Contact Us - 0532-246-5524,25 | 9335140296
Email - ssgcpl@gmail.com
|
|

Post at: Jul 29 2021

उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स)नियम,2020

वर्तमान परिदृश्य

  • 21 जून, 2021 को केंद्र सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 में संशोधन को लेकर 15 दिनों के भीतर (6 जुलाई, 2021 तक) सुझाव मांगे थे।
  • हालांकि, इन नियमों की अधिसूचना के बाद से सरकार को असंतुष्ट उपभोक्ताओं, व्यापारियों और संघो से ई-कॉमर्स इकोसिस्टम में व्यापक धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं की शिकायतें मिल रहीं थी।
  • इसके लिए हाल ही में एक संसदीय समिति भी सरकार द्वारा गठित की गई थी, जिसने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
  • रिपोर्ट में उपभोक्ताओं के अधिकारों को सुरक्षित रखने, अनुचित प्रथाओं को रोकने, जैसे कई संशोधनों की सिफारिश की गई है।

प्रस्तावित संशोधन निम्न है-

  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के नियमों के अनुपालन हेतु, मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ 24 x 7 समन्वय हेतु नोडल अधिकारी तथा उपभोक्‍ता शिकायतों के निवारण हेतु शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति।
  • प्रत्येक ई-कॉमर्स इकाई को आंतरिक व्यापार हेतु उद्योग एवं आंतरिक -व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT ) के पास पंजीकरण कराना होगा। साथ ही इकाई को प्रत्येक ऑर्डर भी दिखाना होगा।
  • मार्केटप्‍लेस ई-कॉमर्स संस्थाओं के सभी विक्रेताओं और सभी इन्वेंट्री ई-कॉमर्स इकाइयों को उत्पाद के इस्तेमाल की आखिरी तिथि स्पष्ट रूप से बतानी होगी।
  • घरेलू निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं के साथ ई-कॉमर्स पर उचित और समान व्यवहार हो इसके लिए ई-कॉमर्स इकाई यदि आयातित वस्तुओं या सेवाओं की पेशकश करे तो उसके मूल देश की पहचान हेतु फिल्टर तंत्र भी स्थापित करें।
  • उपभोक्ता सुरक्षा हेतु प्रत्‍येक मार्केटप्‍लेस ई-कॉमर्स इकाई के लिए देयता (देनदारी या दायित्व ) का प्रावधान किया गया है।

पृष्ठभूमि-

(1) उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम-2020

  • 23 जुलाई, 2020 को ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019’’ के तहत प्रभावी हुआ।
  • ये नियम, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर होने वाले सभी वाणिज्यिक लेन-देनों को नियंत्रित करते हैं।
  • ई-कॉमर्स नियम दो प्रकार के ई-कॉमर्स बिजनेस मॉडल को मान्यता देता है।

(i) मार्केटप्‍लेस मॉडल

(ii) भंडार-आधारित मॉडल (Inventory-Based model)

  • उक्त दोनों प्रकार के ई-कॉमर्स बिजनेस मॉडल के लिए अलग-अलग प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।
  • ई-कॉमर्स नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने प्‍लेटफॉर्म पर निम्नलिखित जानकारी प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है-

(i) वापसी (रिफंड)
(ii) धनवापसी
(iii) विनिमय (एक्सचेंज)
(iv) वारंटी और गारंटी
(v) सामान और सेवाओं के वितरण और शिपमेंट की जानकारी
(vi) उत्पादों के उत्पत्ति देश संबंधी विवरण
(vii) कीमत और एक्सपायरी तिथि इत्यादि।

  • उक्त विवरण उपभोक्ताओं को समझदारी से फैसला लेने में सक्षम बनाते हैं।
  • नियमों के उल्‍लंघन के मामले में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

महत्वपूर्ण बिंदु-

(1) ई-कॉमर्स उद्यम से संबंधित चिंताएं और चुनौतियां-

जहां ई-कॉमर्स उद्यम ने उपभोक्तओं को कई लाभ प्रदान किए हैं तो वहीं दूसरी ओर इसके विकास ने उपभोक्ताओं को अनुचित व्यापार प्रक्रियाओं के नए रूपों, निजता के उल्‍लंघन और शिकायत संबंधी मामलों की गैर-सुनवाई आदि के प्रति संवेदनशील बना दिया है। इससे संबंधित कुछ चिंताएं निम्नलिखित हैं-

