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Post at: Aug 17 2021

‘सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (MPLADS)

वर्तमान परिदृश्य

  • स्थायी वित्त समिति के अनुसार, वर्ष 2020-21 में जारी सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) की 50 प्रतिशत राशि व्यपगत हो गई है।
  • समिति ने इसे नकारात्मक परिणाम के साथ वित्तीय प्रबंधन में एक गंभीर चूक बताया है।
  • गाैरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005’ का प्रयोग करते हुए भारत में कोरोना महामारी के प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 के लिए सांसदों को मिलने वाले MPLADS फंड को अस्थायी तौर पर स्थगित कर दिया गया है।
  • MPLADS का स्थगन 1 अप्रैल, 2020 को शुरू हुए वित्तीय वर्ष से लागू है।

प्रमुख बिंदु

  • 16 मार्च, 2021 को वित्त संबंधी स्थायी समिति ने चल रही सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना को पूर्ण करने हेतु धन की मांग की थी। 
  • व्यय विभाग द्वारा उसी दिन 2200 करोड़ रुपये का आबंटन किया गया।
  • 22 मार्च को , यह राशि सांख्यिकी मंत्रालय को एक विरोध-पत्र (चेतावनी) के साथ हस्तांतरित की गई थी, कि इसे 31 मार्च तक समाप्त कर दिया जाएगा।
  • 31 मार्च तक 1,107.5 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया, शेष 1092.5 करोड़ राशि व्यपगत हो गई।
  • लोक सभा सांसद जयंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली वित्त संबंधी स्थायी समिति ने इस प्रक्रिया को तदर्थवाद की संज्ञा दी ।

परिचय
सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS)

  • MPLADS एक केंद्रीय योजना (Centre Sector Scheme) है, जो 23 दिसंबर, 1993 (8वीं पंचवर्षीय योजना 1992-97) को तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव द्वारा प्रारंभ की गई थी।

उद्देश्य :-सांसदों को एक ऐसा तंत्र उपलब्ध कराना, जिससे वे स्थानीय जरूरतों के अनुसार स्थायी सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण और सामुदायिक बुनियादी ढांचा सहित स्थानीय लोगों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए विकास कार्यों की सिफारिश कर सकें।

  • MPLADS योजना, पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित योजना है।
  • इसके तहत प्रत्येक संसदीय क्षेत्र को वार्षिक रूप से 5 करोड़ रुपये की MPLADS निधि प्रदान की जाती है।
  • वित्तीय वर्ष 2011-12 में सरकार ने इसे प्रति सांसद 5 करोड़ रुपये वार्षिक कर दिया । इसके पूर्व यह 2 करोड़ रुपये वार्षिक थी।
  • प्रारंभ में इसका क्रियान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) के अंतर्गत किया गया, जिसे अक्टूबर, 1994 में ‘सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय’ (Ministry of Statistics and Programme Implementation) के अंतर्गत स्थानांतरित कर दिया गया।

कार्य पद्धति

  • MPLADS के तहत सांसदों को प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपये की राशि, 2.5 करोड़ रुपये की दो किस्तों में आवंटित की जाती है।
  • इस योजना के तहत, सांसद निधि, सीधे जिला अधिकारियों को सहायता अनुदान (Grants-in-Aid) के रूप में जारी की जाती है।
  • योजना के तहत आबंटित की गई निधि (Fund) गैर-व्यपगत (Non-Lapsable) होती है।
  • यदि किसी वर्ष-विशेष में निधि खर्च नहीं की जाती है, तो इसे पात्रता के अनुसार, अगले वर्षों में कराए जाने वाले कार्यों में जोड़ दिया जाता है।
  • इस योजना के तहत सांसदों की भूमिका मात्र अनुशंसा करने की होती है।
  • सांसद संबंधित जिला प्राधिकारियों को अपनी पसंद के कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं, जो संबंधित राज्य सरकार की स्थापित कार्यविधियों का पालन करते हुए इन सिफारिशों को कार्यान्वित करते हैं।
  • जिला प्राधिकरण द्वारा, संबंधित जिले में कार्यान्वित की जा रही कम-से-कम 10 % परियोजनाओं का प्रतिवर्ष निरीक्षण किए जाने का उपबंध योजना के तहत किया गया है।

