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Post at: Jul 29 2021

G-7 कॉर्पोरेट टैक्‍स समझौता/वैश्विक न्‍यूनतम कॉर्पोरेट टैक्‍स दर

वर्तमान संदर्भ

  • 5 जून, 2021 को ग्रुप ऑफ सेवन (G-7) के समृद्ध देशों के वित्त मंत्रियों ने ‘वैश्विक न्‍यूनतम कॉर्पोरेट कर दर’ (GMCTR) की व्यवस्था पर सहमति व्यक्त की।
  • इसे टैक्‍स (कराधान) के संदर्भ में वैश्विक टैक्‍स परिदृश्य को बेहतर आकार देने की दिशा में एक ‘एेतिहासिक कदम’ बताया जा रहा है।
  • इस समझौते के माध्यम से विश्व स्तर पर दो महत्‍वपूर्ण लक्ष्यों का प्रस्ताव है:-

(i) समान कॉर्पोरेट टैक्‍स (निगम कर) संरचना को तैयार करना।
(ii) बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा मुनाफे के स्थानांतरण को कम करना या रोकना है।

  • उक्त समझौते पर 08-11 जुलाई, 2021 को वेनिस (इटली) में G-20 शिखर सम्मेलन में वित्त मंत्रियों एवं बैकर्स ने विस्तार से चर्चा की, परन्‍तु इस पर अंतिम सहमति अक्‍टूबर में होने वाली G-20 शिखर सम्मेलन में ही संभव है।

महत्‍वपूर्ण बिंदु

(i) पृष्ठभूमि

  • हाल के दिनों में कई विकसित और विकासशील देशों की सरकारें टैक्‍स हैवन (Tax Haven) के इस्तेमाल को हतोत्‍साहित करने का प्रयास कर रही हैं।
  • इस दिशा में सबसे चर्चित कदमों में से एक ‘आर्थिक सहयोग और विकास संगठन’ (OECD) की ‘बेस इरोजन फंड प्राॅफिट शिफ्टिंग’ (BEPS) पहल है। Æ OECD विश्व के कुछ सबसे अमीर देशों का समूह है। (वर्ष 1961)
  • जिन देशों ने एक समय सक्रिय रूप से इसे प्रोत्‍साहन दिया था यहां तक कि करों के भुगतान से बचने और कर-चोरी करने के लिए टैक्‍स हैवन के इस्तेमाल के प्रति आंखें मूंद ली थीं और इस दृष्टिकोण को नापसंद करते हैं, क्‍योंकि इस तरह के अधिकार से अवैध गतिविधियों में सांठ-गांठ भी होती है।
  • OECD सीमा पार डिजिटल सेवाओं पर टैक्‍स (कर) लगाने और ‘वैश्विक कॉर्पोरेट न्‍यूनतम कर’ सहित कर आधार क्षरण (Base Erosion) को रोकने के नियमों के संदर्भ में 140 देशों के मध्य टैक्‍स (कर) वार्ता का समन्‍वय कर रहा है।

(2) समझौते के प्रमुख बिंदु

(i) ‘न्‍यूनतम वैश्विक कॉर्पोरेट टैक्‍स’ को 15 प्रतिशत तय करने पर सहमति। यह दर इस वर्ष के आरंभ में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा रखे गए 21 प्रतिशत के प्रस्ताव से काफी कम है।

  • इसके तहत, उन देशों में करों का भुगतान सुनिश्चित करने के उपाय किए जाएंगे, जहां व्यवसाय संचालित होते हैं।

नोट: किसी उद्यम के अपने व्यवसायों के माध्यम से अर्जित शुद्ध आय या लाभ पर लगने वाला प्रत्‍यक्ष कर (Direct Tax) कॉर्पोरेट कर अथवा निगम कर कहलाता है।

(ii) इस समझौते का उद्देश्य, कर-परिहार (Tax-Avoidance) को रोकना है।

  • इसके तहत, बड़ी कंपनियों द्वारा अर्जित मुनाफे पर टैक्‍स लगाने के लिए उन देशों को सक्षम करना है, जहां राजस्व सृजित हुआ, न कि उस देश के अधिकार क्षेत्र में जहां फर्म टैक्‍स उद्देश्यों के लिए स्थापित है।
  • इस उपाय के तहत, जिन देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियां राजस्व उत्‍पन्‍न करती हैं, उन्‍हें सबसे बड़ी और सबसे अधिक लाभदायक फर्मों के कम-से-कम 20 प्रतिशत लाभ पर कर लगाने का अधिकार होगा।

