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Post at: Aug 12 2021

विश्व की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क अब भारत में

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने पूर्वी लद्दाख में उमलिंगला दर्रे के पास 19,300 फुट से अधिक की ऊंचाई पर मोटर वाहन चलने योग्य सड़क का निर्माण कर विश्व में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
  • उमलिंगला दर्रे से होकर गुजरने वाली 52 किलोमीटर लंबी यह सड़क तारकोल से बनाई गई है और इसने बोलीविया की सबसे ऊंची सड़क के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।
  • उल्‍लेखनीय है कि बोलीविया ने अपने देश में स्थित ज्वालामुखी उतूरुंकू को जोड़ने के लिए 18,953 फीट की ऊंचाई पर सड़क का निर्माण किया है।
  • इससे पूर्व भारत में यही रिकॉर्ड 17,582 फीट पर लेह में खारदुंग ला दर्रे के पास था।
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प्रमुख बिंदु

  • इस सड़क का निर्माण कार्य 2017 में प्रारंभ हुआ था।
  • इस सड़क का निर्माण हिमांक प्रोजेक्ट के तहत किया गया है।
  • यह सड़क माउंट एवरेस्ट के आधार शिविरों से भी ऊंचे स्थान पर है।
  • माउंट एवरेस्ट का नेपाल स्थित साउथ बेस कैंप 17,598 फीट पर है जबकि तिब्बत स्थित नॉर्थ बेस कैंप 16,900 फीट की ऊंचाई पर है।
  •  इसके अलावा जिस ऊंचाई पर इस सड़क का निर्माण किया गया है वह सियाचीन ग्लेशियर से काफी ऊंचा है।
  • सियाचीन ग्लेशियर की ऊंचाई 17,700 फीट है।

कठोर और कठिन इलाका

  • सर्दियों के मौसम में यहाँ तापमान शून्य से – 40 डिग्री नीचे चला जाता है और इस ऊंचाई पर मैदानी क्षेत्रों के मुक़ाबले ऑक्सीजन का स्तर 50% रह जाता है।
  • बीआरओ की यह उपलब्धि अपने कर्मियों के साहस और विपरीत मौसमी स्थितियों में ऊंचे स्थानों पर कार्य करने की क्षमता और कुशलता के चलते प्राप्त कर सका है।

लाभ

  • उमलिंगला पास अब एक ब्लैक टॉप सड़क से जुड़ गया है। 
  • पूर्वी लद्दाख में इस सड़क के निर्माण से क्षेत्र के चूमार सेक्टर के सभी महत्वपूर्ण कस्बे आपस में जुड़ जाएंगे।
  • चिशुमले और देमचोक के लेह से सीधे आवागमन का वैकल्पिक मार्ग का विकल्प उपलब्ध कराने के कारण इस सड़क का स्थानीय लोगों के लिए काफी महत्व है
  • इसकी मदद से सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और लद्दाख में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
  • सड़क एक बहुत ही रणनीतिक बिंदु पर है क्योंकि जो गांव सड़क से जुड़े होंगे वे पूर्वी क्षेत्र में भारत-चीन सीमा के बहुत करीब हैं।

प्रोजेक्ट हिमांक

  • हिमांक, जिसे प्रोजेक्ट हिमांक भी कहा जाता है, अगस्त 1985 में शुरू हुए उत्तर भारत के लद्दाख क्षेत्र में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की एक परियोजना है। Æ
  • हिमांक परियोजना के तहत, बीआरओ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ लद्दाख में सड़कों और संबंधित बुनियादी ढांचे के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है, जिसमें खारदुंग ला, तंगलांग ला और चांग ला दर्रे में दुनिया की कुछ सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़कें शामिल हैं।
  • अब उमलिंग ला 19300 फीट की ऊंचाई के साथ पृथ्वी पर सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क है।
  • हिमांक परियोजना सियाचिन ग्लेशियर और पैंगोंग त्सो झील (14500 फीट पर) में दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध के मैदान सहित संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित करती है, जिसका पानी वास्तव में भारत-चीन सीमा तक फैला है।

संकलन-मनीष प्रियदर्शी


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