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Post at: Aug 02 2021

इसरो का साउंडिंग रॉकेट

क्‍या होते हैं साउंडिंग रॉकेट

  • साउंडिंग रॉकेट एक या दो चरण वाले ठोस नोदक रॉकेट हैं। ये ठोस ईंधन (Solid Propellant) से चलता है।
  • इनका प्रयोग अंतरिक्ष अनुसंधान हेतु ऊपरी वायुमंडलीय क्षेत्रों के अन्‍वेषण हेतु किया जाता है।
  • इसे एक अनुसंधान रॉकेट (Research Rocket) भी कहा जाता है।
  • वर्ष 1965 से इसरो ने स्वदेश निर्मित साउंडिंग रॉकेट लांच करना शुरू किया था।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 12 मार्च, 2021 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organization : ISRO) द्वारा साउंडिंग रॉकेट (RH – 560 – MK II) लांच किया गया।
  • इस रॉकेट को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (Satish Dhawan Space Center : SDSC) के श्रीहरिकोटा रेंज से लांच किया गया।

मुख्य बिंदु

  • तटस्थ हवाओं (Neutral Winds) और प्‍लाज्‍मा गतिशीलता (Plasma Dynamics) में व्यावहारिक परिवर्तनों (Attitudinal Variations) का अध्ययन करने के लिए साउंडिंग रॉकेट को लांच किया गया।
  • इसरो के अनुसार, यह रॉकेट लांच किए गए वाहनों और उपग्रहों में उपयोग के लिए नए घटकों या उप-प्रणालियों के प्रोटोटाइप का परीक्षण करने के लिए किफायती प्‍लेटफॉर्म के रूप में भी काम करता है।

वर्तमान में इसरो के कार्यरत साउंडिंग रॉकेट

न्‍यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (New Space India Limited : NSIL)

  • NSIL, ISRO की एक वाणिज्‍यिक इकाई है।
  • NSIL की योजना के तहत अंतरिक्ष कामकाज को विस्तारित करने के लिए अगले 5 वर्ष में लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
  • वर्ष 2021-22 के लिए केंद्रीय बजट में कंपनी के लिए 700 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
  • 6 मार्च, 2019 को बंगलुरू में NSIL का अाधिकारिक रूप से उद््घाटन किया गया था।

  • वर्तमान में NSIL के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक जी. नारायणन हैं।

इसरो की अन्‍य वाणिज्‍यिक शाखा

  • ‘एंट्रिक्‍स (Antrix) कॉर्पोरेशन’ – इसरो कि एक और वाणिज्‍यिक/ व्यावसायिक इकाई है। जिसे विदेशी उपग्रहों के वाणिज्‍यिक प्रक्षेपण की सुविधा हेतु वर्ष 1992 में स्थापित किया गया था।

संकलन – आदित्‍य भारद्वाज

 


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