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Post at: Aug 27 2021

जंगलों में आग वजह और सावधानियां

चर्चा में क्यूँ-

  • 1 अक्टूबर, 2020 से अब तक, उत्तराखंड में वनाग्नि की लगभग 1000 से ज्यादा घटनाएँ सामने आ चुकी हैं,
  • जिससे 1350 हेक्टेयर वन भूमि को क्षति पहुँची है।
  • इसके अतिरिक्त, मणिपुर, नागालैंड, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश और गुजरात आदि राज्यों में भी वनाग्‍नि की श्रृंखलाबद्ध घटनाएँ घटित होती रहीं हैं।

पृष्ठभूमि

  • इंडियन स्टेट ऑफ फाॅरेस्ट रिपोर्ट 2019 के मुताबिक भारत में वर्ष 2019 में जंगलों में आग लगने के 30,000 से अधिक मामले सामने आए।
  • पिछले 6 वर्षों में जंगलों में आग लगने के मामलों में 158 फीसदी की वृद्धि हुई है।
  • रिपोर्ट के अनुसार भारत के 1/5 हिस्से में आग का खतरा है ।
  • भारत के जंगलों में मानवीय गतिविधियों के कारण 95 प्रतिशत तथा प्राकृतिक कारणों से 5 प्रतिशत आग की घटनाएं होती हैं।

जंगलों में आग के कारण

  • विगत कुछ वर्षों में बारिश कम होने से जंगलाें में नमी की कमी हो गई, जिससे जंगलों में एकत्रित सूखे अपशिष्ट आग की चपेट में आ जाते हैं।
  • मृदा में आर्द्रता की कमी भी एक कारक है, जैसे कि विगत दो मानसूनी मौसमों में अत्यल्‍प वर्षा हुई थी।
  • तराई क्षेत्र जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों के जंगलों में 15 प्रतिशत वृक्ष चीड़ के है, जिससे रेजिन निकलता है, जो वृक्षों के परस्पर घर्षण के कारण अति शीघ्र आग की चपेट में आ जाते हैं।
  • साथ ही वर्षा की कमी के कारण चीड़ वृक्षों का विस्तार तीव्र गति से हो रहा है।
  • मानव जनित कारकों के कारण जैसे जले हुए सिगरेट के बट से चिंगारी तथा माचिस का लापरवाहीपूर्वक उपयोग।
  • आधिकाधिक वनाग्नि, उसकी बढ़ती तीव्रता, उच्‍च आवृत्‍ति और अत्‍यधिक ज्वलनशील प्रकृति इन सभी को जलवायु परिवर्तन से भी जोड़कर देखा जा सकता है।

परिणाम

  • वनाग्नि की दृष्टि से सबसे संवेदनशील मौसम के दौरान कर्मचारियों का अभाव
  • सघन वनों में जलापूर्ति करने वाले भारी वाहनों को ले जाना कठिन कार्य।
  • पारंपरिक वन पंचायतें ग्राम पंचायतों से प्रतिस्थापित कर दी गई हैं।
  • वन कर्मचारियों, ईंधन और उपकरणों को समय पर संघटित करना एक चुनौती है।

समाधान

सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  • भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) ने रियल टाइम में वनाग्नि की निगरानी के लिए फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम विकसित किया है।
  • FSI के द्वारा नासा और इसरों से एकत्रित उपग्रह सूचना का उपयोग किया जाता है।
  • वनों के सीमावर्ती समुदायों को सक्षम व सशक्‍त करने हेतु वनाग्नि पर राष्ट्रीय कार्य योजना का गठन।
  • वनाग्नि निवारण और प्रबंधन योजना।

आगे की राह

  • ठंड के मौसम में मानव गतिविधियों वाले क्षेत्रों से सूखी लकड़ियों एवं टहनियों को हटाना चाहिए, ताकि गर्मी में आग को नियंत्रित किया जा सके।
  • सरकार द्वारा चीड़ वृक्षों के विस्तार पर नियंत्रण हेतु आवश्यक कदम उठाया जाना चाहिए।
  • वन-विभाग को क्षेत्रीय स्तर पर प्रशिक्षित व कुशल कर्मचारियों से युक्‍त रहना चाहिए।
  • ड्रोन, सेटेलाइट एवं छिड़काव तकनीकी से युक्‍त युक्त हवाई जहाज का उचित प्रयोग किया जा सकता है।
  • वन पंचायतों को वन क्षेत्र में अधिक सुविधा एवं अधिकार युक्त बनाना चाहिए ताकि आपात स्थिति में क्षेत्रीय गतिविधियों से आग को रोका जा सके ।
  • सरकार को प्राथमिकता तय करना चाहिए और आग के संभावित क्षेत्रों की पहचान करके मानसून को ध्यान मंे रखते हुए अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करना चाहिए।
संकलन-प्रशांत सिंह

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