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Post at: Aug 11 2021

रामप्पा मंदिर तथा धौलावीरा : विश्व धरोहर स्थल घोषित

वर्तमान संदर्भ

  • यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति (World Heritage Conmmittee) की 44वीं वार्षिक बैठक 16 जुलाई से 31 जुलाई, 2021 के मध्य चीन के शहर फुजोऊ (Fuzhou) में संपन्न हुई।
  • इस बैठक में भारत के दो नए स्थलों, रामप्पा मंदिर (तेलंगाना) तथा सैंधव स्थल धौलावीरा (गुजरात) को विश्व विरासत स्थल का दर्जा दिया गया।
  • रामप्पा मंदिर को भारत का 39वां तथा धौलावीरा को 40वां विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।
  • इसी के साथ भारत ने विश्व धरोहर स्थल शिलालेखों के सुपर-40 क्‍लब (Super-40 Club for world Heritage site Inscription) में भी अपनी जगह बना ली।
  • भारत के कुल 40 स्थलों में 32 स्थल सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक एवं 1 स्थल मिश्रित श्रेणी में शामिल है।
  • सुपर-40 क्‍लब ऐसे देशों का समूह है जिनके कम से कम 40 स्थल यूनेस्कों की इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल हैं। भारत के अतिरिक्त इटली, फ्रंास, जर्मनी, स्पेन एवं चीन ही ऐसे अन्य देश हैं।
  • उल्‍लेखनीय है कि विश्व धरोहर समिति की इस बैठक में विश्वभर के कुल 34 नए स्थलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
  • इन स्थलों में से 29 सांस्कृतिक तथा 5 प्राकृतिक स्थल सम्मिलित हैं।
  • गौरतलब है कि इन नए स्थलों को शामिल करने के बाद विश्व के 167 देशों में विश्व धरोहर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 1154 हो गई है, जिनमें से 897 सांस्कृतिक स्थल, 218 प्राकृतिक स्थल तथा 39 मिश्रित स्थल के रूप में शामिल हैं।
  • ध्यातव्य है कि इस बैठक में ब्रिटेन के लिवरपूल शहर से विश्व धरोहर स्थल का दर्जा छीन लिया गया। गौरतलब है कि उसे वर्ष 2004 में इस सूची में शामिल किया गया था।
  • इसी के साथ लिवरपूल विश्व धरोहर स्थल का दर्जा खोने वाला विश्व का तीसरा स्थल बन गया। ऐसे अन्य दो स्थल जर्मनी की ड्रेस्डेन एल्ब घाटी (Elbe Valley) तथा ओमान की अरेबियन ओरिक्स सैंक्‍चुअरी (Arabian Oryx Sanctuary) हैं।

काकतीय रूद्रेश्वर (रामप्पा ) मंदिर, तेलंगाना

  • इस मंदिर को विश्व धरोहर स्थल में शामिल करने हेतु 2019 में प्रस्तावित किया गया था।
  • 25 जुलाई 2021 को तेलंगाना राज्य के मुलुगु जिले में अवस्थिति इस मंदिर को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की घोषणा की गई।
  • यह, विश्व धरोहर सूची में शामिल होने वाला भारत का 39वां स्थल है।
  • तेलंगाना में अवस्थिति इस मंदिर का निर्माण कार्य 1213 ई. लगभग में काकतीय राजा गणपति देव के एक सेनापति, रेचारला रूद्र द्वारा निर्मित करवाया गया था।

नामकरण

  • 40 वर्षों तक इस मंदिर के निर्माण में लगे रहे मुख्य मूर्तिकार रामप्पा के नाम पर इसे ‘रामप्पा मंदिर’ कहा जाता है।
  • यहां के स्थापित देवता रामलिंगेश्वर स्वामी हैं अत: इसे ‘रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर’ भी कहते हैं।
  • शिव मंदिर होने के कारण इसे ‘रूद्रेश्वर मंदिर’ भी कहा जाता है।

विशेषताएं

  • यह एक 6 फुट ऊंचे ताराकृति (Star Shaped) मंच पर बना है।
  • उल्‍लेखनीय है कि इस मंदिर की नींव में ‘‘सैंड बॉक्स तकनीक’’ का प्रयोग किया गया है, जो भूकंप से बचाव में सहायक हैं।
  • इस मंदिर की फर्श ग्रेनाइट तथा स्तंभ बेसाल्ट पत्थर से निर्मित है।
  • इसके स्तंभ एवं बीम पर अत्यंत सूक्ष्म एवं जटिल नक्‍काशी की गई है।
  • इस मंदिर का विमान अत्यंत हल्की ईंटों से बनाया गया है, जिनकी विशेषता है कि, यह ईंटें पानी पर भी तैर सकती है।
  • मार्कोपोलो द्वारा इस मंदिर को ‘‘दक्‍कन के मध्ययुगीन मंदिरों की आकाशगंगा का सबसे चमकीला तारा’’ कहा गया है।
  • मंदिर की उच्‍च कलात्मक गुणवत्ता की मूर्तियां क्षेत्रीय नृत्य रीति-रिवाज और काकतीय संस्कृति को दर्शाती है।

