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Post at: Aug 18 2021

हृदयाघात शोध हेतु : भारत का पहला बायो-बैंक

वर्तमान परिपेक्ष्य

  • 5 अगस्त, 2021 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्‍नोलॉजी (तिरुवनंतपुरम, केरल) में भारत के पहले हृदयाघात शोध (संस्थान) बायो-बैंक का उद््घाटन हुआ।
  • अभी तक देश में कोई हृदयाघात शोध संस्थान नहीं है, तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में प्रत्‍येक वर्ष होने वाली कुल मृत्‍यु में 27 प्रतिशत भाग का हृदयरोग से संबंधित लोगों का है।
  • 40-69 आयु वर्ग में 45% मृत्‍यु का कारण हृदय रोग है।

  • हृदयाघात संबंधी सटीक आंकड़े एकत्रित करना, जिससे उसके निदान एवं उपचार को संस्थागत रूप प्रदान किया जा सके।
  • चिकित्‍सकों और वैज्ञानिकों द्वारा हृदयाघात से संबंधित रुग्‍णता एवं मृत्‍यु-दर को समझना एवं साथ-साथ उसका समाधान खोजने में सहायता मिलना।

विशेषताएं

  • यह भविष्य के उपचारों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में रक्‍त, बायोप्‍सी और नैदानिक आंकड़ें एकत्र करेगा।
  • यह भविष्य के उपचारों और प्रौद्योगिकियों के विकास में मार्गदर्शन करने में सहायक होगा।
  • यह बायो-बैंक, भारतीय बच्‍चों और वयस्कों में हृदय संबंधी बीमारियों और हृदयाघात के बारे में अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा, जो पश्चिमी देशों की तुलना में काफी अलग है।
  • यह आणविक तरीकों को समझने में बहुत मददगार साबित होगा और हृदयाघात के कारणों की पहचान, निदान और उपचार में सुधार करेगा।
  • यह भारत एवं विदेशों में अनुसंधान की सुविधा प्रदान करेगा।

अन्‍य महत्‍वपूर्ण बिन्‍दु:

  • इसकी भंडारण सुविधाओं में -4,-20 एवं -80 डिग्री मैकेनिकल फ्रीजर और एक तरल नाइट्रोजन भंडारण प्रणाली शामिल है, जो -140o डिग्री सेल्‍सियस पर जैव नमूने कई वर्षों तक संग्रहित कर सकती है।
  • वर्तमान में लगभग 25000 जैव नमूने संग्रहित करने की सुविधा है।
  • जैव नमूनों में ओपन हर्ट सर्जरी (खुली हृदय शल्‍य चिकित्‍सा) के दौरान प्राप्‍त रक्‍त, सीरम, ऊतक के नमूने और हृदयाघात के रोगियों से एकत्र किए गए माेनोन्‍यूक्‍लियर सेल (पीबीएमसी) और जीनोमिक डीएनए शामिल हैं।
  • श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंससेज एंड टेक्‍नोलॉजी (एससीटीआईएमएसटी) के बायो बैंक ने हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमापैथी में सहयोगात्‍मक अनुसंधान के लिए इनस्टैम बेंगलुरु के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो दिल की मांसपेशियों के फूलने से संबंधित है।

केयर एचएफ (CARE-HF)

  • आईसीएमआर ने हृदय संबंधी बीमारी के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एससीटीआईएमएसटी के साथ नेशनल सेंटर फाॅर एडवांस्ड रिसर्च एंड एक्‍सीलेंस इन हार्ट फेलियोर (केयर-एचएफ) की शुरुआत की थी।
  • हृदयाघात बायो-बैंक इस परियोजना के प्रमुख घटकों में से एक है, जिसमें अत्‍याधुनिक भंडारण सुविधाओं के विकास के लिए 85 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की गई है।

बायो-बैंक: बायो-बैंक एक महत्‍वपूर्ण संसाधन होते हैं। जिसमें-

  • मानव शरीर के अंगों के उच्‍च गुणवत्‍ता वाले जैविक नमूनो का संग्रह होता है।
  • जिसका उपयोग आणविक तरीकों को समझने और हृदयाघात के कारणों की पहचान, निदान और उपचार में सुधार के लिए किया जाता है।

श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल सांइसेज एंड टेक्‍नोलॉजी:

  • श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल सांइसेज एंड टेक्‍नोलॉजी (SCTIMST) (पूर्व में श्री चित्रा तिरुनल मेडिकल सेंटर) एक स्वायत्त मेडिकल स्कूल और भारत में राष्ट्रीय महत्‍व का एक संस्थान है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1976 में तिरुवनंतपुरम, केरल में हुई थी।
  • संस्थान का नाम त्रावणकोर के अंतिम महाराजा चिथिरा तिरुनल वर्मा के नाम पर रखा गया था, जिन्‍होंने इमारत को उपहार में दिया था।
  • यह संस्थान विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में है।
  • यह भारत के सबसे प्रमुख अनुसंधान संस्थानों और केंद्रोंं में से एक है।

सं-अशोक कुमार तिवारी


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