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Post at: Aug 17 2021

यूनेस्को साइंस रिपोर्ट, 2021

वर्तमान परिदृश्य

  • 11 जून, 2021 को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को : UNESCO) द्वारा ‘विज्ञान रिपोर्ट, 2021: ‘स्मार्ट विकास के लिए वक्त के खिलाफ दौड़’ (UNESO Science Report, 2021 : The race against time for samanter development) शीर्षक से जारी की गई।

यूनेस्को साइंस रिपोर्ट के बारे में

  • यूनेस्को विज्ञान रिपोर्ट वर्ष 1993 में प्रकाशित होने के उपरांत से प्रत्येक 5 वर्ष के अंतराल पर प्रकाशित की जाती है।
  • यूनेस्को विज्ञान रिपोर्ट, 2021 इस श्रृंखला की सातवीं रिपोर्ट है। 
  • यूनेस्को विज्ञान रिपोर्ट का उद्देश्य विश्व भर में विज्ञान के रुझानों पर प्रकाश डालना है।
  • नवीनतम संस्करण संयुक्त राष्ट्र के 2030 सतत विकास लक्ष्य और चौथी आद्योगिक क्रांति की प्रगति की दिशा का अवलोकन करता है।
  • साथ ही यह रिपोर्ट मौखिक अनुसंधान एवं नवचार पर कोविड-19 महामारी के प्रभाव को भी शामिल करता है।
  • इस वर्ष की रिपोर्ट में एक अध्याय भारत पर भी शामिल किया गया है जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज (CDS) तिरुवनंतपुरम, केरल के निदेशक सुनील मणि ने लिखा है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • पिछले पांच वर्षों मंे विकास प्राथमिकताएं सभी आय वर्ग के देशों में मौजूद रहीं है, जिनमें डिजिटल और हरित व्यवस्था में परिवर्तन को प्राथमिकता दी गई है।
  • दस में से आठ देश अभी जीडीपी के 1 प्रतिशत से भी कम शोध पर खर्च कर करे हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) रोबोटिक्स विशेष रूप से गतिशील क्षेत्र है। जिसमें कहा गया है कि सिर्फ 2019 में इन विषयों पर लगभग 150000 लेख प्रकाशित हुए थे।
  • कृत्रिम बुिद्धमत्ता और रोबोटिक्स में अनुसंधान निम्न मध्यम आय वाले देशों में बढ़ा है, जिसने 2019 में इस क्षेत्र में 25.3% प्रकाशनों का योगदान दिया जो 2015 में मात्र 12.8% था।
  • रिपोर्ट के अनुसार कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम निवेश प्राप्त कर रहे जैसे- 2019 में कार्बन कैप्चर और स्टोरेज में अनुसंधान केवल 2500 लेख ही प्रकाशित हुए।
  • इसी तरह 2019 में वैश्विक प्रकाशनों का सिर्फ 2.5 प्रतिशत ऊर्जा क्षेत्र अनुसंधान पर खर्च हुआ।
  • रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक अनुसंधान कर्ताओं में महिलाओ की हिस्सेदारी सिर्फ एक तिहाई है। वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता में मात्र 22% महिला अनुसंधानकर्ता है।

(1) वैश्विक प्रवृत्तियां (Global Trends)
(a) अनुसंधान एवं विकास मंे निवेश-

  • वर्ष 2018 में, विश्व में अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश वैश्विक सकल घरेलू अनुपात का 1.79 प्रतिशत रहा।
  • प्रमुख देशों के R & D में जीडीपी के प्रतिशत के रूप में निवेश के आंकड़े निम्नलिखित हैं-

  • वर्ष 2014 से 2018 के बीच वैश्विक अनुसंधान व्यय में 19.2 प्रतिशत वृद्धि हुई है।
  • वैश्विक अनुसंधान कम की कुल वृद्धि में दो तिहाई भाग अमेरिका एवं चीन का है।
  • वर्ष 2014 और 2018 के बीच वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 14.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

(b) प्रति मिलियन निवासियों पर शोधकर्ता

  • वर्ष 2014 से 2018 के बीच शोधकर्ताओं की वैश्विक संख्या में 13.7% की वृद्धि हुई है।
  • वर्ष 2014 से 2018 के बीच वैश्विक शोधकर्ता व्यय में 106 प्रतिशत की वृिद्ध हुई है।