इस योजना के तहत, जिला प्राधिकरण के पास निम्नलिखित अधिकार/शक्तियां होती हैं

सिफारिश किए जाने वाले कार्य

(i) प्राथमिक आवश्यकताओं, जिसमें पीने के पानी की सुविधा, प्राथमिक शिक्षा, सार्वजनिक स्वच्‍छता और सड़कों आदि का निर्माण किया जाना शामिल है, से संबंधित कार्यों का चयन किया जा सकता है।
(ii) बाढ़, चक्रवात, सुनामी, भूकंप, तूफान और अकाल जैसी आपदाओं से ग्रसित क्षेत्रों में कार्यों को कार्यान्वित किया जा सकता है।

  • उक्त आपदाग्रस्त राज्य के सुरक्षित क्षेत्रों के लोक सभा सांसद राज्य के प्रभावित क्षेत्रों में अधिकतम 10 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक अनुमेय कार्यों की संस्तुति कर सकते हैं।
  • देश में विकराल प्राकृतिक आपदा आने पर सांसद, प्रभावित जिले के लिए अधिकतम 1 करोड़ रुपये के कार्यों की अनुशंसा कर सकते हैं। आपदा विकराल है या नहीं यह भारत सरकार द्वारा निर्धारित किया जाएगा।

(iii) जून, 2016 में MPLADS फंड का उपयोग स्वच्छ भारत अभियान, सुगम्य भारत अभियान, वर्षा जल संचयन के माध्यम से जल संरक्षण और सांसद आदर्श ग्राम योजना आदि योजनाओं के कार्यान्वयन में भी किया गया ।

धनराशि आवंटन की सीमाएं

(i) किसी एक सोसाइटी या ट्रस्ट के संपूर्ण जीवनकाल में एक या एक से अधिक कार्यों पर MPLADS फंड से 50 लाख रुपये से अधिक नहीं खर्च किया जा सकता है।

  • हालांकि वित्त वर्ष 2012-13 से इस राशि को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

(ii) MPLADS योजना के तहत किसी भी योजना के लिए स्वीकृत राशि 1 लाख रुपये से कम नहीं होनी चाहिए।

  • हालांकि, यदि जिला प्राधिकरण का मानना है कि कम राशि का काम, जनता के लिए फायदेमंद होगा, तो वह उसे मंजूरी दे सकता है, भले ही काम की लागत 1 लाख रुपये से कम हो।

(iii) यदि किसी कार्य की अनुमानित राशि, संसद सदस्य द्वारा कार्य के लिए इंगित राशि से अधिक है, तो स्वीकृति देने से पूर्व संसद सदस्य की सहमति आवश्यक है।

(iv) सांसद द्वारा अनुशंसित योजनाओं में दो लाख रुपये तक की योजना का कार्यान्वयन लाभुक समिति तथा दो लाख रुपये से अधिक (15 लाख रुपये तक) की योजनाओं का कार्यान्वयन विभागीय एवं 15 लाख रुपये से अधिक की योजनाओं का कार्यान्वयन निविदा (Tender) के माध्यम से किया जाता है।

कुछ विशेष उपबंध

(i) सांसदों को वार्षिक रूप से आवंटित की जाने वाली MPLADS निधि का न्यूनतम 15 % अनुसूचित जाति की आबादी वाले क्षेत्रों में तथा 5 % अनुसूचित जनजाति की आबादी वाले क्षेत्रों में कराए जाने वाले कार्यों पर व्यय करना अनिवार्य है।
(ii) आदिवासियों के कल्याण के लिए कार्यरत, ट्रस्टों और सोसाइटीज को प्रोत्साहित करने हेतु योजना, दिशा-निर्देशों में निर्धारित शर्तों के अधीन इनके द्वारा परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए अधिकतम 75 लाख रुपये की सीमा निर्धारित की गई है।

संकलन-शिशिर अशोक सिंह


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