधिक तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के (कम-से-कम) दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित विधेयक ।
  • विशेष बहुमत के साथ-साथ आधे से अधिक राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन से संशोधन।
  • सारी प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति क़ी सहमति के लिए प्रेषित किया जाता है।
  • राष्ट्रपति की सहमति के बाद विधेयक एक अधिनियम बन जाता है।

 


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