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Post at: Aug 17 2021

अंतर्देशीय पोत विधेयक,2021

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 2 अगस्त,2021 को संसद द्वारा अंतर्देशीय पोत विधेयक (Inland Vessels Bill), 2021 पारित कर दिया गया।
  • राष्ट्रपति की स्वीकृति के उपरांत यह विधेयक 100 वर्ष पुराने अंतर्देशीय पोत अधिनियम, 1917 का स्थान लेगा।

अंतर्देशीय पोत विधेयक,2021 के बारे में-

  • यह विधेयक देश में अंतर्देशीय जलमार्गों में चलने वाले जहाजों (Ships) को सुव्यवस्थित एवं विनियमित करने में सहायता करेगा। दूसरे शब्दों में यह विधेयक जहाजों की सुरक्षा, बचाव एवं पंजीकरण में सहायता करेगा।

विधेयक का उद्देश्य

  • अंतर्देशीय जल परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरूआत करना।
  • विधायी ढांचे को उपयोगकर्ताओं के अनुकूल बनाना।
  • व्यापार करने की प्रक्रिया को आसान बनाना।
  • देश के भीतर अंतर्देशीय जलमार्ग और नौवहन से संबंधित कानूनों में एकरूपता लाना।

पृष्ठभूमि

  • वर्ष, 1917 का अंतर्देशीय पोत अधिनियम एक सीमित उद्देश्य हेतु निर्मित था।
  • वर्ष,1977 एवं वर्ष, 2007 में इसमें संशोधन किया गया था।
  • वर्ष, 1917 के अधिनियम में राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र के भीतर यांत्रिक जहाजों की प्रतिबंधात्मक आवाजाही, अनुमोदन की आवश्यकता, सीमित कार्यान्वयन प्रमाण-पत्र की वैधता, असमान मानकों एवं विनियमों से जुड़े प्रावधान शामिल थे।
  • राज्यों के बीच मौजूद इन भिन्नताओं एवं क्षेत्राधिकार की समस्या के कारण निर्बाध नौचालन और इस क्षेत्र का विकास बाधित हो रहा था।
  • एक टन सामान का रेल, रोड एवं जलमार्ग से प्रति किमी. खर्च क्रमश: 1.36 रु., 2.50 रु. एवं 1.06 रु. है जो अंतर्देशीय पोत परिवहन के विकास को प्रेरित करता है।

विधेयक के मुख्य प्रावधान

(1) एकीकृत कानून- यह राज्यों द्वारा बनाए गए अलग-अलग नियमों के बजाय पूरे देश के लिए एक एकीकृत कानून का प्रस्ताव करता है।
(2) पंजीकरण प्रमाण-पत्र-प्रस्तावित विधेयक में पंजीकरण प्रमाणपत्र का प्रावधान किया गया है। यह प्रमाण-पत्र सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मान्य होगा तथा राज्यों से अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
(3) केंद्रीय डेटाबेस- विधेयक एक इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल का भी प्रावधान करता है। यह पोर्टल पोत, पोत पंजीकरण तथा चालक दल के विवरण दर्ज करने के लिए एक केंद्रीय डेटाबेस भी प्रदान करता है।
(4) अनिवार्य पंजीकरण – इसके अंतर्गत यांत्रिक रूप से चालित सभी जहाजों का पंजीकृत होना अनिवार्य है।

  • गैर-यांत्रिक रूप से चालित सभी जहाजों को भी जिला, ताल्‍लुका, पंचायत या ग्राम स्तर पर नामांकित (Enroll) करना अनिवार्य होगा।

(5) अंतर्देशीय जल मार्ग का विस्तार- विधेयक राष्ट्रीय जलमार्गों और केंद्र सरकार द्वारा घोषित ज्वारीय जल सीमा (Tidal water limit) को शामिल करके अंतर्देशीय जल मार्ग के दायरे का विस्तार करता है।
(6) प्रदूषण संबंधी प्रावधान- विधेयक में अंतर्देशीय जहाजों के प्रदूषण नियंत्रण उपायों को भी शामिल किया गया है। विधेयक द्वारा सरकार द्वारा प्रदूषकों की सूची बनाने का भी प्रावधान करता है।

अन्य

  • संबंधित राज्य सरकारों द्वारा स्थापित प्राधिकरणों की स्थिति को संरक्षित करना और इस प्रकार प्रस्तावित कानून के प्रावधानों का प्रभावी कार्यान्यवन सुनिश्चित करना।
  • इसमें पोत निर्माण और उपयोग से जुड़े भावी विकास एवं तकनीकी प्रगति काे शामिल किया गया है।‘विशेष श्रेणी के जहाजों’ के रूप में पहचाने जाने वाले वर्तमान और भविष्य के तकनीकी रूप से उन्नत जहाजों को विनियमित करना।
  • कबाड़ एवं रद्दी से संबंधित प्रावधान, राज्य सरकारों द्वारा मलबे के अधिग्राही (रिसीवर) की नियुक्ति।
  • दायित्व के सिद्धांतो और दायित्व की सीमा से संबंधित प्रावधान। सुरक्षित व्यापार एवं व्यापारिक प्रथाओं को सुनिश्चित करने वाले बीमा की अवधारणा को विकसित और विस्तारित करना।
  • हताहतों और जांच से संबंधित उन्नत प्रावधान।
  • सेवा प्रदाताओं और सेवाओं के उपयोगकर्ताओं के लिए आसान अनुपालन की व्यवस्था।

भारत में अंतर्देशीय जल परिवहन

  • वर्तमान में, देश में 4,000 किमी. अंतर्देशीय जलमार्ग कार्यरत हैं। ज्ञातव्य है कि देश में नदियों, बैकवाटर, नहरों, खाड़ियों आदि सहित लगभग 14,500 किमी नौगम्य जलमार्ग हैं।
  • राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के अनुसार, 111 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है।
  • देश में अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) लगभग 55 मिलियन टन कार्गो को ले जाने का ईंधन दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल मार्ग है। हालांकि विकसित देशों की तुलना में भारत का आई डब्ल्यू टी बहुत कम है।

  • देश में, आई डब्ल्यू टी का संचालन गोदावरी-कृष्णा नदियों के डेल्टाई क्षेत्रों, मुंबई अंतर्देशीय जल, केरल के बैकवाटर, गंगा-भागीरथी-हुगली नदियों, गोवा की नदियों, बराक नदी एवं ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली तक सीमित है।

प्रमुख अंतर्देशीय जलमार्ग-

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI)-
स्थापना-27 अक्टूब
र, 1986

कार्य-प्राधिकरण का प्राथमिक कार्य जहाजरानी मंत्रालय द्वारा जारी अनुदानों का उपयोग करके राष्ट्रीय जलमार्गों पर अंतर्देशीय जल परिवहन के लिए बुनियादी ढांचे के विकास और रख-रखाव की निगरानी करना है।

संकलन-अभिषेक कुमार


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