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Post at: Aug 12 2021

अकांक्षी जिला कार्यक्रम : एक मूल्यांकन

पृष्ठभूमि :

  • भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • भारत में जीवन की गुणवत्ता तथा मानव विकास में व्याप्त विषमता इसकी क्षेत्रीय विविधताओं पर निर्भर करती है।
  • जीवन प्रत्याशा, औसत आय तथा शिक्षा के मामले में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा जारी वार्षिक मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में भारत की रैंक अपेक्षाकृत निम्न है।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास क्रम में कुछ राज्यों के कुछ जिले पिछड़ गए हैं जिनको बराबरी पर लाए बिना मानव विकास सूचकांक में भारत की रैंकिंग में सुधार कठिन मालूम पड़ता है।

वर्तमान परिदृश्य :

  • 11 जून 2021 को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा एक स्वतंत्र मूल्यांकन रिपोर्ट जारी की गई।
  • रिपोर्ट में अकांक्षी जिला कार्यक्रम (ADP) को स्थानीय क्षेत्रों के विकास के लिए एक सफल मॉडल के रूप में सराहा गया है।
  • यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के मात्रात्मक विश्लेषण के साथ-साथ विभिन्न हितधारकों के साक्षात्कार पर आधारित है, जिसमें जिला कलेक्टर केंद्रीय प्रभारी अधिकारी जिले के सहायक अधिकारी एवं अन्य विकास भागीदार शामिल हैं।
  • रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा भारत में चलाए जा रहे इस प्रोग्राम की सराहना की गई है तथा इसे अन्य देशों (जहां विकास की स्थिति में क्षेत्रीय असमानताएं मौजूद हैं) के लिए सर्वोत्तम अभ्यास के रूप में अनुशंसित किया है।
  • यूएनडीपी का यह विश्लेषण एडीपी के 5 प्रमुख क्षेत्रों के 49 संकेतकों पर आधारित है, जिनमें स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, बुनियादी ढांचा, कौशल विकास एवं वित्तीय समावेशन शामिल हैं।
  • एडीपी के तहत किए गए ठोस प्रयासों के कारण पहले से उपेक्षित जिलों जिनमें दूरदराज के जिले और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिले शामिल हैं में पिछले तीन वर्षों के दौरान पहले के मुकाबले अधिक विकास हुआ है।
  • आकांक्षी जिलों और उनके समकक्षों के बीच तुलना करने पर पाया गया कि गैर-अकांक्षी जिलों के मुकाबले आकांक्षी जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है।

स्वास्थ्य एवं पोषण : रिपोर्ट

  • स्वास्थ्य एवं पोषण और वित्तीय समावेशन के क्षेत्रों में रिपोर्ट में पाया गया है कि घरों पर होने वाले प्रसव के 9.6 प्रतिशत से अधिक मामलों में कुशल जन्म परिचारिका ने भाग लिया।
  • रक्ताल्पता वाली 5.8 प्रतिशत से अधिक गर्भवती महिलाओं का उपचार किया गया।
  • डायरिया से पीड़ित 4.8 प्रतिशत से अधिक बच्‍चों का इलाज किया गया।
  • 4.5 प्रतिशत से अधिक गर्भवती महिलाओं ने अपनी पहली तिमाही में प्रसवपूर्व देखभाल के लिए पंजीकरण कराया।
  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत क्रमश: 406 एवं 847 अधिक नामांकन हुए।
  • प्रति एक लाख जनसंख्या पर 1,580 अधिक खाते खोले गए ।
  • बीजापुर और दांतेवाडा में चलाए गए, ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ अभियान से इन जिलों में मलेरिया के मामलों में क्रमश : 71 प्रतिशत और 54 प्रतिशत की कमी आई है।
  • स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रमों पर लगातार ध्यान केंद्रित करने के कारण अधिक आसानी से कोविड संकट से निपटने में भी मदद मिली है।

चैंपियंस ऑफ चेंज डैशबोर्ड :

  • रिपोर्ट में इस कार्यक्रम के चैपियंस ऑफ चेंज डैशबोर्ड पर प्रदान की गई डेल्टा रैंकिंग की भी सरहाना की गई है।
  • इसके द्वारा प्रेरित स्पर्धी एवं गतिशील संस्कृति ने कमजोर प्रदर्शन करने वाले कई जिलों (बेसलाइन रैंकिंग के अनुसार) को सुधार करने के लिए प्रेरित किया है। 
  • इस कार्यक्रम की शुरूआत के बाद सर्वाधिक प्रगति करने वाले जिलों में सिमडेगा (झारखंड), चंदौली (उत्तर प्रदेश) सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) और राजगढ़ (मध्य प्रदेश) शामिल है।
  • यूएनडीपी के लचीलेपन और भेद्यता सूचकांक के अनुसार सीतामढ़ी (बिहार)गुमला (झारखंड) दांतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) बीजापुर (कर्नाटक) और नवादा (बिहार) सबसे कम सुधार वाले जिले हैं।

आकांक्षी जिला :

  • जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आकांक्षी जिलों का रूपांतरण (Transformation of Aspirational Districts) कार्यक्रम की शुरूआत की गई।
  • यह कार्यक्रम भारत के सबसे पिछड़े जिलों के उन्नयन के उद्देश्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है इन जिलों को आकांक्षी जिले (Aspirational Districts) की संज्ञा की गई।
  • कार्यक्रम का उद्देश्य देश के अल्प विकसित जिलों में तेजी से बदलाव लाना है।
  • यह कार्यक्रम पांच विषयों यथा :

  • यह कार्यक्रम मुख्यत : तीन सिद्धांतो (3C) पर आधारित है।

  • इस कार्यक्रम के तहत नीति आयोग द्वारा जिलों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है तथा उन्हें रैंकिंग दी जाती है।

संकलन-पवन कुमार तिवारी


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