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Post at: Jul 19 2021

स्वच्‍छ ऊर्जा मंत्रिस्तरीय सम्मेलन

वर्तमान संदर्भ-

  • 12वें ‘स्वच्‍छ ऊर्जा मंत्रिस्तरीय’ (Clean Energy Ministerial) सम्मेलन का आयोजन 31 मई से, 06 जून, 2021 तक चिली में किया गया। इसकी थीम ‘एमवीशन इनटू एक्‍शन’ (Ambition into Action) थी।

CME12 का केंद्रीय बिन्‍दु है-

  • कोविड-19 महामारी से अर्थव्यवस्था के उबार हेतु स्वच्‍छ ऊर्जा की मध्यम एवं दीर्घकालिक भूमिका तय करना।
  • नवंबर 2021 में COP 26 से पहले उत्‍सर्जन में कटौती करने हेतु प्रतिबद्धता का निर्माण।
  • स्वच्‍छ अर्थव्यवस्था की ओर निरन्‍तर अग्रसर होना, महत्‍वाकांक्षा बढ़ाना तथा स्वच्‍छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना।

उद्देश्य

  • वैश्विक स्वच्‍छ ऊर्जा नेतृत्‍व का प्रदर्शन करना।
  • सामूहिक एवं व्यक्‍तिगत तौर पर स्वच्‍छ ऊर्जा कार्रवाई की घोषणा करना।
  • CME के लिए नए पांच वर्षीय शासनादेश की घोषणा एवं सहमति बनाना।
  • CME के अगले दौर हेतु प्राथमिक मुद्दों एवं कार्यवाहियों की पहचान करना।
  • वैश्विक स्वच्‍छ ऊर्जा समुदाय को सूचित एवं प्रेरित करना।

स्वच्‍छ ऊर्जा मंत्रिस्तरीय (CEM) पर एक नजर

  • CEM स्वच्‍छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी में सहायक नीतियों व कार्यक्रमों को बढ़ावा देने, सर्वोत्‍तम प्रक्रियाओं व प्रथाओं को साझा करने और वैश्विक स्वच्‍छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था को प्रोत्‍साहित करने हेतु एक उच्‍च स्तरीय वैश्विक मंच है।
  • इसे वर्ष 2009 में कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर पार्टियों के सम्मेलन संयुक्‍त राष्ट्र फ्रेमवर्क अभिसमय में स्थापित किया गया था।
  • CEM प्रथम सम्मेलन 2010 में आयोजित की गई थी।
  • वर्तमान में भारत सहित 28 देश एवं यूरोपीय यूनियन इसके सदस्य हैं।

केंद्रित क्षेत्र-

  • सीईएम तीन वैश्विक जलवायु और ऊर्जा नीति लक्ष्यों पर केंद्रित है।

(1) विश्व भर में ऊर्जा दक्षता में सुधार
(2) स्वच्‍छ ऊर्जा आपूर्ति में वृद्धि
(3) स्वच्‍छ ऊर्जा पहुंच का विस्तार

प्रमुख भूमिकाएं

  • विश्व के प्रमुख स्वच्‍छ ऊर्जा बाजार के नेतृत्‍व कर्ताओं को एक साथ लाना।
  • नीतिगत सुधार एवं स्वच्‍छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों का विस्तार।
  • निजी क्षेत्र के प्रमुख भागीदारों को शामिल करना।
  • अंतरराष्ट्रीय स्वच्‍छ ऊर्जा संवाद में अंतर को भरना।

औद्योगिक डीप डीकार्बनाइजेशन पहल (IDDI)

  • CME12 सम्मेलन के दौरान 01 जून, 2021 को औद्योगिक डीप डीकार्बनाइजेशन पहल’ (Industrial Deep Decarbonisation Initiative-IDDI) की कार्य प्रक्रियाओं का शुभारंभ किया गया।
  • यह सार्वजनिक और निजी भागीदारी का एक वैश्विक गठबंधन है, जो निम्न कार्बन उत्‍सर्जन वाली औद्योगिक सामग्री की मांग को प्रत्‍साहित करने हेतु कार्यरत है।
  • संयुक्‍त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (United Nations Industrial Development Organization-UNIDO) के समन्‍वय में इस पहल का नेतृत्‍व भारत और यूनाइटेड किंगडम कर रहे हैं।
  • वर्तमान में इस पहल में कनाडा, जर्मनी और संयुक्‍त अरब अमीरात भी शामिल हैं।

