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Post at: Aug 18 2021

NISAR उपग्रह : ‘इसरो-नासा’ संयुक्त मिशन

वर्तमान संदर्भ

  • 30 जुलाई, 2021 को भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने अपने एक लिखित उत्तर के माध्यम से लोक सभा को अवगत कराया कि इसरो (ISRO) तथा नासा (NASA) के संयुक्त मिशन निसार (NISAR-‘NASA-ISRO’ Synthetic Aperture Radar) उपग्रह का प्रक्षेपण वर्ष 2023 तक प्रस्तावित है।
  • NISAR नाम NASA-ISRO-SAR का संक्षिप्‍त रूप है, जिसमें SAR सिंथेटिक एपर्चर रडार को संदर्भित है, जिसका उपयोग पृथ्वी की सतह में परिवर्तन मापन हेतु िकया जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • इसरो तथा नासा ने 30 सितंबर, 2014 को एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (Earth- observatory satelite) ‘NISAR’ को लेकर समझौता किया ।
  • भारत इस परियोजना में लागतजन्‍य (788.00 करोड़)तथा तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।
  • इसका प्रक्षेपण वर्ष 2023 में भारत के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाना प्रस्तावित है।
  • इस परियोजना की वैधता अवधि 3 वर्ष तक रखी गई है।

उद्देश्य

  • इस उपग्रह का लक्ष्य उन्‍नत रडार इमेिंजंग का उपयोग करके भूमि की सतह में परिवर्तन के कारणों तथा परिणामों का वैश्विक मापन तथा डाटा संग्रहण करना है।

कार्य

  • निसार नासा द्वारा प्रक्षेपित किए गए अब तक के सबसे बड़े परावर्तक एंटीना से युुक्‍त है।
  • इसके प्राथमिक लक्ष्यों में पृथ्वी की सतह में सूक्ष्म परिवर्तनों पर नजर रखना, आसन्‍न ज्‍वालामुखी विस्फोटों के चेतावनी संकेतों को देखना, बदलते पारिस्थितिकी तंत्र, प्राकृतिक खतरों, समुद्र जलस्तर में वृद्धि, भूजल आपूर्ति निगरानी में मदद करना, हिमनद के पिघलने की दर को मापना आदि शामिल है।

महत्‍वपूर्ण तथ्य

  • यह एक दोहरी-आवृत्ति (Dual-frequency) L तथा S बैंड का उपयोग करेगा।

तकनीकी योगदान

मिशन की विशेषताएं

  • नासा ने मिशन के डाटा तथा उत्‍पादों को प्राप्‍त करने के लिए ‘अलास्का सैटेलाइट फैसिलिटी डिस्ट्रीब्यूटेड एक्‍टिव अर्काइव सेंटर (DAAC) का चयन किया है।
  • यह हमारे ग्रह में आए एक सेमी. से भी कम परिवर्तन को मापने में सक्षम है।

भारत को लाभ

  • NISAR उपग्रह से प्राप्‍त डाटा तथा उसके निष्कर्षों से भारत को लाभ
    • आपदा प्रबंधन में
    • पारिस्थितिकी प्रबंधन में
    • विकास प्रबंधन तथा
    • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के आंकलन मे

निष्कर्ष

  • बढ़ती आपदाजनक घटनाओं से विश्व समुदाय को सुरक्षित एवं संरक्षित करने हेतु, कुशल प्रबंधन, संयोजन तथा उचित नियोजन, अति महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सं. प्रवेश तिवारी


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