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Post at: Aug 19 2021

भारत-अमेरिका जलवायु एवं स्वच्‍छ ऊर्जा एजेंडा-2030

वर्तमान परिदृश्य

  • 22 अप्रैल, 2021 को ‘लीडर्स समिट ऑन क्‍लाइमेट (Leader’s Summit On Climate) के दौरान ‘भारत-अमेरिका जलवायु एवं स्वच्‍छ ऊर्जा एजेंडा, 2030’ की शुरुआत की गई
  • ‘लीडर्स समिट ऑन क्‍लाइमेट’ शिखर सम्मेलन जलवायु मुद्दे पर केंद्रित वैश्विक बैठकों की श्रृंखला का एक हिस्सा है।
  • इस अवसर पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो-बिडेन ने अमेरिकी ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को वर्ष 2005 के स्तर से वर्ष 2030 तक 50-52 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य घोषित किया।
  • वहीं भारत ने वर्ष 2030 तक 450 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य निर्धारत किया है।
  • स्वच्‍छ ऊर्जा एजेंडा, 2030 के माध्यम से, भारत और अमेरिका अपने महत्वाकांक्षी जलवायु और स्वच्‍छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्‍त करने हेतु द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करेंगे।
  • इस संयुक्त पहल का उद्देश्य निवेश जुटाना, एवं स्वच्‍छ प्रौद्योगिकी को प्रदर्शित करना है।

शिखर सम्मेलन में भारत की ओर से घोषित मुख्य बिंदु

  • कोविड-19 के पश्चात सतत जीवन शैली पर पुन: बल दिया जाएगा।
  • भारत ने वर्ष 2030 तक 450 गीगावॉट का महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन फुटप्रिंट वैश्विक औसत से 60 प्रतिशत कम है।

साझेदारी का लक्ष्य

  • वित्त जुटाना तथा स्वच्‍छ ऊर्जा परियोजना को गति देना ।
  • उद्योग, परिवहन, बिजली और भवन क्षेत्रों को कार्बन मुक्त करने हेतु आवश्यक स्वच्‍छ प्रौद्योगिकी का विस्तार करना।
  • जलवायु-संबंधी प्रभावों के जोखिमों के मापन, प्रबंधन और अनुकूलन हेतु क्षमता निर्माण करना है।

भारत-अमेरिका के मध्य अन्य ऊर्जा पहल

  • भारत के असेवित (Unserved) क्षेत्रों तक स्वच्‍छ ऊर्जा पहुंच के लिए यूएस-इंडिया क्‍लीन एनर्जी फाइनेंस (USICEF) पहल।
  • वर्ष 2009 में पार्टनरशिप टू एडवांस क्‍लीन एनर्जी पहल।

निष्कर्ष

  • दोनों देशों के परस्पर सहयोग से ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन में कमी आ सकती है।
  • भारत अपने पेरिस जलवायु सम्मेलन की स्वैच्‍छिक प्रतिबद्धता को प्राप्‍त कर सकेगा।
  • हरित तकनीकी से निम्न कार्बन फुटप्रिंट पेरिस जलवायु सम्मेलन की प्रतिबद्धता को प्राप्त करने में सफलता प्रदान करेगा, जिसका लक्ष्य पृथ्वी का तापमान 2OC से ज्यादा बढ़ने से रोकना है।
  • जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक चुनौती है, विश्व के सभी देश परस्पर सहयोग से इसे रोक सकेंगे।

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