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Post at: Jul 29 2021

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद

वर्तमान संदर्भ-

  • हाल ही में पेगासस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने दुनिया की सरकारों से मानव अधिकारों का उल्‍लंघन करने वाले तरीकों से निगरानी तकनीक का उपयोग तुरंत बंद करने का आह्वान किया है।
  • ‘‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’’ (Un Human Rights Councels UNHRC) हाल के दिनों में निम्नलिखित घटनाक्रमों के संदर्भ में चर्चा में रहा:-

(i) हाल ही में, ‘संयुक्त राज्‍य अमेरिका’ (USA) ने घोषणा की है कि वह ‘‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’’ में पुन: शामिल होगा, उसने वर्ष 2018 में परिषद की सदस्यता त्‍याग दी थी।
(ii) जून 2121 में, UNHRC में म्यानमार के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर भारत अनुपस्थित रहा।
(iii) अजय मल्‍होत्रा, संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद की सलाहकार समिति के अध्यक्ष के रूप में चुने जाने वाले पहले भारतीय बने।
(iv) ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ ने सर्वसम्मत निर्णय में राजनयिक गतिरोध के बाद फिजी की राजदूत ‘‘नजहत शमीम खान’’ को वर्ष 2021 के अध्यक्ष के रूप में चुना।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC)

(i) UNHRC, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के अंतर्गत एक अंतर-सरकारी निकाय है, जो विश्वभर में मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण को मजबूती प्रदान करने के लिए उत्तरदायी है।
(ii) ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ का पुनर्गठन 15 मार्च, 2006 को इसकी पूर्ववर्ती संस्था, ‘‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग’’ (UN Commission on Human Rights) के प्रति ‘‘विश्वसनीयता के अभाव’’ को दूर करने में सहायता करने हेतु संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा संकल्‍प 60/251 के माध्यम से किया गया था।
(iii) यह दुनियाभर में मानव अधिकारों के प्रचार और संरक्षण को मजबूत बनाने और मानवाधिकार उल्‍लंघन की स्थितियों को संबोधित करने तथा उन पर सिफारिश करने के लिए जिम्मेदार है।
(iv) ‘‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्‍चायुक्त कार्यालय’’ (Office of the High Commissioner for Human Rights-(OHCHR) ‘‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’’ के सचिवालय के रूप में कार्य करता है।

  • OHCHR का मुख्यालय जेनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।

UNHRC की संरचना

(i) ‘‘संयुक्‍त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’’ 47 सदस्यों से मिलकर बनी है, इन सदस्यों का चयन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा बहुमत के आधार पर प्रत्‍यक्ष और गुप्‍त मतदान के माध्यम से किया जाता है।

  • समस्त विश्व के भौगोलिक प्रतिनिधित्‍व सुनिश्चित करने हेतु सीटों का आवंटन प्रतिवर्ष निर्वाचन के आधार पर किया जाता है।

(ii) महासभा द्वारा सदस्यों के चयन के मामले में मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण में भागीदार राज्‍यों के योगदान के साथ-साथ इस संबंध में उनके द्वारा की गई स्वैच्‍छिक प्रतिज्ञाओं और प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखा जाता है।
(iii) ‘‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’’ की सदस्यता में समान भौगोलिक वितरण का ध्यान रखा जाता है। इसमें भौगोलिक आधार पर सीटों का वितरण निम्नानुसार है:-

(iv) परिषद के सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है और लगातार दो कार्यकाल के पश्चात कोई भी सदस्य तत्‍काल पुन: चुनाव के लिए पात्र नहीं होता है।

  • अर्थात कोई भी लगातार दो से अधिक कार्यकाल धारण नहीं कर सकता है।

UNHRC के कार्य

(i) UNHRC द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों की ‘‘सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा’’ (Universal Periodic Review-UPR) के माध्यम से मानवाधिकार स्थितियों का आकलन का कार्य किया जाता है तथा मानवाधिकार संबंधी विषयाें पर गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पारित करता है।
(ii) यह विशेष प्रक्रियाओं के तहत कुछ विशिष्ट देशों में मानवाधिकार उल्‍लंघनों हेतु विशेषज्ञ जांच की देखरेख करता है।