IDDI के कार्य

  • राष्ट्रीय सरकारों के सहयोग से आई.डी.डी.आई कार्बन आकलन को मानकीकृत करने, सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के महत्‍वाकांक्षी खरीद लक्ष्यों को स्थापित करने, निम्न-कार्बन वाले उत्‍पादों के विकास में निवेश को प्रोत्‍साहित करने और औद्योगिक दिशा-निर्देशों की रूपरेखा बनाने के लिए कार्य करेगा है।
  • आई.डी.डी.आई स्टील और सीमेंट जैसी कार्बन गहन निर्माण सामग्री से निपटने के लिए ‘मिशन पॉसिबल प्‍लेटफॉम’ व ‘लीडरशिप ग्रुप फॉर द इंडस्ट्री टांजिशन जैसी अन्‍य पहलों और ‘अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा अभिकरण (International Renewable Energy Agency-IRENA) व ‘विश्व बैंक जैसे संगठन को एक साथ लाता है।
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए स्टील व सीमेंट जैसे भारी उद्योगों से उत्‍सर्जन को कम करने की आवश्यकता है।
  • उल्‍लेखनीय है कि स्टील व सीमेंट उद्योग अलग-अलग वैश्विक स्तर पर ऊर्जा से संबंधित उत्‍सर्जन के लगभग 7 से 8 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं।

उद्देश्य

  • इस पहल मे प्रमुख उद्देश्यों में ‘सरकार व निजी क्षेत्रों को निम्न कार्बन उत्‍सर्जन वाले स्टील और सीमेंट की खरीद को प्रोत्‍साहित करना’ एवं ‘सामान्‍य मानकों व लक्ष्यों के लिए डाटा सोर्सिंग व शेयरिंग’ (Sourcing and Sharing data) करना शामिल है।

आईडीडीआई पहल के उद्देश्यों की प्राप्‍ति में सहायक गतिविधियां

  • सीमेंट व स्टील उद्योग के लिए मानक एक ‘मानक पर्यावरण रिपोर्टिंग तंत्र’ का विकास।
  • परियोजनाओं के लिए एक मानक मूल्‍यांकन प्रक्रिया और उपकरण उपलब्ध कराना।
  • सर्वोत्‍तम उत्‍पादन एवं विनिर्माण अभ्यास को प्रोत्‍साहित करने पर ध्यान।
  • सरकारी एजेंसियों के लिए खरीद दिशा-निर्देश तैयार करना।
  • नि:शुल्‍क या कम लागत वाली प्रमाणन सेवा का शुभारंभ करना।
  • सार्वजनिक रूप से डाटा, अनुसंधान और उपकरण की उपलब्धता को बढ़ावा देना।
  • औद्योगिक डीप डीकार्बोनाइजेशन प्रशिक्षण व ज्ञान की भागीदारी को प्रोत्‍साहित करना।
  • स्टील व सीमेंट उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन हेतु एक वैश्विक (2050) दृष्टिकोण का विकास करना।
  • अनुमानत: 80 प्रतिशत सीमेंट और 90 प्रतिशत स्टील का उत्‍पादन लगभग दस प्रमुख देशों में किया जाता है, अत: इन देशों का आईडीडीआई में शामिल होना महत्‍वपूर्ण है।
  • भारत वर्ष 2030 तक सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) की प्रति इकाई के रूप में कार्बन उत्‍सर्जन गहनता में 33 से 35 प्रतिशत कमी लाने को लेकर प्रतिबद्ध है।
  • यह स्टील, लोहा और पेट्रो रसायन जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्रों में निम्न कार्बन उत्‍सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग से संभव है।
  • सीईएम की 13वीं बैठक वर्ष 2022 में अमेरिका में एवं वर्ष 2023 में भारत में प्रस्तावित है।

संयुक्‍त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO)