(i) स्वार्थचालित कीमतें-(Predatory Pricing)

  • यह एक अल्पकालिक रणनीति होती है, जिसे बाजार की बड़ी पूंजी वाली कुछ कंपनियों द्वारा अपनाया जाता है।
  • इसके तहत कंपनियों द्वारा अल्पकालिक नुकसान को झेलते हुए अपने उत्पादों की कीमतों को औसत परिवर्तनीय लागत से कम रखा जाता है।
  • इसके परिणामस्वरूप बाजार में प्रतिस्पर्धा खत्म हो सकती है और यह स्थिति लंबे समय में उपभोक्ताओं के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।

(ii) अनुचित प्रथाएं-

  • इसके तहत फेक रिव्यू और अनुचित पक्षपात जैसी समस्याएं अक्सर देखने को मिलती हैं।
  • दोषपूर्ण वस्तु या सेवाएं।
  • अधिक कीमत वसूलना या गलत तरीके से कीमत वसूलना।
  • अनुचित और प्रतिबंधित तरीके से व्यापार

(iii) शिकायत तंत्रों का प्रभावी न होना।
(iv) उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रक्रिया का जटिल, खर्चीला और समय-साध्य होना।

(2) ‘उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020’ के संबंध में संसदीय समिति की प्रमुख सिफारिशें-

(i) सरकार को ‘अनुचित’ व्यापार प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट रूप में परिभाषित करना चाहिए।

  • ‘ड्रिप प्राइजिंग’, जहां अतिरिक्त शुल्क के कारण उत्पाद का अंतिम मूल्य काफी अधिक हो जाता है, को भी स्पष्टता से परिभाषित किया जाना चाहिए।
  • सरकार को इन जैसे मुद्दों से निपटने के लिए एक व्यावहारिक कानूनी उपाय निर्धारित करने की आवश्यकता है।

(ii) ई-कॉमर्स फर्मों द्वारा लगाए गए वितरण शुल्क पर एक सीमा निर्धारित की जानी चाहिए।

  • उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय को इस संदर्भ में व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।

(iii) भ्रामक सूचना से संबंधित नियमों का उल्‍लंघन करने पर दंडात्मक प्रावधान किए जाने चाहिए।

  • एल्गोरिदम में परिवर्तन, नकली उत्पाद समीक्षा और रेटिंग सहित सभी भ्रामक रणनीतियों को हतोत्साहित करने के लिए कुछ सुधारात्मक तंत्र बनाने की आवश्यकता है।

(iv) छोटे/स्थानीय विक्रेताओं को संरक्षण देने के लिए नियामक तंत्र की स्थापना करने की आवश्यकता है।

  • साथ ही इनको भी ई-कॉमर्स परिवेश में शामिल करने के लिए सरकार को दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।

(v) उपयोगकर्त्ताओं की गोपनीयता की रक्षा और उनके डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपयोगकर्त्ता के व्यक्तिगत डेटा को संवेदनशीलता के अनुसार वर्गीकृत कर, उपयुक्त सुरक्षा निर्धारित की जा सकती है।
(vi) भारत में कार्य करने वाली ई-मार्केट प्‍लेस संस्थाओं को भारत में स्थानीय डेटा केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता है, जिससे उपभोक्ता डेटा को देश में ही सर्वर पर संकलित किया जा सके और डेटा का दुरुपयोग न हो।
(vii) भुगतान गेटवे की एक सुरक्षित और मजबूत प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए, जिससे उपयोगकर्ताओं के लेन-देन संबंधी डेटा को दुरुपयोग से सुरक्षित रखा जा सके।
(viii) ई-कॉमर्स संस्थाओं को ग्राहकों की समस्याओं के निदान के लिए एक समर्पित कस्टमर केयर सेंटर स्थापित करना चाहिए।
(ix) ‘उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय’ को व्यस्ततम समय (Peak Hours) में सेवाओं की डिलीवरी चार्ज पर उच्‍्‍चतम सीमा निर्धारित करने के साथ-साथ बाजार में स्थित इकाइयों द्वारा लगाए जाने वाले डिलीवरी चार्ज के निर्धारण हेतु व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।

(3) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम,2019 (Consumer Protection Act)