धौलावीरा

  • विश्व धरोहर समिति द्वारा अपनी 44वीं बैठक में 27 जुलाई, 2021 को इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
  • विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल होने वाला यह सिंधु घाटी सभ्यता (Indius Valley Civilisation-IVC) से जुड़ा भारत का पहला स्थल है। (पाकिस्तान में मोहनजोदड़ो प्रथम हड़प्पाई स्थल है यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने वाला)
  • गौरतलब है कि यह सैंधव सभ्यता (IVC) का पांचवा सबसे बड़ा नगर था। भारत में केवल हरियाणा का राखीगढ़ी तथा पाकिस्तान में मोहनजोदड़ो, हड़प्पा एवं गनेरीवाला ही ऐसे हड़प्पीय स्थल हैं जो धौलावीरा से बड़े थे।
  • ज्ञातव्य है कि धौलावीरा की खोज 1967-68 में जे.पी. जोशी ने की थी। हालांकि यहां पहली बार उत्खनन कार्य 1990-91 में आर.एस.बिष्ट ने करवाया।

अवस्थिति

  • धौलावीरा गुजरात राज्य के कच्‍छ जिले में खादिर बेट नामक द्वीप में स्थित है।
  • ध्यातव्य है कि यह कच्‍छ के महान रन में स्थित है, तथा कर्क रेखा इससे होकर गुजरती है।

विशेषताएं

  • यहां से सैंधव लिपि में लिखा गया 10 अक्षरों वाला साइनबोर्ड मिला है।
  • यहां का जल प्रबंधन अत्यंत उच्‍चकोटि का था।
  • यह एक मात्र सैंधव स्थल है जो तीन भागों में (दुर्ग, मध्य और निचला नगर) में विभक्त था।
  • इससे पूर्व 2020 में बजट में धौलावीरा सहित 5 शहरों में संग्रहालय खोलने की घोषणा की गई थी।

गुजरात में स्थित अन्य विश्व धरोहर स्थल

  • अहमदाबाद का ऐतिहासिक शहर
  • चंपानेर और पावागढ़ी
  • रानी की वाव
  • स्मरणीय है कि जुलाई 2019 में विश्व धरोहर समिति की 43वीं बैठक के दौरान राजस्थान के जयपुर शहर को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया था।

विश्व धरोहर स्थल में शामिल प्रमुख नवीनतम विदेशी स्थल

  • विश्व धरोहर समिति की 44वीं बैठक के दौरान भारत के अतिरिक्त जिन विदेशी स्थलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया, उनमें प्रमुख हैं-

सांस्कृतिक

1. फ्रांस का कॉरडोउन लाइट हाउस (Cordouan Light house)
2. चीन का ‍क्‍वांसू इम्पोरियम ऑफ द वर्ल्ड (Quanzhou:Emporium of the world)
3. उत्तरी आयरलैंड के ग्रेट स्पा टाउन्‍स (Great Spa Towns)
4. उरूग्वे का एटलांटिडा चर्च (Church of Atlantida)
5. इरान की ट्रांस-इरानियन रेलवे

प्राकृतिक

1.यूरोप की डैन्यूब लाइम (Denube lime)
2. रोमानिया का रोसिया मोंटाना माइनिंग लैंडस्केप

मिश्रित

  • ध्यातव्य है कि इस वर्ष किसी भी मिश्रित स्थल को इस सूची में शामिल नहीं किया गया।

संकटग्रस्त विश्व धरोहर स्थल

  • विश्व धरोहर समिति की 44वीं बैठक के दौरान ही रोमानिया के रोसिया मोंटाना माइनिंग लैंडस्केप को संकटग्रस्त वैश्विक धरोहरों की सूची में शामिल किया गया ।
  • वर्तमान में संकटग्रस्त वैश्विक धरोहरों की सूची में कुल 52 स्थल शामिल हैं।
  • उल्‍लेखनीय है कि विश्व की संकटग्रस्त धरोहरों की सूची में भारत का कोई भी स्थल शामिल नहीं है।

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