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Post at: Aug 17 2021

निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम (संशोधन) विधेयक, 2021

वर्तमान संदर्भ

  • निक्षेप बीमा एवं प्रत्यक्ष गारंटी निगम (DICGC) विधेयक, 2021 9 अगस्त 2021 को लोक सभा से पारित हो गया।
  • ध्यात्वय है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 30 जुलाई, 2021 को राज्य सभा में निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम (DICGC) विधेयक, 2021 प्रस्तुत किया गया।
  • जिसे 4 अगस्त, 2021 को राज्य सभा ने पारित कर दिया।
  • उल्‍लेखनीय है कि यह विधेयक डिपॉजिट इंश्योरेंस एवं क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन एक्ट, 1961 (DICGC ACT, 1961) में संशोधन करेगा।
  • DICGC अधिनियम, 1961 के तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बैंक डिपॉजिट्स और गारंटी क्रेडिट पर इंश्योरेंस देने हेतु कॉर्पोरेशन की स्थापना की गई थी।

क्या हैं निक्षेप बीमा एवं ़प्रत्यय गारंटी ?

  • जमा बीमा एक प्रकार का वित्तीय सुरक्षा उपाय है, जो तब काम आता है जब कोई बैंकिंग संस्था अपने जमाकर्ताओं को उनकी जमा पूंजी लौटाने में असफल सिद्ध होती है।
  • इसी प्रकार ऋण गारंटी ऋणदाता को ऐसी परिस्थिति में सुरक्षा प्रदान करती है जब देनदार (Debtors) अपना ऋण वापस करने में असमर्थ रहता है।

पृष्ठभूमि :

  • हाल ही में पंजाब और महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक, यस बैंक एवं लक्ष्मी विलास बैंक जैसी बैंकिंग संस्थाओं के विफल होने से ग्राहकों द्वारा जमा की गई राशि के भविष्य पर भी संकट के बादल छा गए ।
  • ऐसे में ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए जमा राशि के विरुद्ध बीमे की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

विधेयक के प्रमुख बिंदु :

आवृत क्षेत्र (Coverage):

  • इस विधयेक के अंतर्गत, वाणिज्यिक बैंकों के साथ ही क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों एवं सहकारी बैंकों सहित सभी बैंक आएंगे।
  • यह विधेयक बैंक के विफल होने की स्थिति में जमाकर्ताओं के लिए केवल 90 दिनों में 5 लाख रुपये राशि निकालने में सक्षम होने का मार्ग प्रशस्त करता है।
  • गौरतलब है कि पिछले वर्ष (2020) सरकार द्वारा बीमा कवर 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया गया जो, वर्ष 1993 से अपरिवर्तित था।
  • इस विधेयक के अंतर्गत सभी जमाखातों का 98.3 प्रतिशत व जमा मूल्य का 50.9 प्रतिशत शामिल होगा।
  • उल्‍लेखनीय है कि यह विधेयक भविष्य में अधिस्थगन (Moratorium) के अंतर्गत आने वाले बैंको को, तो आच्‍छादित करेगा ही साथ ही यह वर्तमान में अधिस्थगन का सामना कर रहे बैंकों पर भी लागू होगा।
  • ध्यातव्य है कि अधिस्थगन कानूनी रूप से अधिकृत वह अवधि है, जो देनदार द्वारा ऋण के भुगतान में देरी करने पर उसे एक मौके के रूप में दी जाती है।

बीमा प्रीमियम

  • प्रीमियम की दर निगम (DICGC) द्वारा RBI की अनुमति से निर्धारित की जाएगी।
  • वर्तमान विधेयक के अनुसार, यह दर कुल बकाया जमा के 0.15 प्रतिशत वार्षिक से अधिक नहीं हो सकती। यद्यपि इसे बाद में RBI की पूर्वानुमति से बढ़ाया भी जा सकता है।

बीमा कवर :

  • इस विधेयक में किसी भी बैंक के स्थगन की स्थिति में जाने पर उसके ग्राहकों को 90 दिन के अंदर अपनी जमा राशि में से अधिकतम 5 लाख रु. निकालने की सुविधा प्रदान की गई है।
  • किसी भी बैंक को स्थगन के तहत रखे जाने पर पहले 4 दिनों के अंदर DICGC सभी संबंधित जानकारियां एकत्र करेगा।
  • इसके अगले 30 दिनों में DICGC दावों की प्रमाणिकता जांचेगा और सभी जमाकर्ताओं से जानने का प्रयास करेगा कि उन्हें अपनी कितनी जमा राशि चाहिए। प्रमाणन (Verification) के 15 दिन के भीतर DICGC द्वारा इच्‍छुक जमाकर्ताओं को वांछित राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।

संबंधित समितियां :

  • उल्‍लेखनीय है कि उपरोक्त सुधार एम.दामोदरन समिति (2011) के सुझावों के अनुसार है, जिसने गारंटीकृत भुगतान की सीमा पूर्व के 1 लाख रु. से बढ़ाकर 5 लाख रु. करने की सिफारिश की थी।

आगे की राह-

  • ध्यातव्य है कि ब्रिक्स देशों में जमा राशि पर प्रति व्यक्ति आय के अनुपात में बीमा आच्‍छादन (Deposit insurance cover to per capita income ratio) की सबसे निम्न दर, (0.9 गुणा) भारत में है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है।
  • इच्‍छुक ग्राहकों द्वारा अतिरिक्त प्रीमियम के भुगतान पर गारंटीकृत पूंजी की अधिकतम सीमा 5 लाख से अधिक करने की आवश्यकता है। (जैसे 15 या 20 लाख आदि)
  • इसी तरह प्रीमियम की दर भी बैंकों की उधार देने की प्रवृत्तियों के जोखिम के आधार पर अलग-अलग होनी चाहिए, जो इन बैंकों को अधिक जिम्मेदार बनाएगी।
  • DICGC के अतिरिक्त निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों को भी इस संदर्भ में अवसर प्रदान करना चाहिए, जिससे प्रीमियम की दरें नीचे आएगी व ग्राहकों पर उनका बोझ नही पड़ेगा।

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