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Post at: Aug 02 2021

कृषक उत्‍पादक संगठन (एफपीओ) योजना की समीक्षा

वर्तमान परिदृश्य

  • हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषक उत्‍पादक संगठनों की समीक्षा की।

महत्‍वूपर्ण बिंदु-

  • केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि देश में 10 हजार नए कृषक उत्‍पादक संगठन बनाए जाएंगे। इसके तहत देश के सभी ब्लाॅकों (लगभग 6600 ब्लाॅक) में कम-से-कम एक एफपीओ बनाया जाएगा।
  • 10 हजार एफपीओ के गठन हेतु भारत सरकार 6865 करोड़ रुपया खर्च करेगी। चालू वित्तीय वर्ष में लगभग 2500 एफपीओ बनाने का लक्ष्य है।
  • एफपीओ के गठन से संबंधित एजेंसियों को कहा गया है कि वे एक जुटता व समन्‍वय के साथ योजना काे साकार करें।
  • मैदानी क्षेत्र में बनने वाले एफपीओ में सदस्यों की न्यूनतम संख्या 300 होनी चाहिए, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में न्‍यूनतम सदस्य संख्या 100 होनी चाहिए।
  • एफपीओ को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने के लिए सदस्यों के रूप में छोटे, सीमांत और महिला किसानों/महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) एससी/एसटी किसानों तथा आर्थिक रूप से कमजोर अन्‍य श्रेणियों को शामिल किया जाएगा।
  • एफपीओ के सदस्यों द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार एफपीओ को कंपनी अधिनियम अथवा राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत किया जाएगा।
  • 15 प्रतिशत लक्षित एफपीओ का गठन महत्वाकांक्षी जिलों में किया जाना है, जो ‘एक जिला-एक उत्पाद’ की अवधारणा पर केंद्रित है। प्राथमिक रूप से यह योजना उपज क्‍लस्टर दृष्टिकोण पर आधारित है।
  • एफपीओ की इस योजना को व्यवस्थित एवं पारदर्शी तरीके से क्रियान्वित करने एवं जानकारी सुलभ कराने के लिए एकीकृत पोर्टल बनाया जाएगा।
  • समीक्षा बैठक में यह भी बताया गया कि शहद जैसे उत्‍पाद विशेष के एफपीओ तथा आॅर्गेनिक उपज के एफपीओ भी बनाए जाएंगे।
  • एफपीओं को 18 लाख रूपये की दर से 3 वर्ष के लिए प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता दी जाएगी।
  • एफपीओ को इक्‍विटी अनुदान सुविधा भी मिलेगी, जिसमें 15 लाख रुपये तक की मैचिंग इक्‍विटी ग्रांट होगी।
  • ऋण गारंटी कोष के जरिए प्रति एफपीओ 2 करोड़ रुपये तक की जमानत मुक्त ऋण सुविधा, केंद्र सरकार द्वारा दी जाएगी।
  • कृषि क्षेत्र तथा किसानों को इसका पूरा लाभ दिलाने के लिए एफपीओ की ग्रेडिंग की जाएगी तथा अधिक-से-अधिक किसानों को इससे जोड़ा जाएगा।
  • कौशल विकास व क्षमता निर्माण के लिए, ‘बैंकर ग्रामीण विकास संस्थान लखनऊ, लक्ष्मण राव इनामदार राष्ट्रीय सहकारी अनुसंधान और विकास अकादमी (लिनाक), गुरुग्राम’ प्रशिक्षण हेतु नोडल संस्थान होंगे।
  • पहले से बने हुए एफपीओ के सदस्य किसानों को भी ट्रेनिंग दी जाएगी।
  • इस योजना के क्रियान्‍वयन हेतु कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) की मदद ली जाएगी। 9 क्रियान्‍वयन एजेंसियां इस कार्य में लगी हुई हैं।

आगे की राह-

  • एफपीओ के माध्यम से किसानों की सुविधाओं में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ खेती की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। इसमें छोटे किसानों को अधिक लाभ मिलेगा।
  • एफपीओ के बनने से छोटे व सीमांत किसानों की लागत में कमी आएगी तथा उन्‍हें मार्केट का लाभ भी मिलेगा।

अन्‍य महत्‍वपूर्ण बिंदु

  • एफपीओ- किसानों का एक ऐसा संगठन, जो कंपनी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड होकर कृषि उत्‍पादक कार्यो को आगे बढ़ाता है।
  • एफपीओ के गठन के लिए कम-से-कम 10 किसान अलग-अलग परिवार के होने चाहिए।
  • कृषि विज्ञान केंद्र-भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और किसानों के बीच कड़ी के रूप में कार्य करते हैंै। जिनका प्रमुख कार्य किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकियों तथा अन्य जानकारियों से अवगत कराना है।
  • देश के पहले कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) की स्थापना वर्ष 1974 में पुडुचेरी (पूर्व में पाण्डिचेरी) में हुई थी।
  • अक्टूबर, 2020 तक पूरे भारत में 721 कृषि विज्ञान केंद्र थे।

लघु तथा सीमांत किसान

  • लघु किसानों का तात्‍पर्य उन किसानों से है, जिनके पास कृषि योग्य भूमि 1 हेक्‍टेयर से 2 हेक्‍टेयर के बीच होती है।
  • सीमांत किसानों से तात्‍पर्य उन किसानों से है, जिनके पास कृषि योग्य भूमि 1 हेक्‍टेयर से कम होती है।

लेखक-अरविंद कुमार पाण्डेय


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