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Post at: Aug 11 2021

इंद्रजाल

चर्चा में क्यांे

  • हाल ही में हैदराबाद स्थित ग्रेन रोबोटिक्स नामक अनुसंधान एवं खोज (R4D) कंपनी ने भारत के प्रथम 100 प्रतिशत स्वदेशी ड्रोन सुरक्षात्मक डोम (गुंबद) निर्मित करने का दावा किया है। जिसका नाम इंद्रजाल है।

क्या होता है ड्रोन डिफेंस डोम

  • ड्रोन डिफेंस डोम एक ऐसी तकनीक/प्रणाली है जो किसी क्षेत्र विशेष की सुरक्षा हेतु स्थापित की जाती है।
  • इस प्रणाली के माध्यम से आस-पास के दूसरे (दुश्मन) ड्रोन का पता लगाया जाता है, उनकी पहचान की जाती है और उन्हें या तो अक्षम (Soft kill) बना दिया जाता है या फिर नष्ट (Hard kill) कर दिया जाता है।
  • संपूर्ण विश्व के रक्षा उद्योग इस तरह की प्रणाली के विकास पर केंद्रित हैं जो दुश्मन के ड्रोन को ट्रैक करने, पहचानने और उनका मुकाबला करने में सक्षम हों ।

आवश्यकता क्या है

  • 27 जून, 2021 को भारतीय वायु सेना के जम्मू केंद्र पर उच्‍च-क्षमता वाले विस्फोटकयुक्त दो ड्रोन से हमला किया गया ।
  • साथ ही कई बार पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर में भारत-पाकिस्तान सीमा पर भी ड्रोन से नशीले पदार्थ एवं हथियार गिराए जाने की खबरें आती रही हैं।
  • ड्रोन का प्रयोग राज्य एवं गैर-राज्य अभिकर्ता कई बार जासूसी के लिए भी करते हैं।
  • उपर्युक्त संदर्भ को ध्यान में रखते हुए भारत की संप्रभुता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु ड्रोन डिफेंस प्रणाली आवश्यक है।

कैसे कार्य करती है यह प्रणाली

  • ड्रोन सुरक्षा प्रणाली मुख्यत: चार यंत्रों के संयोग पर संचालित होती है।

(i) रडार-रडार के माध्यम से ड्रोन की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाता है।
(ii) कैमरा (सेंसर)– रडार जो सूचना कमांड केंद्र को भेजता है, उसके आधार पर कैमरा स्कैंनिंग के माध्यम से रडार की पहचान करता है।
(iii) जैमर-कैमरा द्वारा पहचान के उपरांत पुन: सूचना कमांड केंद्र को भेजता है, जिसके तुरंत बाद जैमर कई तरह की िफ्रक्‍वेंसी (आवृत्ति) का प्रयोग कर अक्रांता ड्रोन के GPS एवं सूचना तंत्र को बंद कर देता है। पुन : जैमर गन के माध्यम से ड्रोन को गिराने या नष्ट करने का कार्य करता है।
(iv) एकीकृत सूचना केंद्र-रडार, कैमरा (सेंसर) तथा जैमर तीन ही यंत्र समन्‍वय हेतु एकीकृत सूचना केंद्र (सूचना कमांड केंद्र) से जुड़े रहते हैं।

इंद्रजाल की विशेषता

  • यह पूर्णत: स्वदेशी ड्रोन सुरक्षा प्रणाली है।
  • यह प्रणाली 1000-2000 वर्ग किमी. क्षेत्र की सुरक्षा कर सकती है।
  • यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा तथा रोबोटिक्स द्वारा संचालित 10 आधुनिक तकनीकों के संयोजन पर कार्य करते हुए सुरक्षा बलों को स्वायत्तता प्रदान करने के सिद्धांत पर आधारित है।
  • यह चौबीसों घंटे, सातो दिन वर्ष भर (24×7×365) वास्तविक समय में स्वतंत्र रूप से पहचानने, मूल्यांकन करने, निर्णय लेने और ड्रोन को अवरुद्ध करने में सक्षम है।
  • यह प्रणाली एकल, एकाधिक या विभिन्‍न यू.ए.वी. वाले संयोजनों, मुद्रक सामग्रियों और इसी तरह अन्य खतरों का मुकाबला करने में सक्षम है।

लाभ

  • चूंकि यह आधुनिक युद्ध पद्धति के तहत ए.आई.और रोबोटिक्स जैसी स्मार्ट तकनीकों पर आधारित है इसलिए ड्रोन हमले या इस तरह की अन्य स्थितियों में भारत को मैनुअल हथियारों या ‘प्‍वाइंड बेस्ड हथियारों’ पर निर्भर रहने का जोखिम नही उठाना पड़ेगा।
  • इस तरह की रक्षा प्रणाली कम लागत पर पश्चिम में कच्‍छ से लेकर उत्तर-पूर्व तक सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को बेहतर बना सकती है।

आगे की राह

  • संभवत: इस प्रणाली की जांच के उपरांत एक बार भारत सरकार से मंजूरी मिलने पर 90-120 दिनों मंे 100-250 वर्ग किमी तक एक पायलट प्रणाली स्थापित की जा सकती है।
  • सामूहिक हमले की स्थिति में पारंपरिक सुरक्षा तंत्र कमजोर पड़ सकता है परंतु ए.आई आधारित स्वायत्त डोम प्रणाली रक्षा क्षेत्र का भविष्य है।
  • ध्यातव्य है कि डीआरडीओ ने भी एक ड्रोन सुरक्षा प्रणाली का विकास किया है, जिसका उपयोग यथाशीघ्र कश्मीर में होने की संभावना है।
  • भारत सरकार ने ड्रोन खतरे को देखते हुए इनको विनियमित करने हेतु जुलाई 2021 में ड्रोन नियमावली प्रारूप भी जारी किया है।

संकलन-मनीष प्रियदर्शी


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