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बैंकिंग सुधारों के जनक : एम नरसिंहम

वर्तमान संदर्भ

  • 20अप्रैल 2021 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 13वें गवर्नर मैदावोलू नरसिंहम (एम नरसिंहम)का कोविड-19 के कारण 94 वर्ष की आयु में हैदराबाद में निधन हो गया।
  • उनका जन्‍म 3 जून, 1927 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में हुआ था।

महत्‍वपूर्ण बिंदु
(1) एम नरसिम्हम के बारे में

(i) एम. नरसिंहम को भारतीय बैंकिंग और वित्‍तीय क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत में ‘बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों के जनक’ (Father of Indian Banking Reforms) के रूप में जाना जाता है।
(ii) वे RBI के 13वें गर्वनर थे और उन्‍होंने 2 मई, 1977 से 30 नवंबर, 1977 (लगभग 7 माह) तक कार्य किया।

  • एम. नरसिंहम रिजर्व बैंक कैडर (RBI) से नियुक्‍त होने वाले पहले और अब तक के एकमात्र गर्वनर थे, जो आर्थिक विभाग में अनुसंधान अधिकारी के रूप में बैंक में शामिल हुए थे।

(iii) उन्‍होंने विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में कार्यकारी निदेशक के रूप में भी कार्य किया।
(iv) उन्‍होंने एशियाई विकास बैंक (ADB) के उपाध्यक्ष के रूप में भी काम किया। 1982 से 1983 के मध्य में वित्त सविच भी रहे।
(v) भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्‍हें वर्ष 2000 में पद्‍म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
(vi) नरसिंहम को बैंकिंग और वित्‍तीय क्षेत्र में सुधारों हेतु दो उच्‍चस्तरीय समितियों की अध्यक्षता करने के लिए जाना जाता है।

  • दोनों नरसिंहम समितियों के द्वारा प्रतिपादित कई दृष्टिकोणों का महत्‍व वर्तमान में भी प्रासंगिक है। जैसे- बैंकों का विलय करना और सशक्‍त मेगाबैंक बनाने का विचार सबसे पहले नरसिंहम समिति द्वारा प्रस्तुत किया गया था।

(2) एम नरसिंहम समिति,1991 (वित्‍तीय प्रणाली सुधार समिति)

समिति द्वारा प्रस्तुत सिफारिशें निम्नलिखित हैं-

(i) रिपोर्ट में बैंकिंग क्षेत्र में एक चार स्तरीय ढांचे (अंरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, जिला एवं ग्राम स्तरीय) की व्यवस्था की सिफारिश की, जिसमें तीन या चार बड़े बैंक होंगे, जिसमें एसबीआई शामिल होगा और इसे शीर्ष स्थान प्राप्‍त होगा तथा यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपना कार्य कर सकेगा।
(ii) रिपोर्ट में ‘स्थानीय क्षेत्र के बैंक’ जैसे-ग्रामीण क्षेत्र-केंद्रित बैंकों की अवधारणा को प्रस्तुत किया गया।
(iii) रिपोर्ट में बैंकों के लिए ‘अनिवार्य बांड निवेश’ और ‘नकद आरक्षित सीमा’ में चरणबद्ध कटौती का प्रस्ताव रखा गया, जिससे बैंक, अर्थव्यवस्था की अन्‍य उत्‍पादक जरूरतों के लिए ऋण देने में सक्षम हो सकें।
(iv) रिपोर्ट में, ‘पूंजी पर्याप्‍तता अनुपात’ (Capital Adequacy ratio- CAR) की अवधारणा प्रस्तुत की गई और साथ ही शाखा लाइसेंसिंग नीति को समाप्‍त करने का प्रस्ताव दिया गया।
(v) समिति द्वारा ‘गैर-निष्पादित परिसंपत्‍तियों’ का वर्गीकरण करने और खातों का पूर्ण प्रकटीकरण करने संबंधी अवधारणाओं की भी सिफारिश की गई।
(vi) समिति के द्वारा ब्याज दरों को कम करने का प्रस्ताव दिया गया, जिसने बैंकों के मध्य अधिक प्रतिस्पर्धा की शुरुआत की।
(vii) समिति के द्वारा खराब ऋण (Bad Loans) के लिए ‘परिसंपत्‍ति पुनर्संरचना निधि’ की अवधारणा प्रस्तुत की।

