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Post at: Aug 18 2021

नारियल विकास बोर्ड (संशोधन) विधेयक, 2021

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • संसद ने नारियल विकास बोर्ड संशोधन विधेयक, 2021 पारित कर दिया।
  • 4 अगस्त को यह लोक सभा द्वारा पारित किया गया जबकि उच्‍च सदन (राज्य सभा) द्वारा इसे 30 जुलाई को पारित किया गया था।
  • उल्‍लेखनीय है कि यह संशोधन विधेयक, नारियल विकास बोर्ड अधिनियम, 1979 में संशोधन करता है।
    • इस अधिनियम ने नारियल उद्योग के विकास हेतु नारियल विकास बोर्ड की स्थापना की।
  • यह विधेयक नारियल विकास बोर्ड के प्रबंधन और प्रशासन मे सुधार हेतु संरचना में संशोधन प्रस्तावित करता है।

प्रमुख संशोधन

बोर्ड के कार्य में

  • 1979 अधिनियम के तहत, बोर्ड भारत में नारियल एवं उसके उत्पादों के विपणन में सुधार के उपायों की सिफारिश कर सकता है।
  • विधेयक के अनुसार, बोर्ड भारत के बाहर नारियल और उसके उत्पादों के विपणन में सुधार के उपायों की सिफारिश भी कर सकता है।
  • अधिनियम के अनुसार, बोर्ड उन क्षेत्रों के वित्तीयन हेतु सिफारिश करता है, जहां नारियल उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है।
  • यह विधयेक सभी उत्पादक हेतु इस तरह के वित्तपोषण की सिफारिश हेतु संशोधन का प्रावधान करता है।

प्रबंधन में परिवर्तन

  • विधेयक के अनुसार, बोर्ड का अध्यक्ष जो पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) होता था अब इसे गैर-कार्यवाही बना दिया गया है।
  • विधेयक में मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) का अलग पद गठित किया गया है।
  • पूर्व में बोर्ड में जहां नागरिक आपूर्ति एवं सहकारिता विभागों के दो सदस्य शामिल होते थे, वहीं अब उपभोक्ता मामलों के विभाग के सदस्य शामिल होंगे।
  • 1979 अधिनियम के तहत केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों के प्रतिनिधि बोर्ड में शामिल होते थे।
  • विधेयक के अनुसार, चौथे राज्य के तौर पर आंध्र प्रदेश के प्रतिनिधि को शामिल किया गया है।
  • 1979 एक्ट के तहत केंद्र सरकार बोर्ड में बारी-बारी से पांच सदस्य, 10 राज्यों से नियुक्त करती थी, परंतु विधेयक के अनुसार, अब सिर्फ चार (4) सदस्य ग्यारह (11) राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्र से नियुक्त होंगे।
  • नारियल उत्‍पादकों के प्रतिनिधित्व के तौर पर केरल, तामिलनाडु एवं कर्नाटक के प्रतिनिधियों के अलावा अब आंध्र प्रदेश एवं गुजरात के नारियल उत्पादकों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

संशोधन का प्रभाव/लाभ

  • गैर-कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति से बेहतर शासन के साथ ही वह नारियल के उत्पादन एवं विपणन के क्षेत्र में नए वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने के लिए विपणन अपने विशाल अनुभव का उपयोग करने में भी सक्षम होगा।
  • नारियल उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए गैर-कार्यकारी अध्यक्ष संसाधनों का उत्तम उपयोग एवं नवीन पहलों को भी शामिल कर सकता है।
  • बोर्ड को भारत के बाहर व्यापार, विपणन आदि की अनुमति से भारत का नारियल बाजार वैश्विक बाजारों की प्रतिस्पर्धा में शामिल हो जाएगा।

नारियल विकास बोर्ड के बारे में

  • नारियल विकास बोर्ड की स्थापना जनवरी, 1981 को कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में की गई थी।
  • इसका मुख्यालय केरल के कोच्‍चि में है।
  • यह बोर्ड देश में नारियल उत्पादन और उपभोग के एकीकृत विकास के लिए उत्पादकता वृद्धि और उत्पाद विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए स्थापित एक वैधानिक निकाय है।

भारत में नारियल का क्षेत्र एवं उत्पादन

  • भारत 34.1 प्रतिशत के साथ विश्व में नारियल का सबसे बड़ा उत्पादक है।
  • वर्ष 2019-20 के द्वितीय अग्रिम अनुमान के अनुसार, देश में कुल नारियल उत्पादन 21288.24 मीट्रिक टन है तथा नारियल के अधीन क्षेत्र 21.53 लाख हेक्टेयर हैं।

देश में सर्वाधिक नारियल उत्पादक राज्य

नोट-प्रति हेक्‍टेयर नारियल उत्पादन में आंध्र प्रदेश शीर्ष पर है।

संकलन- अभिषेक कुमार


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