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Post at: Aug 24 2021

ई वाई मोबिलिटी उपभोक्ता सर्वेक्षण, 2021

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • कंसल्‍टेंसी फर्म ‘ई वाई (Ernest & Young) के जुलाई, 2021 में संपन्‍न एक सर्वेक्षण के अनुसार, यह दावा किया गया है कि विश्व में लगाए गए कोविड-19 लॉकडाउन के कारण लोगों में पर्यावरणीय जागरूकता और चिंताओं के स्तर में वृद्धि से विश्व के इलेक्‍ट्रिक वाहन बाजार में उछाल आया है।
  • सर्वेक्षण के अनुसार, कोविड-19 महामारी के चलते शहरी आवागमन पैटर्न में भी एक अभूतपूर्व बदलाव की शुरुआत हुई है।
  • इस सर्वेक्षण में विश्व की 13 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया है।
  • इनमें भारत के अतिरिक्त आस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, जर्मनी, इटली, जापान, न्‍यूजीलैंड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम तथा संयुक्त राज्‍य अमेरिका शामिल हैं।
  • इस दौरान, विगत 12 महीनों में भारत में ई-वाहनों की बिक्री में लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

पृष्ठभूमि

  • विश्व में औद्योगीकरण के बाद से ही कोयला, तेल एवं प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों के जलने से प्रकृति में ग्रीन हाउस गैसों का उत्‍सर्जन तेजी से बढ़ा है, जो वैश्विक तापन एवं जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण है।
  • वैज्ञानिकों को आशंका है कि वर्ष 2035 तक वैश्विक तापन मौजूदा स्तर से 0.3 से 0.7 डिग्री सेल्‍सियस तक बढ़ सकता है।
  • जलवायु परिवर्तन एवं पेरिस कन्‍वेंशन प्रतिबद्धता को संज्ञान में लेकर नीति आयोग और रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (आर एम आई) इंडिया ने देश में ‘ई वाहन इकोसिस्टम’ को गति देने के लिए तकनीकी लागत, अवसंरचना उपलब्धता तथा उपभोक्ताओं से जुड़ी बाधाओं को दूर करने हेतु ध्यान केंद्रित किया है।
  • मार्च, 2021 में नीति आयोग द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इलेक्‍ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना तथा उन्‍नत बैट्रियों के विकास हेतु संचित रूप से 266 बिलियन डॉलर के पंूजी निवेश की आवश्यकता है।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत का ई-वाहन उद्योग 3.7 लाख करोड़ रु. का हो जाएगा।

अन्‍य कारण

  • सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा।
  • कम-संक्रमण-जोखिम यात्रा।

सुझाव

  • फिच सॉल्‍यूशन के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-23 के बीच ई-वाहनों की बिक्री में 26 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है।
  • फेम-॥ योजना का लक्ष्य मार्च, 2022 तक लगभग 10 लाख इलेक्‍ट्रिक वाहनों का परिचालन करना है।
  • भारत में ई-वाहनों के संदर्भ में लागत, रेंज, बैट्री तथा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्‍चर इत्‍यादि ऐसे कारक हैं, जो उपभोक्ताओं को ई-वाहन खरीदने से रोकते हैं। इसके लिए निम्न सुझाव हो सकते हैं:
  • ई-वाहन सेक्‍टर के उत्‍थान के लिए निजी क्षेत्र और सरकार दोनों को मिलकर एकीकृत रणनीति बनानी होगी।
  • शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ई-वाहन से संबंधित भ्रमों को दूर करना होगा।
  • चार्जिंग प्‍वाॅइंटों का विस्तार करना होगा। इसके लिए सरकार द्वारा निर्माताओं को प्रोत्‍साहन पैकेज देने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। देश के समस्त पेट्रोल पंपों पर चार्चिंग प्‍वाॅइंट ढांचे को विकसित करना एक अच्‍छा विकल्‍प हो सकता है।
  • ई-वाहन बैट्री से संबंधित मुद्दों को सुलझाना होगा। इसके लिए इसमें लगने वाले पदार्थों की आपूर्ति के साथ ही इस पर और अधिक अनुसंधान की आवश्यकता है, ताकि कम समय में तेजी से चार्ज होने वाली बैट्रियों का बड़ी मात्रा में उत्‍पादन किया जा सके।
  • Æ इलेक्‍ट्रिक वाहनों के विकास को भारत में चौथी औद्योगिक क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। भारत में इलेक्‍ट्रिक वाहनों के विस्तार के साथ ही इसके मरम्मत कार्य हेतु उपयुक्त उपकरणों और उन्‍नत प्रशिक्षण की भी उचित व्यवस्था करनी होगी।

निष्कर्ष
वर्तमान में तेजी से बढ़ते ई-वाहनों के प्रसार से विश्व अनेक समस्याओं से निजात पा सकता है, क्‍योंकि यह जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करके न केवल सरकारों के आयात बोझ को कम करेगा, बल्‍कि वैश्विक स्तर पर विद्यमान पर्यावरणीय चुनौतियों और बीमारियों से भी निपटने में मददगार सिद्ध होगा।

सं. विजय धर पाठक

 


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