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Post at: Aug 19 2021

निजी कंपनियों को रॉकेट लांच साइट स्थापित एवं संचालित करने की अनुमति

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • केंद्र सरकार ने निजी कंपनियों को देश के भीतर और बाहर रॉकेट लांच साइट स्थापित करने और संचालित करने की अनुमति दी है।
  • यह निर्णय 24 जून, 2021 को जारी राष्ट्रीय अंतरिक्ष परिवहन नीति, 2020 के मसौदा के अनुरूप है, जिसे अंतरिक्ष विभाग द्वारा जारी किया गया।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष परिवहन नीति2020

  • यह अंतरिक्ष परिवहन नीति, राष्ट्रीय विकास, सुरक्षा एवं सार्वभौमिकता के हित में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को काम में लाने के लिए अंतरिक्ष के क्षेत्र में स्वतंत्र तथा विश्वसनीय अभिगम में सहायता प्रदान करती है।
  • अंतरिक्ष परिवहन प्रणालियों में क्षमताओं को विकसित करने के लिए भारतीय इकाइयों के लिए वातावरण तैयार करने में मददगार है, जिससे वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में महत्वूपर्ण स्थान प्राप्त हो सके।
  • देश के भीतर इन क्षमताओं को बढ़ावा देने तथा इनके विकास के लिए भारत सरकार, अंतरिक्ष विभाग के माध्यम से –
    • अंतरिक्ष परिवहन प्रणालियों में सक्षमता एवं क्षमता को विकसित करने के लिए भारतीय इकाइयों के लिए देश के भीतर वातावरण तैयार एवं विकसित करेगी।
    • अपनी वाणिज्यिक शाखा के माध्यम से विभाग द्वारा विकसित प्रमोचन क्षमता तथा अंतरिक्ष परिवहन प्रौद्योगिकियों के वाणिज्यिक उपयोग में सहायता प्रदान करेगी।
    • अंतरिक्ष में अभिगम में सुधार तथा मानव/रोबोटिक अन्‍वेषण में सहायता के लिए उन्‍नत अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास पर ध्यान केंद्रित करेगी।
    • उन्‍नत अंतरिक्ष परिवहन क्षमताओं के संयुक्त रूप से विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों/प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ पारस्परिक रूप से लाभ वाले साझेदारियों में भाग लेगी।

उद्देश्य

  • अंतरिक्ष परिवहन प्रणालियों के संबंध में, देश में अंतरिक्ष क्षेत्र की संभावना को उजागर करना।
  • भारतीय निजी कंपनियों को वैश्विक लांच सेवा बाजार में हिस्सेदारी हासिल करने के अवसर देना।
  • अंतरिक्ष परिवहन प्रणालियों में सक्षमता एवं क्षमता को विकसित करने के लिए देश में उर्वर वातावरण तैयार करना।

मुख्य बिंदु

  • भारतीय या विदेशी क्षेत्र से किसी भी रॉकेट को लांच (कक्षीय या उपकक्षीय) केवल ‘भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन तथा प्राधिकरण केंद्र’ (IN-SPACE) से पूर्व मंजूरी के साथ किया जा सकता है।
  • भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन तथा प्राधिकरण केंद्र अंतरिक्ष विभाग के तहत सरकार द्वारा गठित स्वतंत्र निकाय है।
  • अंतरिक्ष विभाग द्वारा लाए गए राष्ट्रीय अंतरिक्ष परिवहन नीति, 2020 के मसौदे के अनुसार, रॉकेट लांच स्वयं की लांच साइट या लीज पर ली गई लांच साइट और मोबाइल प्‍लेटफाॅर्म (भूमि, समुद्र या वायु) से भी हो सकता है।
  • मासौदा नीति के अनुसार, ‘इन-स्पेस’ [IN-SPACE] की मंजूरी प्राप्त करने के लिए प्रस्तावक को वित्तीय गारंटी या बीमा कवर संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी।
  • भारत के क्षेत्र से बाहर से लांच करने के मामले में आवश्यक है कि लांच के लिए अनुमोदन संबंधित राष्ट्र/क्षेत्र के लागू कानूनों के तहत हो।
  • प्रस्तावक को लांच किए जाने वाले क्षेत्र के प्रशासन का अनुपालन एवं अनुमोदन सुनिश्चित करना होगा।
  • इसके तहत भारतीय राष्ट्रीय संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र विदेश मंत्रालय या किसी अन्य मंत्रालय द्वारा दी गई मंजूरी की पुष्टि करने के बाद संबंधित भारतीय इकाई द्वारा लांच को अधिकृत करेगा।
  • इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय क्षेत्र के बाहर किए गए लांच से संबंधित कोई दायित्व भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन प्राधिकरण केंद्र या भारतीय संघ के पास नहीं होगा।
  • यह नीति बहुत व्यापक है। इसके अंतर्गत अंतरिक्ष परिवहन के सभी पहलुओं जैसे-लांचिंग, लांचपैड, पुन: प्रवेश एवं अन्य पहलुओं को शामिल किया गया है।
  • भारतीय राष्ट्रीय संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACE) लांच संबंधी समग्र अनुमोदन के लिए जिम्मेदार नोडल एजेंसी है।

लाभ

  • भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में नई संभावनाओं का विकास होगा।
  • भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में विविधता एवं प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी जिससे गुणवत्ता में और सुधार होगा।
  • अंतरिक्ष परिवहन प्रणालियों में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे अंतरिक्ष संबंधी आवश्यक ढांचे का विकास होगा।
  • भारत वैश्विक बाजार में अपनी पहंुच में वृद्धि करेगा।
  • वाणिज्यिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

निष्कर्ष

  • भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम नित्य नए-नए आयाम स्थापित कर रहा है, इस नई नीति के क्रियान्वयन के फलस्वरूप यह कार्यक्रम और अधिक दक्षता, कुशलता एवं गुणवत्ता के साथ वैश्विक खिलाड़ियों (देश एवं संस्था) से प्रतिस्पर्धा में सक्षम हो सकेगा।

संकलन-अशोक कुमार तिवारी 


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