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Post at: Jul 22 2021

मोटे अनाज का अंतरराष्ट्रीय वर्ष 2023

वर्तमान संदर्भ

  • 4 मार्च, 2021 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने सर्वसम्मति से भारत द्वारा प्रायोजित एक प्रस्ताव, जिसका समर्थन 70 से अधिक देशों ने किया, को स्वीकार करते हुए वर्ष 2023 को ‘‘मोटे अनाज का अंतरराष्ट्रीय वर्ष’’ (International Year of Millets) घोषित किया।
  • इस घोषणा का उद्देश्य बदलती जलवायवीय परिस्थितियों के तहत अनाज के स्वास्थ्य लाभ और खेती के लिए इसकी उपयुक्तता के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
  • मोटे अनाज में बाजरा, ज्वार, जौ या कोदो जैसी फसलें शामिल हैं।

पृष्ठभूमि-

  • ‘‘अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष 2023’’ शीर्षक वाले प्रस्ताव को भारत ने नेपाल, बंाग्लादेश, केन्या, रूस नाइजीरिया और सेनेगल के साथ मिलकर तैयार किया जिसे 70 से अधिक देशों द्वारा सह-प्रायोजित किया गया ।
  • इस प्रस्ताव को 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
  • अप्रैल, 2016 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने वर्ष 2016 से वर्ष 2025 तक ‘‘पोषण पर संयुक्त राष्ट्र दशक’’ की कार्रवाई की घोषणा की थी।
  • जिसके माध्यम से भूख को मिटाने और विश्वभर में सभी प्रकार के कुपोषण को रोकने की आवश्यकता को मान्यता दी गई थी।

महत्वपूर्ण बिंदु-

(1) उद्देश्य-

(i) खाद्य सुरक्षा, पोषण और किसानों के कल्याण के लिए संकल्प को अपनाया गया है।
(ii) अनाज के स्वास्थ्य लाभ और इसकी जलवायु लचीलता प्रकृति के बारे में जागरूकता को प्रसारित करने में मदद मिलेगी।
(iii) संकल्प के माध्यम से, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) स्वस्थ और संतुलित आहार के लिए बढ़े हुए िटकाऊ उत्पादन और बाजरा की खपत को बढ़ावा देने की वकालत करेगा।

  • यह अनाज की विशाल आनुवांशिक विविधता और उनकी अनुकूली क्षमताओं को भी मान्यता देता है।

(2) क्रियान्वयन एजेंसी :

  • ‘अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष 2023’ प्रस्ताव को लागू करने और क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी ‘‘ खाद्य और कृषि संगठन ’’ (FAO) को प्रदान की गई है।

(3) मोटे अनाज

  • मोटे अनाज सामान्यत: शुष्क क्षेत्रों में उगते हैं मोटे अनाजों को दो भागों में बांटा गया है-

(i) पहला, मोटा अनाज जिनमें ज्वार और बाजरा आते हैं।
(ii) दूसरा, लघु अनाज जिनमें बहुत छोटे दाने वाले मोटे अनाज जैसे- रागी, कोदो, कुटकी, कगनी, चीना और सांवा आदि आते हैं।

  • भारत, विश्व में मोटे अनाजों का सबसे बड़ा उत्पादक है।
  • सरकार पोषण सुरक्षा प्राप्त करने के लिए मिशन स्तर पर रागी और ज्वार जैसे मोटे अनाजों की खेती को प्रोत्साहित कर रही है।
  • बाजरा, जिसे पोषक अनाज कहा जाता है, को समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है और इसे मध्याह्न भोजन योजना (प्रारंभ : 15 अगस्त, 1995) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 तहत शामिल है।

(4) मोटे अनाज और उसकी खेती के लाभ-

अन्य लाभ

  • मोटे अनाजों में, गेहूं और चावल की अपेक्षा अधिक प्रोटीन, क्रूड फाइबर, आयरन, जिंक तथा फॉस्फोरस होते हैं।
  • बच्‍चों और महिलाओं में पोषण की कमी को दूर करने में काफी उपयोगी हैं।

(iii) पेलाग्रा, एनीमिया, बी-कॉम्प्‍लेक्स, विटामिन की कमी को दूर करने में मोटे अनाज लाभदायक हैं।
(iv) मोटापा, मधुमेह तथा अन्य जीवन शैली से संबंधित रोगों को दूर करने के लिए भी काफी उपयोगी है।

  • मोटे अनाज में डाइटरी फाइबर तथा एंटी-ऑक्‍सीडेंट उच्‍च मात्रा में पाए जाते हैं।
  • मोटे अनाज किसानों को पोषण, सुरक्षा, आय तथा आजीविका प्रदान करते हैं। इनका उपयोग खाद्य पदार्थ, फीड, चारा तथा जैव ईंधन के रूप में किया जा सकता है।

(5) कुछ अन्य तथ्य-

(i) भारत ने वर्ष 2018 को मोटे अनाज के राष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाया था।
(ii) राष्ट्रीय ज्वार-बाजरा (Millets) दिवस- 16 नवंबर

(6) संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly-UNGA)

स्थापना : वर्ष 1945, न्यूयाॅर्क, USA
मुख्यालय : न्यूयाॅर्क, USA
अध्यक्ष : बोल्कन बोज्किर (Volkan Bozkir)

  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) के तहत वर्ष 1945 में इसकी जनरल असेंबली यानी महासभा स्थापित की गई।
  • यह महासभा संयुक्त राष्ट्र (UN) में विचार-विमर्श और नीति-निर्माण जैसे मुद्दों पर प्रतिनिधि संस्था के रूप में कार्य करती है।

निष्कर्ष- मोटे अनाजों में न केवल पोषक तत्वों का भंडार होता है, बल्कि ये जलवायु लचीलेपन वाली फसलें भी है। मोटे अनाजों के उपयोग से पोषण के अलावा खाद्य सुरक्षा और किसानों के कल्याण को भी बल मिलता है। साथ ही यह कृषि वैज्ञानिकों और स्टार्ट-अप समुदाय के लिए शोध और नवोन्मेष के द्वार भी खोलता है। अत: वर्ष 2023 को मोटे अनाज का वर्ष घोषित किए जाने से मोटे अनाज के उत्पादन तथा उपभोग में वृद्धि होगी।

संकलन- शिशिर अशोक कुमार


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