वैश्विक न्‍यूनतम कॉर्पोरेट टैक्‍स की आवश्यकता

(i) कर क्षरण (Tax Erasion) में कमी के लिए

  • करों के भुगतान से बचने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियां ‘बेस इरोजन एंड प्रॉफिट शिफ्टिंग’ (BEPS) नामक उपकरण का प्रयोग कर, विभिन्‍न अधिकार क्षेत्र में टैक्‍स नियमों में मौजूद अंतर के कारण वे दोहरा टैक्‍स से या एकल टैक्‍स देने से बच जाते हैं।
  • इसमें ऐसी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं जो लाभ को उन अधिकार क्षेत्र से दूर स्थानांतरित कर देती हैं, जहां कंपनी की गतिविधियां होती हैं, जिससे उन्‍हें कम या न के बराबर टैक्‍स (कर) देना पड़ता है।
  • इसे अमूर्त स्रोतों से प्राप्‍त मुनाफा जैसे कि-ड्रग पेटेंट (औषधि), सॉफ्टवेयर और बौद्धिक संपदा पर अर्जित राॅयल्‍टी को कम या शून्‍य टैक्‍स रेट वाले देशों को स्थानांतरित करके किया जाता है।
  • इससे कंपनियों को अपने पारंपरिक घरेलू देशों में उच्‍च टैक्‍स व्यवस्था से छुटकारा मिल जाता है।
  • बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों/निगमों द्वारा अपने मुनाफे को टैक्‍स हैवन में स्थानांतरित करने से रोकने की आवयकता है।
  • टैक्‍स हैवन (Tax Haven) से तात्‍पर्य एक न्‍यूनतम कर वाले या कर मुक्त क्षेत्राधिकार से है, जिसके कानूनों या नियमों का उपयोग कर कानूनों या अन्‍य न्‍यायालयों के नियमों से बचने के लिए किया जा सकता है।
  • कॉर्पोरेट कर (निगम कर) के दुरुपयोग के कारण भारत को प्रतिवर्ष 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान सहना पड़ता है।

(ii) कर एकरूपता (Tax Similarity)

  • ‘वैश्विक न्‍यूनतम कॉर्पोरेट कर दर’ वर्षों से चली आ रही निगम कर की दर को कम करने की प्रतिस्पर्धा को खत्‍म कर देगी।
  • विभिन्‍न देशों द्वारा बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कर दर (Tax Rate) में छूट देकर आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा की जा रही है।

(4) चुनौतियां

(i) यह समझौता किसी राष्ट्र की कर-नीति (Tax Policy) निर्धारित करने के उसके संप्रभु अधिकार का अतिक्रमण करती है।
(ii) विभिन्‍न देशों द्वारा कॉर्पोरेट टैक्‍स का उपयोग अपनी व्यापारिक नीतियों को प्रोत्‍साहित करने वाले एक उपकरण के रूप में किया जाता है।

  • ‘वैश्विक न्‍यूनतम कार्पोरेट कर दर’ उक्त व्यवस्था को समाप्‍त कर देगी।

(i) ‘न्‍यूनतम कर दर’ का उपयोग एक उपकरण के तौर पर वैकल्‍पिक रूप से आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्‍साहित करने के लिए किया जाता है। वहीं ‘वैश्विक न्‍यूनतम कॉर्पोरेट कर दर’ व्यवस्था कर चोरी से निपटने में सक्षम नहीं होगी।

(5) भारत पर प्रभाव

(i) टैक्‍स विशेषज्ञों का मानना है कि 15 प्रतिशत की ‘न्‍यूनतम वैश्विक टैक्‍स दर’ से भारत को लाभ होगा क्‍योंकि प्रभावी घरेलू टैक्‍स दर न्‍यूनतम कर दर की सीमा से ऊपर है और देश निवेश को आकर्षित करना जारी रखेगा।

  • सितंबर, 2019 में भारत ने घरेलू कंपनियों के लिए अपने कॉर्पोरेट टैक्‍स को 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत और नई विनिर्माण इकाइयों के लिए 15 प्रतिशत कर दिया था।
  • भारतीय घरेलू कंपनियों के लिए प्रभावी कर दर, अधिभार और उपकर सहित लगभग 25.17 प्रतिशत है।

(ii) भारत सरकार कॉर्पोरेट टैक्‍स संरचना को लेकर विश्व स्तर पर हो रही वार्ताओं में हिस्सा लेने पर सहमत है।

  • हालांकि अप्रैल, 2021 में यह बताया गया था कि भारत सरकार नई न्‍यूनतम टैक्‍स दर के पक्ष में नहीं थी और यह तर्क दिया गया था कि नया प्रस्ताव भारतीय अर्थव्यवस्था या भारतीय व्यवसायों के अनुकूल नहीं होगा।

(iii) भारत अपने बड़े आंतरिक बाजार, प्रतिस्पर्धी दरों पर गुणवत्तापूर्ण श्रम, निर्यात हेतु रणनीतिक अवस्थिति और एक संपन्‍न एवं समृद्ध निजी क्षेत्र के कारण विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करता है।

सं. शिशिर अशोक सिंह


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