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Post at: Jul 31 2021

दक्षिणी चीन सागर

वर्तमान परिप्रेक्ष्य-

  • मई 2021 में, दक्षिणी चीन सागर में स्थित थीटु द्वीप पर चीनी सैनिकों की तैनाती, जहाजों की उपस्थिति एवं समुद्री परिसंपत्‍तियों के अवैध दोहन के लिए फिलीपींस ने चीन के खिलाफ राजनयिक विरोध (Diplomatic Protest) दर्ज किया है।

अन्‍य संबंधित तथ्य-

  • फिलीपींस के 200 मील के विशेष आर्थिक क्षेत्र में सैकड़ों चीनी नौकाओं की महीनों से मौजूदगी को लेकर मनीला और बीजिंग के बीच तनाव बढ़ गया है।
  • फिलीपींस का कहना है कि चीनी जहाजों को मिलिशिया (Militia) द्वारा संचालित किया जा रहा है जबकि बीजिंग ने कहा है कि ये जो मछली पकड़ने वाली नावें थीं, खराब मौसम के कारण आश्रय पाने के लिए वहां गई थी।
  • फिलीपींस के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘पाग-आसा द्वीप (Pag-As a Island)’ फिलीपींस का एक अभिन्‍न अंग है, जिस पर इसकी संप्रभुता और अधिकार क्षेत्र है।
  • फिलीपींस में पाग-आसा के रूप में जाना जाने वाला थिटु द्वीप, फिलीपींस मुख्य भूमि से 451 किमी दूर है और स्प्रैटली द्वीप समूह में स्थित आठ चट्टानों, शोलों और द्वीपों में सबसे बड़ा है।
  • चीन ने थिटु से करीब 25 किमी दूर सुबी रीफ में रनवे, हैंगर (जहाज रखने का स्थान) और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के साथ एक मिनी सिटी बनाई है।

दक्षिणी चीन सागर-

  • दक्षिणी चीन सागर एक सीमांत सागर है, जो प्रशांत महासागर का हिस्सा है। यह चीन के दक्षिण पूर्व में वियतनाम के दक्षिण में, फिलीपींस के पश्चिम में तथा बोनिर्यों द्वीप के उत्‍तर में स्थित है।
  • दरअसल देखा जाये तो दक्षिण चीन सागर, प्रशांत महासागर में सिंगापुर से लेकर ताइवान की खाड़ी तक लगभग 305 मिलियन वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत है।

क्‍या है दक्षिण चीन सागर विवाद

  • दक्षिणी चीन सागर के क्षेत्रों को लेकर कई दावेदार देशों के बीच दशकों से विवाद है। यह विवाद समुद्री क्षेत्र पर अधिकार एवं संप्रभुता काे लेकर है। इसमें पारासेल (PARACEL) द्वीप, स्प्रैटली द्वीप एवं स्कारबोरफ (Scarborough) द्वीप भी शामिल हैं।
  • पारासेल और स्प्रैटली द्वीपों पर कई देशों ने अपना पूरा अधिकार जताया है तथा कई देशों ने आंशिक रूप से इसे अपने नियंत्रण क्षेत्र का हिस्सा बताया है।
  • पारासेल द्वीप पर दावा- चीन, ताइवान एवं वियतनाम का।
  • स्प्रैटली द्वीप पर दावा- चीन, विएतनाम, मलेशिया, फिलीपंस एवं ताइवान
  • स्कॉरबोरफ द्वीप पर दावा- चीन, विएतनाम, फिलीपींस, ताइवान।

  • ऐसा माना जाता है कि दक्षिण चीन सागर में तेल और गैस के कई विशाल भंडार दबे हुए हैं। यही भंडार इस इलाके के कई देशों के बीच विवाद का कारण बन गए हैं।

  • इसके अलावा यहां दर्जनों निर्जन चट्टानी इलाके, रेतीले तट, प्रवाल द्वीप आदि हैं, जो विवाद का कारण है।
  • यहां का समुद्री रास्ता भी व्यापार की दृष्टि से बेहद महत्‍वपूर्ण है।

दक्षिणी चीन सागर का महत्‍व

  • दक्षिण चीन सागर का सामरिक महत्‍व अत्‍यधिक है। दक्षिणी चीन सागर, प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के बीच स्थित बेहद अहम व्यापारिक मार्ग है। विश्व के कुल समुद्री व्यापार का 20% हिस्सा यहां से गुजरता है।
  • यह क्षेत्र मत्‍स्य संसाधनों से परिपूर्ण है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया में लाखों लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्‍वपूर्ण है।
  • अनुमान है कि यहां के समुद्र तल (सीबेड) के नीचे तेल और गैस के विशाल भंडार हैं, जो इसे आर्थिक रूप से महत्‍वपूर्ण बनाते हैं।

  • विश्व के कुल व्यापार का 20 प्रतिशत यहीं से होकर जाता है।
  • चीन का लगभग 80 प्रतिशत ऊर्जा आयात और चीन के कुल व्यापार का लगभग 39.5 प्रतिशत दक्षिण चीन सागर से होकर गुजरता है। इसलिए चीन दुनिया भर के अन्‍य देशों में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सजग और आक्रामक हुआ है। यही कारण है कि चीन को दक्षिणी चीन सागर में अपने भू-आर्थिक और भू-सामरिक हित दिखाई देते हैं।

भारत का मत

  • भारत, दक्षिण चीन सागर में स्वतंत्र व निर्बाध जल परिवहन हेतु सभी पक्षों से, यूनाइटेड नेशंस कन्‍वेंशन ऑन द लॉ आफ द सी, 1982 (UNCLOS) के सिद्धांतों को अपनाने का समर्थन करता है।

निष्कर्ष– 2016 में राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते के पदभार संभालने के बाद से फिलीपींस ने चीन के खिलाफ कम से कम 84वां राजनयिक विरोध दर्ज कराया है।

  • वर्ष 2016 में UNCLO’s ने दक्षिण चीन सागर में चीन के व्यापक दावे को अमान्‍य कर दिया था।

अभिषेक कुमार


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