  • संयुक्‍त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन गरीबी उन्‍मूलन, समावेशी वैश्वीकरण और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने वाली संयुक्‍त राष्ट्र की विशेष एजेंसी है। Æ
  • 01 अप्रैल, 2019 की स्थिति के अनुसार, भारत सहित 170 देश इसके सदस्य हैं।
  • इसका मुख्यालय आस्ट्रिया की राजधानी वियना में है।
  • वर्ष 2013 में यूनिडो (UNIDO) के 15वें सत्र में अपनाए गए ‘लीमा घोषणा पत्र’ तथा वर्ष 2019 में 18वें सत्र में अपनाए गए ‘अबू धाबी घोषणा पत्र’ में इस मिशन का उल्‍लेख किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य सदस्य राज्‍यों में समावेशी और सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना और तीव्र करना है।
  • यूनिडो का मिशन सतत विकास लक्ष्य-9 (SDG-9) के अनुरूप है,जो ‘लचीले बुनियादी ढांचे का निर्माण, समावेशी और टिकाऊ औद्योगीकरण व नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान करता है।

12वें स्वच्‍छ ऊर्जा मंत्रिस्तरीय के दौरान प्रारंभ अन्‍य पहलें

  • बायोफ्यूचर अभियान (Biofuture Compaign) का शुभारंभ- इस अभियान को ‘बायोफ्यूचर प्‍लेटफार्म पहल’ (Biofuture Plateform Initiative) के अंतर्गत लांच किया गया था। बीएफपीआई को 11वें स्वच्‍छ ऊर्जा मंत्रिस्तरीय के दौरान प्रारंभ किया गया था। भारत सहित 8 देश इसके सदस्य हैं।
  • ‘बायोफ्यूचर अभियान’ का उद्श्य हरित गृह गैस के उत्‍सर्जन को कम करना तथा सकुर्लर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।
  • वैश्विक हाइड्रोजन पोर्ट् स गठबंधन (Global Hydrogen Ports Coalition)- यह शिपिंग बंदरगाहों पर हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक वैश्विक नेटवर्क है।
  • व्यक्‍ति सशक्‍तिकरण पहल (Empowering Initiative)- यह स्वच्‍छ ऊर्जा कार्यबल बनाने एवं स्वच्‍छ ऊर्जा संक्रमण से अधिक नागरिक जुड़ाव के लिए कनाडा, अमेरिका व यूरोपीय आयोग द्वारा एक नया वैश्विक गठबंधन है।

CEM और भारत

  • भारत CEM के 29 सदस्यों में से एक है।
  • CEM4, 2013 भारत की मेजबानी में आयोजित की गई थी।
  • विद्युत मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय CEM के सम्मेलन में शामिल होते हैं।
  • जबकि ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया तथा पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लि0 में CEM सक्रिय संगठन हैं।
  • भारत द्वारा CEM में जिन प्रमुख पहलो का नेतृत्‍व किया जा रहा है वह निम्नलिखित है।
  • 21th सेन्‍चुरी पॉवर पार्टनरशिप
  • इंटरनेशनल स्मार्ट ग्रिड एक्‍शन नेटवर्क
  • सुपर इफिसिएन्‍ट इक्‍यूपमेंट एण्ड एप्‍लाएंस डेवलपमेंट इनिशिएटिव
  • बॉयोफ्यूचर प्‍लेटफॉर्म
  • पावर सिस्टम फेलेक्‍बीलिटी कैम्पेन
  • इण्डस्ट्रियल डीप डिकार्बोनाइजेशन इनिशिएटीव
  • बायोफ्यूचर कैम्पेन
  • भारत द्वारा CEM में कुछ पहल में भागीदारी की जा रही है जिनका विवरण निम्नलिखित है-
  • भारत द्वारा CEM में कुछ पहल में भागीदारी की जा रही है जिनका विवरण निम्नलिखित है-
  • इलेक्‍ट्रिक वेहकिल इनिशिएटीव
  • क्‍लीन एनर्जी सल्‍यूशन सेंटर
  • क्‍लीन एनर्जी एजुकेशन एण्ड इम्पावरमेंट इनिशिएटीव
  • EV30@30 कैम्पेन
  • हाइड्रोजन इनिशिएटीव (C3E)
  • कार्बन कैप्‍चर, यूटीलाइजेशन एण्ड स्टोरेज (CCUS)
  • इंवेस्टमेंट एण्ड फाइनेंस इनिशिएटीव
  • लांग टर्म एनर्जी सिनेरिओ (LTES)

सं. अभिषेक शुक्‍ला


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