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Post at: Aug 09 2021

फ्रांस और रवांडा नरसंहार

संदर्भ

  • 27 मई 2021 रवांडा की यात्रा पर पहुंचे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि उन्‍होंने यहां हुए नरसंहार में अपने देश की भूमिका को पहचाना है।
  • इसके लिए उन्‍होंने रवांडा की राजधानी किगाली में मृतकों की याद में बने गिसोजी नरसंहार स्मारक का दौरा कर माफी मांगी।

रवांडा नरसंहार?

  • वर्ष 1994 में अप्रैल से जून माह में, करीब 100 दिनों के अंदर करीब 8 लाख रवांडन लोगों को मार डाला गया था।
  • इस नरसंहार का मुख्य निशाना यहां के अधिवासित अल्पसंख्यक समुदाय तुत्सी (Tutsi) था।
  • नरसंहार को अंजाम देने वाले भी रवांडा के बहुसंख्यक हुतू (Hutu) समुदाय के लोग थे। इन्होंने न केवल तुत्सी समुदाय के लोगों की हत्याएं की बल्कि हजारों महिलाओं के साथ बलात्कार भी किया।

रंवाडा नरसंहार के कारण

  • रवांडा की कुल आबादी मंे हुतू समुदाय का हिस्सा 85 प्रतिशत है, लेकिन देश पर लंबे समय से तुत्सी अल्‍पसंख्यकों का प्रभुत्व रहा था।
  • कम संख्या में होने के बावजूद तुत्सी राजवंश ने लंबे समय तक रवांडा पर शासन किया था।
  • वर्ष 1959 में हुतू विद्रोहियों ने तुत्सी राजतंत्र को खत्म कर देश में तख्ता पलट किया।
  • जिसके बाद हुतू समुदाय के अत्याचारों से बचने के लिए तुत्सी लोग भाग कर युगांडा चले गए।
  • अपने देश पर फिर से कब्जा करने को लेकर तुत्सी लोगों ने रवांडा पैट्रिएक फ्रंट (आपीएफ) नाम के एक विद्रोही संगठन की स्थापना की, जिसने 1990 में रवांडा मंे वापसी कर कत्लेआम शुरू कर दिया। इस कत्लेआम में दोनों ही समुदाय के हजारों लोग मारे गए।
  • वर्ष 1993 में सरकार के साथ तुत्सी विद्रोहियों ने समझौता कर लिया और देश में शांति की स्थापना हुई। लेकिन, 6 अप्रैल, 1994 को तत्‍कालीन राष्ट्रपति जुवेनल हाबयारिमाना और बुरुंडी के राष्ट्रपति केपरियल नतारया मिरा को ले जा रहा िवमान किगाली में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई।
  • दोनों ही समुदायों ने इस हादसे के लिए एक-दूसरे पर आरोप लगाए और इसके बाद इतिहास का सबसे भीषण नरसंहार शुरू हुआ जिसमें 8,00,000 से 10,00,000 अधिक लोग मारे गए।

रवांडा नरसंहार में फ्रांस की भूमिका

  • दरअसल, रवांडा लंबे समय तक फ्रांस का उपनिवेश रहा है। इसलिए आज भी इस देश में फ्रांसीसी प्रभाव बहुत ज्यादा देखने को मिलता है। नरसंहार के समय भी हुतू सरकार को फ्रांस का समर्थन प्राप्‍त था।
  • राष्ट्रपति की मौत के बाद हुतू सरकार के आदेश पर सेना ने अपने समुदाय के साथ मिलकर तुत्सी समुदाय के लोगों को मारना शुरू किया।
  • उस समय फ्रांस ने हुतू सरकार के समर्थन मंे अपनी सेना भेजी लेकिन उसने नरसंहार को रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया।

फ्रांस को माफी मांगने की जरूरत क्यों पड़ी?

  • दरअसल, कुछ महीने पहले ही रवांडा नरसंहार को लेकर फ्रांसीसी जांच पैनल की रिपोर्ट ने तत्‍कालीन फ्रांसीसी सेना की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
  • इस रिपोर्ट में कहा गया था कि एक औपनिवेशिक रवैये ने फ्रांसीसी अधिकारियों को अंधा कर दिया था और सरकार ने लोगों की हत्याओं का पूर्वाभास न करके गंभीर और भारी अपराध किया था।
  • जिसके बाद से फ्रांस के ऊपर इस नरसंहार को लेकर माफी मांगने का दबाव बढ़ने लगा था।

नरसंहार समाप्‍ति

  • वर्ष 1994 में हुए नरसंहार को देखते हुए पड़ोसी युगांडा ने अपनी सेना को रवांडा में भेजा। जिसके बाद उसके सैनिकों ने राजधानी किगाली पर कब्जा कर इस नरसंहार को खत्म किया।

निष्कर्ष – रवांडा नरसंहार दुनिया के भयावह नरसंहारों में से एक है, जिसमें लाखों लोगों की हत्याएं एक नृजाती समुदाय को मिटाने के लिए की गई।

  • फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, मैं विनम्रतापूर्वक और सम्मान के साथ आज आपके साथ खड़ा हूं, मैं अपनी जिम्मेदारियों को समझता हूं।

सं. अभिषेक कुमार


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