20 जुलाई, 2020 से ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019’ लागू हो गया जो कि पुराने’ ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 ’ को प्रतिस्थापित करेगा।

प्रमुख विशेषताएं-

(i) उपभोक्ता की परिभाषा-

  • उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो अपने उपयोग हेतु कोई वस्तु खरीदता है या सेवा प्राप्त करता है।
  • इसमें ऐसे व्यक्ति को सम्मिलित नहीं किया जाता है जो दोबारा बेचने के लिए अथवा व्यावसायिक उद्देश्य के लिए किसी वस्तु या सेवा का क्रय करता है।
  • इसके तहत, इलेक्ट्रानिक तरीके, टेलीशॉपिंग, मल्टी लेवल मार्केटिंग या प्रत्यक्ष खरीद के माध्यम से किए जाने वाले सभी प्रकार के ऑफलाइन व ऑनलाइन लेन-देन सम्मिलित किए गए हैं।

(ii) उपभोक्ताओं के अधिकार-

  • अधिनियम में उपभोक्ताओं के निम्नलिखित 6 अधिकारों को स्पष्ट किया गया है-

(iii) केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम प्राधिकरण (CCPA)

  • केंद्र सरकार उपभोक्ताओं के अधिकारों को बढ़ावा देने , उनका संरक्षण करने और उन्हें लागू करने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अथॉरिटी (Central Consumer Protection Authority CCPA) का गठन करेगी।

(iv) भ्रामक विज्ञापनों के लिए जुर्माना-

  • CCPA झूठे या भ्रामक विज्ञापन के लिए उत्पादक अथवा प्रचारकर्त्ता पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगा सकता है।
  • दोबारा अपराध की दशा में यह जुर्माना 50 लाख रुपए तक बढ़ सकता है।
  • उत्पादक को 2 वर्ष तक की कैद की सजा भी हो सकती है।
  • जो हर बार अपराध करने पर पांच वर्ष तक बढ़ सकती है।

(v) उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (CDRC)

  • त्रिस्तरीय ‘उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग’ (Consumer Disputes Redressal Commissions-CDRCS) का गठन किया जाएगा, जो निम्नलिखित स्तरों पर कार्य करेगा-

(i) राष्ट्रीय स्तर पर
(ii) राज्य स्तर पर
(iii) जिला स्तर पर
(vi) अपील-

  • अनुचित अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के खिलाफ शिकायत केवल राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (CDRC) में दर्ज की जा सकती है।
  • अंतिम अपील का अधिकार उच्‍चतम न्यायालय (SC) को होगा।

(vii) उभोक्ता विवाद निवारण आयोग (CDRC) का क्षेत्राधिकार –

(a) जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC)

  • ऐसे मामले जिनमें वस्तुओं और सेवाओं की कीमत एक करोड़ रुपए से अधिक न हो।

(b) राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (SCDRC)

  • ऐसे मामले जिनमें वस्तुओं और सेवाओं की कीमत एक करोड़ रुपए से अधिक हो, लेकिन 10 करोड़ रुपए से अधिक न हो।

(c) राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC)

  • ऐसे मामले जिनमें वस्तुओं और सेवाओं की कीमत 10 करोड़ से अधिक हो।

(viii) मध्यस्थता-

  • मध्यस्थता का एक वैकल्‍पिक विवाद समाधान तंत्र उपलब्ध कराया गया है।
  • मध्यस्थता के माध्यम से होने वाले निपटान के खिलाफ कोई अपील नहीं होगी ।

(ix) उत्पाद की जिम्मेदारी (Product Liability)

यदि किसी उत्पाद या सेवा में दोष पाया जाता है तो उत्पाद निर्माता/विक्रेता अथवा सेवा प्रदाता को क्षतिपूर्ति के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।

Note-

(i) ई-कॉमर्स पोर्टलों पर ‘उत्पत्ति देश’ (Country of origin ) का उल्‍लेख करना अनिवार्य है।

(ii) ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्मों को भी 48 घंटों के भीतर किसी भी उपभोक्ता शिकायत की प्राप्‍ति को स्वीकार करना होगा और शिकायत प्राप्ति की तिथि से एक महीने के भीतर उसका निवारण करना होगा।

संकलन- शिशिर अशोक सिंह


Comments
List view
Grid view

Current News List