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Post at: Aug 17 2021

एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (आईएचआईपी)

वर्तमान परिदृश्य

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री डा. हर्षवर्धन ने 5 अप्रैल, 2021 को भारत में रोग निगरानी हेतु एकीकृत डिजिटल प्‍लेटफार्म ‘इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्‍फॉर्मेशन प्‍लेटफाॅर्म (आईएचआईपी) का शुभारंभ किया।
इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्‍फॉर्मेशन प्‍लेटफाॅर्म (एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच) वर्तमान में इस्तेमाल किए जा रहे ‘एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के अगली पीढ़ी का परिष्कृत संस्करण है।

पृष्ठभूमि

एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम- यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय द्वारा वर्ष 2004 में आरंभ की गई एक पहल है।

  • इस मंच के गठन का उद्देश्य देश में रोग निगरानी तंत्र को मजबूत करना तथा महामारी प्रवण रोगों हेतु विकेंद्रीकृत राज्य आधारित निगरानी तंत्र प्रणाली को सशक्त बनाना है। Æइसी के साथ-साथ बेहतर देखभाल और गोपनीय स्वास्थ्य आंकड़ों को बनाए रखना है।

महत्‍वपूर्ण बिंदु

  • उन्‍नत रोग निगरानी प्रणाली को अपनाने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया है।
  • 135 करोड़ की आबादी वाले देश भारत के लिए सटीक, विश्वसनीय एवं उचित समय पर रोगों की जानकारी प्राप्‍त करना बहुत ही महत्‍वपूर्ण है।
  • इस मंच का उपयोग देश के अलग-अलग जिलों में आशा कार्यकर्तियों तथा एएनएम (ANM) के माध्यम से बीमारी के प्रसार से संबंधित सूचनाओं को एकत्रित करने हेतु किया जाएगा।
  • निचले स्तर के स्वास्थ्यकर्मी अपने टैबलेट के माध्यम से उपयुक्त समय पर डाटा प्रदान करेंगे।
  • यह मंच पहले की 18 बीमारियों की तुलना में अब 33 रोगों पर नज़र रखने के साथ-साथ डिजिटल मोड में निकट वास्तविक समय के डाटा को सुनिश्चित करेगा।
  • एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच ‘राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन’ से मेल खाता है तथा देश में उपयोग हो रहे अन्‍य डिजिटल सूचना प्रणालियों के अनुकूल है।
  • इसके तहत मोबाइल एप्‍लीकेशन के प्रयोग द्वारा रियल टाइम डाटा रिपोर्टिंग, स्वास्थ्य सुविधाओं की जियो-टैगिंग आदि कार्य संपन्‍न होंगे।
  • इसके तहत प्राथमिक हेल्‍थ केयर सेंटर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा जिला अस्पतालाें में लोगों द्वारा अपना स्वास्थ्य संबंधी डाटा मांगे जाने पर उन्‍हें डाॅक्‍टर द्वारा प्रदान किया जाएगा और नैदानिक परीक्षण प्रयोगशालाएं अपने यहां की जाने वाली जांचों से संबंधित डाटा भी प्रदान करेंगी।

निष्कर्ष

इच मंच (आईएचआईपी) के माध्यम से देश के दूरस्थ क्षेत्रों (गांवों तथा प्रखंड स्तर) तक प्रामाणिक डाटा संग्रह सरल हो जाएगा तथा गांवों और प्रखंड स्तर पर फैली बीमारी के प्रारंभिक लक्षणों के विषय में जानकारी एकत्रित करना तथा प्रकोप के प्रारंभ ही उससे निपटना सम्भव निपटने में सक्षम होगा।

सं. अरविंद कुमार पांडेय


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