UNHRC के समक्ष चुनौतियां

(i) UNHRC में सदस्य के रूप में कभी-कभी ऐसे देश भी शामिल होते हैं, जिन्‍हें व्यापक मानवाधिकार हनन करने वाले देश के रूप में देखा जाता है, जिसके कारण अालोचकों द्वारा UNHRC की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए जाते हैं।

  • चीन, क्‍यूबा, इरीट्रिया, रूस और वेनेजुएला जैसे देश मानवाधिकारों के हनन के आरोप के बावजूद इस परिषद में शामिल रहे हैं।

(ii) UNHRC की कार्यवाहियों के संदर्भ में गैर-अनुपालन (Non-compliance) एक गंभीर मुद्दा रहा है।
(iii) UNHRC में कई पश्चिमी देशों द्वारा निरंतर भागीदारी के बावजूद भी ये मानवाधिकारों संबंधी, समझ पर गलतफहमी बनाए रखते हैं।
(iv) असंतुलित फोकस- उदाहरण के लिए- परिषद द्वारा असंगत रूप से इस्राइल पर ध्यान केंद्रित किए जाने के कारण अमेरिका वर्ष 2018 में इससे बाहर हुआ था।

  • गौरतलब है कि किसी भी देश की तुलना में UNHRC में इस्राइल के सबंध में सबसे अधिक आलोचनात्‍मक प्रस्ताव प्राप्‍त हुए हैं।

भारत और UNHRC

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन 12 अक्‍टूबर, 1993 को हुआ था।
  • आयोग का अधिदेश, मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा यथासंशोधित मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 में निहित है।
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयेग का गठन पेरिस सिद्धंतों के अनुरूप है जिन्‍हें अक्‍तूबर, 1991 में पेरिस में मानव अधिकार संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए राष्ट्रीय संस्थानों पर आयोजित पहली अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में अंगीकृत किया गया था तथा 20 दिसम्बर, 1993 में संयुक्‍त राष्ट्र महासभा द्वारा संकल्‍प 48/134 के रूप में समर्थित किया गया था।
  • यह आयोग, मानव अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्द्धन के प्रति भारत की चिंता का प्रतीक अथवा संवाहक है।
  • मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 12 (1) (घ) में मानव अधिकारों को संविधान द्वारा गारंटीकृत अथवा अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं में समाविष्ट तथा भारत में न्‍यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय व्यक्‍ति के अधिकारों के रूप में परिभाषित किया गया है।

(i) भारत को 1 जनवरी, 2019 को तीन वर्षों की अवधि के लिए एशिया-प्रशंात क्षेत्र से परिषद में चुना गया था।
(ii) हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेष प्रतिवेदकों के एक समूह ने ‘पर्यावरण प्रभाव आकलन’ (Environmental Impact Assessment-EIA) अधिसूचना, 2020 पर चिंता जाहिर करते हुए केंद्र सरकार से प्रश्न किया है कि किस प्रकार इस मसौदे के प्रावधान अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत भारत के दायित्‍वों के अनुरूप हैं? विशेषज्ञों ने ‘‘पोस्ट-फैक्‍टो प्रोजेक्‍ट क्‍लीयरेंस’’ के प्रावधान की भी आलोचना की है।

नोट-

(i) पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत सर्वप्रथम वर्ष 1994 में पहले ‘‘पर्यावरण प्रभाव आकलन’’ मानदंडों को अधिसूचित किया गया ।

  • वर्ष 2006 में संशोधित मसौदे के साथ परिवर्तित किया गया।

(ii) उन कंपनियों या उद्योगों को भी पर्यावरण क्‍लीयरेंस प्राप्‍त करने का मौका देना, जो इससे पहले पर्यावरण नियमों का उल्‍लंघन करती आ रही हैं, इसे ‘‘पोस्ट-फैक्‍टो प्रोजेक्‍ट क्‍लीयरेंस’’ कहते हैं।

शिशिर अशोक सिंह


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