नोट- वर्ष 1991 में देश में LPG (Liberalisation, Privetisation and Globalisation) सुधार लागू किए जा चुके थे

(3) द्वितीय नरसिंहम समिति (1998)।

  • वर्ष 1998 में सरकार द्वारा श्री नरसिंहम की अध्यक्षता में एक अन्‍य समिति का गठन किया गया। ये समिति पूर्णत: बैंकिंग सुधारों (बैंकिंग सेक्‍टर कमेटी) से संबंधित थी। इस समिति के प्रमुख सुझाव निम्नवत हैं-

(i) सुदृढ़ वाणिज्‍यिक बैंकों का आपस में विलय अधिकतम आर्थिक और वाणिज्‍यिक माहौल पैदा करेगा और इससे उद्योगों का विकास होगा।

  • सुदृढ़ वाणिज्‍यिक बैंकों का विलय कमजोर वाणिज्‍यिक बैंकों के साथ नहीं किया जाना चाहिए।

(ii) समिति ने गैर-निष्पादित संपत्तियों (NPA) में सुधारों के द्वारा बैंकों की परिसंपत्तियों को मजबूत बनाने की बात की।
(iii) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए वित्‍तीय पर्यवेक्षण बोर्ड (Board of Financial Supervision) का सुझाव दिया, जो कि एक स्वतंत्र एवं स्वायत्‍त संस्था हो एवं इसे राजनीति से दूर रखा जाए।
(iv) देश के बड़े बैंकों को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया जाना चाहिए।

इस प्रकार से इस समिति को बैंकिंग सुधार प्रगति की समीक्षा करने और भारत की वित्‍तीय प्रणाली को और मजबूत करने के लिए एक कार्यक्रम डिजाइन करने का कार्य सौंपा गया था। इस समिति द्वारा विभिन्‍न क्षेत्रों जैसे-पूंजी पर्याप्‍तता बैंकों के विलय, बैंक कानून आदि विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

(4) एम नरसिंहम समिति का महत्‍व

निम्नलिखित सुधार कार्यक्रमों के पीछे नरसिंहम समिति के सुझाव ही कार्य कर रहे हैं-

(i) हाल ही में 10 राष्ट्रीयकृत बैंकों का विलय
(ii) नैरो बैंकिंग की अवधारणा
(iii) निजी क्षेत्र के बैंको की स्थापना जैसे-ICICI बैंक (1994), HDFC बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक आदि।
(iv) वित्‍तीय संपत्तियों का प्रतिभूतिकरण, पुनर्निर्माण और सुरक्षा हित (SARFAESI) अधिनियम, 2002
(v) पूंजी पर्याप्‍तता मानदंडों में वृद्धि और विदेशी बैंकों का प्रवेश (vi) एसेट रिकंस्ट्रक्‍शन कंपनियों (ART) की स्थापना।
(vii) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सहायक के रूप्‍ा में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) की स्थापना।

नोट- बैंकिंग सुधार से संबंधित प्रमुख समितियां-

(i) चक्रवर्ती समिति (1985)
(ii) गोइपोरिया समिति (1990)
(iii) वर्मा समिति (1996)
(iv) दामोदरन समिति (2010)
(v) विमल जालान समिति (2018)
(vi) नचिकेत मोर समिति (2013)

नोट-‘फ्रॉम रिजर्व बैंक टू फाइनेंस मिनिस्ट्री एण्ड वियोंड : सम रेमिनिसेंसेज’ :एम नरसिंहम द्वारा लिखी पुस्तक है।

सं. शिशिर अशोक सिंह


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