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Post at: Jul 22 2021

एनएलएस-1 गैलेक्‍सी

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • अप्रैल, 2021 में खगोल वैज्ञानिकों ने सबसे दूर स्थित गामा किरण उत्सर्जक (Gamma Ray Emitting) नैरो- लाइन सीफर्ट-1 (Narrow-Line Seyfart-1 : NLS1) नामक सक्रिय आकाशगंगा (Galaxy) की खोज की है।

प्रमुख बिंदु

  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत स्वायत्त संस्थान आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीटयूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (Aryabhatta Research Institute of observational Sciences:ARIOS) के वैज्ञानिकों ने अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओ के सहयोग से लगभग 25,000 चमकीले (luminous) सक्रिय गैलेक्टिक न्यूकली (Active Galactic Nuclei:AGN) का अध्ययन स्लोन डिजिटल स्काई सर्वे (Sloan Digital SKy Survey: SDSS) से किया।
  • SDSS एक प्रमुख मल्टी-स्पेक्ट्रल इमेजिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपिक रेडशिफ्ट सर्वे है जो न्यू मैक्सिको (यूएसए) में अपाचे प्वाइंट वेधशाला में एक समर्पित 2.5 मीटर चौड़े कोण वाले आप्‍टिकल टेलीस्कोप का उपयोग करता है।

शोध में उपयोग किए गए उपकरण

  • शोध में वैज्ञानिकों ने अमेरिका के हवाई द्वीप में स्थित विश्व के सबसे बड़े जमीनी टेलिस्कोप, जापान के सुबारू टेलिस्कोप ‘8.2 एम सुबारू टेलीस्कोप’ (8.2m Subaru Telescope) का इस्तेमाल किया।
  • इसने उच्‍च रेडशिफ्ट की एनएलएस-1 का पता लगाने की नई पद्धति में मदद की। इससे पहले इन आकाशगंगाओं की जानकारी नहीं थी।

रेडशिफ्ट (अभिरक्त विस्थापन)

  • वर्ष 1929 में एडमिन हब्बल ने खोज की थी कि ब्रह्मांड विस्तार हो रहा है। तब से यह ज्ञात है कि अधिकतर आकाशगंगायें हमसे दूर हो रही है।
  • रेडशिफ्ट और ब्लूशिफ्ट वर्णन करते है कि कैसे प्रकाश सूक्ष्म या लंबी तरंग दैर्ध्य की और स्थानांतरित होता है क्योंकि अंतरिक्ष में वस्तुएं (जैसे -आकाशगंगा) हमसे करीब या दूर जाते हैं।
  • यह अवधारणा ब्रह्मंड के विस्तार को समझने की कुंजी है।

रेडशिफ्ट

  • लंबी तरंगदैर्ध्य
  • घटती अवृत्ति
  • वस्तु का दूर जाना

ब्लू शिफ्ट

  • न्यून तरंग दैर्ध्य
  • बढ़ी आवृत्ति
  • वस्तु का नजदीक आना

खगोल वैज्ञानिक ब्रह्मांड के विस्तार और इसके सबसे दूर स्थित पिंडों का दूरी मापने के लिए रेडशिफ्ट का उपयोग करते है।

आकाशगंगा (Galaxy)

  • आकाश गंगा करोड़ों तारों, बादलों तथा गैसों की एक प्रणाली है। अर्थात खुले आकाश में एक ओर से दूसरे ओर तक फैली चमकदार चौड़ी सफेद पट्टी आकाशगंगा होती है, जो तारों के समूह से मिलगर बनी होती है।
  • पृथ्वी, ‘मिल्की-वे’ आकाशगंगा का हिस्सा है। मिल्की वे का आकार सर्पिलाकार (स्पाइरल) है।

आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीटयूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज

  • यह नैनीताल, उत्तराखंड में स्थित देश का खगोल भौतिकी और वायुमंडलीय विज्ञान से संबंधित एक अग्रणी अनुसंधान संस्थान है।
  • सबसे पहले इसकी स्थापना 20 अप्रैल, 1954 को उत्तर, प्रदेश सरकार द्वारा वाराणसी में की गई उसके बाद वर्ष 1955 में नैनीताल एवं वर्ष 1961 में इसे अपने वर्तमान स्थान मनोरा पीक (नैनीताल) में ले जाया गया।

लेखक-आदित्य भारद्वाज


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