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Post at: Aug 02 2021

राष्ट्रीय उन्‍नत रसायन बैट्री भंडारण कार्यक्रम

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 12 मई, 2021 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (Production Linked Incentive :PLI) राष्ट्रीय उन्‍नत रसायन बैट्री भंडारण कार्यक्रम’ (National Programme on Advanced chemistry Cell Battery Storage) को मंजूरी प्रदान की।
  • इस योजना का प्रस्ताव भारी उद्योग विभाग (Department of Heavy Industry ) द्वारा रखा गया था।

उन्‍नत रसायन सेल (Advanced Chemistry Cell-ACC)

  • यह भंडारण प्रौद्योगिकी की नई पीढ़ी की बैट्री है।
  • इसके तहत बिजली को इलेक्ट्रो-कैमिकल या रासायनिक ऊर्जा के रूप में सुरक्षित किया जा सकता है।
  • जरूरत पड़ने पर इसे पुन: बिजली में बदला जा सकता है।

प्रमुख बिंदु

  • एसीसी बैट्री भंडारण निर्माता का चयन एक पारदर्शी प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के ज़रिए किया जाएगा।
  • निर्माण इकाई को दो वर्ष के भीतर काम चालू करना होगा।
  • प्रोत्साहन राशि को पाँच वर्षों के दौरान दिया जाएगा।
  • लगभग 45,000 करोड़ रूपये का प्रत्यक्ष निवेश। उपयोगिता
  • उपभोक्ता इलेक्टॉनिक सामान, बिजली से चलने वाले वाहन, उन्‍नत विद्युत ग्रिड, सौर ऊर्जा आदि में बैट्री की आवश्यकता होती है।

लक्ष्य

  • इस योजना के तहत 50 गीगावाट आवर्स (Giga Watt Hour: GWH) की एसीसी बैट्री की निर्माण क्षमता प्राप्‍त करना। विदित हो कि गीगावाट ऑवर्स का अर्थ है- प्रतिघंटा एक अरब वाट ऊर्जा का उत्पादन करना।
  • इसके अतिरिक्त 5 GW की ‘आयुक्त’ (Niche) एसीसी बैट्री की निर्माण क्षमता प्राप्त करना।
  • इसकी लागत लगभग 18,100 करोड़ है।
  • भारत में बैट्री निर्माण की माँग को पूरा करना।

चुनौतियाँ

  • एसीसी के मामले में तो भारत में निवेश नगण्य है।
  • वर्तमान में भारत में एसीसी की माँग आयात के माध्यम से पूरी की जा रही है।

मेंक इन इंडिया

  • घरेलू स्तर पर मूल्य संवर्धन पर ज़ोर और आयात पर निर्भरता कम करना।

आत्म निर्भर भारत अभियान

  • एसीसी बैट्री भंडारण से आयात पर निर्भरता कम होगी।
  • इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मदद मिलेगी।

आर्थिक लाभ

  • योजना के तहत एसीसी बैट्री निर्माण से विद्युत चालित वाहन (Electric Vehicle :EV) को प्रोत्साहन मिलेगा और पेट्रोल-डीज़ल पर निर्भरता कम होगी।
  • जिसके कारण लगभग 2,00,000 करोड़ रुपये से 2,50,000 करोड़ रूपये तक की बचत होगी।
  • प्रतिवर्ष लगभग 20,000 करोड़ रूपये का आयात बचेगा।

जलवायुविक लाभ

  • एसीसी के निर्माण से EV की माँग में बढ़ोत्तरी होगी, जिससे प्रदूषण मंे कमी होगी।
  • भारत महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा एजेंडे पर पूरी ताक़त से अमल कर रहा है।
  • इसलिए एसीसी कार्यक्रम से ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में भारत की हिस्सेदारी में कमी आएगी।
  • भारत इस दिशा में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पीएलआई योजनाओं

  • घरेलू िवनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात बिलों में कटौती करने के लिए केंद्र सरकार ने मार्च, 2020 में एक पीएलआई (PLI) पेश की।
  • इसका उद्देश्य घरेलू इकाइयों में निर्मित उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहन देना।
  • नवंबर, 2020 के बाद पीएलआई योजना में निम्नलिखित घटनाक्रम हुए है

आगे की राह

आने वाले समय में इस उपभोक्ता सेक्टर में तेजी से बढ़ोत्तरी होने वाली है। उम्मीद की जा सकती है कि बैट्री प्रौद्योगिकी दुनिया के कुछ सबसे बड़े विकासशील सेक्टर में अपना दबदबा कर लेगी।

संकलन- आदित्य भारद्वाज


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