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Post at: Aug 09 2021

सर्कुलर अर्थव्यवस्था : अवधारणा और चुनौतियां

वर्तमान संदर्भ

  • देश में प्राकृतिक संसाधनों के सीमित भंडार हैं जो कि अत्‍यधिक दोहन के फलस्वरूप समाप्‍ति के कगार पर पहुंच गए हैं।
  • इसीलिए सरकार अर्थव्यवस्था के विकास के लिए सर्कुलर इकोनाॅमी को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।

पृष्ठभूमि:

  • दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं में Take, Make, Use और Dispose की पद्धति का प्रचलन प्रारंभ से ही विद्यमान रहा है।
  • जलवायु परिवर्तन प्रदूषण एवं अपशिष्ट आदि ने पर्यावरण के समक्ष बड़ी समस्या खड़ी कर दी है।
  • वर्ष 2050 तक विश्व की आबादी बढ़कर 10 अरब हो जाने की संभावना है।
  • इसी कारण इतनी बड़ी जनसंख्या तथा सीमित संसाधनों के मध्य सामंजस्य बैठाने के लिए उपाय तलाशने की जरूरत सभी को महसूस हो रही है।
  • अत: इसके समाधान के तौर पर अनेक देश वर्तमान में चल रही रैखिक अर्थव्यवस्था को सर्कुलर अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करने की ओर अग्रसर हैं, जिसमें भारत भी शामिल है।

रैखिक अर्थव्यवस्था:

  • रैखिक अर्थव्यवस्था में नए संसाधनों से वस्तुओं को निर्मित कर उपयोग में लाया जाता है और फिर अपशिष्ट का निस्तारण कर व्यवस्था से हटा दिया जाता है।
  • यह अर्थव्यवस्था Take, Make, Use और Dispose की प्रणाली पर आधारित है।

 

  • यह प्रणाली प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने वाली है।
  • इस प्रणाली में अपशिष्ट निपटान भी एक प्रमुख समस्या है।
  • यदि इस प्रणाली को अनवरत जारी रखा जाएगा तो हमारे पास उपलब्ध संसाधन समाप्‍त हो जाएंगे।

सर्कुलर इकोनॉमी या चक्रीय अर्थव्यवस्था:

  • चक्रीय अर्थव्यवस्था एक आर्थिक प्रणाली है, जिसका उद्देश्य कचरे संशोधित कर पुन: उपयोग को बढ़ावा देना है।
  • यह अर्थव्यवस्था डिजाइन, उत्‍पादन और सामग्रियों के उपयोग के स्तर पर प्रदूषण और अपशिष्ट का उत्‍सर्जन नहीं करती।
  • यह प्रणाली प्राकृतिक संसाधनों का अधिक बु्द्धिमानी से उपयोग करती है।

 

 

 

  • इसमें एक प्रक्रिया का अपशिष्ट दूसरे औद्योगिक क्षेत्र या प्रक्रिया के लिए संसाधन का कार्य करता है।
  • इस अर्थव्यवस्था में इनपुट के तौर पर कोई नई सामग्री शामिल नहीं की जाती जिससे उत्‍सर्जन तथा लागत को कम करने में मदद मिलती है।

यह अन्‍य अर्थव्यवस्था से बेहतर कैसे है?

  • यह जलवायु परिवर्तन को कम करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
  • इस प्रणाली में अपशिष्ट एक संसाधन बन जाता है जबकि अन्‍य प्रणाली में नहीं।
  • यह अर्थव्यवस्था सफाई और स्क्रैपिंग की लागत को कम करने में भी मददगार है।
  • इस प्रणाली में द्वितीय उपभोक्ता संस्कृति को बढ़ावा दिया जाता है।
  • संयुक्‍त राष्ट्र के SDG-12 C खपत और उत्‍पादन पर सतत विकास के लक्ष्य को पूरा करती है।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था में उत्‍पादन इकोफ्रेंडली डिजाइन पर किया जाता है।

चुनौतियां:

  • चक्रीय अर्थव्यवस्था कंे निर्माण में उच्‍च लागत की आवश्यकता होती है।
  • किसी भी प्रणाली में उत्‍पादन चक्र में कुछ नए तत्‍वों की आवश्यकता होगी और कुछ अपशिष्ट हमेशा उत्‍पन्‍न होते रहेंगे।

 

  • इस प्रणाली में उद्योगों द्वारा कम अवधि के उत्‍पादों का निर्माण किया जाता है, जिससे लाभ अधिकतम हो सके।
  • इस अर्थव्यवस्था में लोगों का अपने स्तर पर अपशिष्ट प्रबंधन में गलत रवैया है।
  • बार-बार उत्‍पादों का पुनर्चक्रण कर उपयोग करने से गुणवत्ता में कमी आती है।

वैश्विक स्तर पर किए गए प्रयास:

  • वैश्विक स्तर पर जर्मन सरकार उन उत्‍पादों को अनुदान प्रदान करती है, जिनका पर्यावरणीय दुष्प्रभाव कम हो।
  • चिली सरकार सभी प्‍लास्टिक वस्तुओं को पुन: उपयोग योग्‍य बनाने की दिशा में अग्रसर है।
  • नीदरलैंड्स में वनों की कटाई से मुक्त कृषि को वित्तपोषित करने का प्रयास किया जा रहा है।
  • इस प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में यूरोपीय कमीशन ने प्‍लास्टिक उत्‍पादों के उत्‍पादन तथा पुनर्नवीकरण संबंधी योजना बनाई है।
  • अफ्रीका में ग्रीन बिजनेस को बढ़ावा दिया जा रहा है।

भारत में किए गए प्रयास:

  • भारत में उज्‍ज्‍वला योजना के तहत भारी संख्या में लोगों को LPG कनेक्‍शन उपलब्ध कराकर समय की बचत तथा संसाधन का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करने का प्रयास हो रहा है।
  • सरकार द्वारा स्वच्‍छ भारत मिशन के तहत लोगों की मानसिकता विकसित कर कचरे का अपने स्तर पर ही प्रबंधन करने को प्रोत्‍साहित किया जाता है।
  • ज़ीरो इफेक्‍ट ज़ीरो डिफेक्‍ट योजना का उद्देश्य ऐसे उत्‍पाद का निर्माण करना है, जिसमें पर्यावरण प्रदूषण न्‍यूनतम हो तथा उत्‍पादों में शून्‍य डिफेक्‍ट हो।
  • कचरे से बिजली बनाने का भी प्रयास किया जा रहा है।

आगे की राह:

  • चक्रीय अर्थव्यवस्था के माध्यम से उपभोक्ताओं के जीवन की गुणवत्ता स्तर में बिना गिरावट लाए तथा निर्माताओं को बिना राजस्व की हानि के उत्‍पादों को प्राप्‍त किया जा सकता है।
  • यह अर्थव्यवस्था सार्वजनिक क्षेत्र या विभिन्‍न संगठनों के सहयोग से अनौपचारिक अर्थव्यवस्था (जैसे वाहनों का रिसाइक्‍लिंग या पुनर्उपयोग का दोहन करने की आवश्यकता है।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था के निर्माण से भारत एक कुशल संसाधन प्रणाली का निर्माण कर सकता है।
  • भारत को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक सुसंगत रोडमैप बनाने की जरूरत है, जिसमें आर्थिक विकास से समझौता किए बिना चक्रीय अर्थव्यवस्था को अपनाया जा सके।

सं-विकास प्रताप सिंह


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