(c) अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सह लेखकत्व

  • अंतरराष्ट्रीय सह-लेखकों के साथ विश्व के सभी वैज्ञानिक प्रकाशनों का हिस्सा वर्ष 2019 में 23.5 प्रतिशत रहा है। जबकि 2015 में 21.7% था।
  • विश्व के प्रमुख देशों का अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रकाशनों में हिस्सा निम्नलिखित है-

(d) पेटेंट में रुझान

  • चीन को वर्ष 2019 में शीर्ष पांच पेटेंट कार्यालयों में सबसे अधिक (29%) पेटेंट प्राप्‍त हुए ।
  • अमेरिका (20%), यूरोपीय संघ (14%) जापान (18%) की वैश्विक पेटेंटों मंे हिस्सेदारी रही।

(e) जनसंख्या, जीडीपी और इंटरनेट उपलब्धता में वैश्विक रुझान

अन्य

  • दस में से आठ देश अभी जीडीपी के 1 प्रतिशत से भी कम शोध पर खर्च कर रहे हैं।

(2) भारत से संबंधित प्रमुख निष्कर्ष
(a) अनुसंधान में भारत का निवेश

  • अनुसंधान एवं विकास (R & D) में भारत का निवेश असंतोषजनक बना हुआ है।
  • अनुसंधान पर सकल घरेलू व्यय (GERD) वर्षों से सकल घरेलू उत्पाद के 0.7 प्रतिशत पर स्थिर रहा है। हालांकि कुल मिलाकर शोध व्यय में वृिद्ध हुई है।
  • ब्रिक्स देशों में भारत का जी ई आरडी/ जीडीपी अनुपात सबसे कम है।

(b) वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों का घनत्‍व

  • वर्ष 1990 में, भारत में अनुसंधान एवं विकास में लगे वैज्ञानिकों/इंजीनियरों की प्रति 10,000 श्रम शक्ति पर घनत्व ‘10’ था।
  • वर्तमान में यह 2018 में मामूली वृद्धि के बाद ‘11’ हो गया है। उल्लेखनीय है कि यह चीन में ‘50’ जापान में ‘130’ और दक्षिण कोरिया में ‘180’ की तुलना में बहुत कम है।

(c) सरकारी एवं निजी क्षेत्र द्वारा अनुसंधान एवं विकास

  • सरकारी क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R & D) वर्ष 2015 से लगातार घट रहा है।
  • दूसरी ओर R & D में निजी व्यावसायिक उद्यमों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत हो गई है।
  • इसके अतिरिक्त, विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ रहा है। वर्ष 2019 में R & D निजी क्षेत्र के मंे कुल निवेश का यह 16 प्रतिशत है।

(d) वैज्ञानिक प्रकाशन

  • अत्याधुनिक तकनीकों पर भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा वैज्ञानिक प्रकाशनों में वृद्धि हुई है।
  • वर्ष 2011 के 80,458 प्रकाशन से बढ़कर वर्ष 2019 में ये 1.61 लाख हो गए हैं।
  • घरेलू निगमों, अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और व्यक्तियों द्वारा पेटेंट भारत में कम ही है।

रोजगार

  • यह रिपोर्ट भारतीय स्नातक रोजगारो पर भी प्रकाश डालती है।
  • रिपोर्ट के अनुसार विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में शिक्षा की बदलती गुणवत्ता को देखते हुए इसे ‘बारहमासी चिंता का विषय बताया गया है। रोजगार योग्यता 2014 में 34% से बढ़कर 2019 में लगभग 47% हो गई है।
  • परन्तु अभी भी दो स्नातकों में सिर्फ एक ही रोजगार योग्य है।

आगे की राह

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने उद्योग, बुनियादी ढांचे और नवाचार से संबंधित सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की दिशा में ‘ठोस प्रगति’ की है।
  • रिपोर्ट विदेशी एवं स्थानीय अनुसंधान फर्मों के बीच प्रभावी बातचीत के लिए नीतिगत माध्यमों (Policy Bridges) की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है।
  • यह उन क्षेत्रों में तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र और निर्माताओं के बीच बेहतर संबंधों का भी आह्वान करता है जिनमें भारत की वैश्विक उपस्थिति है।

यूनेस्को के बारे में

  • संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है।
  • यह शिक्षा, विज्ञान एवं संस्कृति के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से शांति स्थापित करने का प्रयास करती है।
  • इसकी स्थापना 16 नवंबर, 1945 को गई थी। इसका मुख्यालय पेरिस में है।

सं- अभिषेक कुमार


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