Contact Us - 0532-246-5524,25 | 9335140296
Email - ssgcpl@gmail.com
|
|

Post at: Jul 19 2021

राष्ट्रीय औषधि मूल्‍य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) और औषधि नियामक केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO)

वर्तमान संदर्भ

20 मार्च, 2021 को ‘‘राष्ट्रीय औषधि मूल्‍य निर्धारण प्राधिकरण’’(National Pharmaceuticals Pricing Authority : NPPA) ने मरीजों को पेटेंट समाप्‍त होने का लाभ देने के लिए पेटेंट रहित मधुमेह रोधी दवाओं सहित 81 दवाओं का मूल्‍य निर्धारित कर दिया है।

  • NPPA ने स्वदेशी स्तर पर शोध एवं विकास के माध्यम से विकसित नई दवा आपूर्ति व्यवस्था के क्रम में ‘‘औषधि मूल्‍य नियंत्रण आदेश (DPCO), 2013’’ के पैरा 32 के अंतर्गत संबंधित कंपनियों को उक्त उल्‍लिखित फॉर्म्यूलेशन के लिए पांच साल की अवधि के लिए कीमत तय करने की छूट दी थी।
  • छूट की अवधि के दाैरान मूल्‍य नियंत्रण लागू नहीं था।
  • अनुसूचित फॉर्म्यूलेशन के वर्तमान अधिकतम मूल्‍य में संशोधन थोक मूल्‍य सूचकांक (WPI) पर आधारित है, जिसे प्राधिकरण द्वारा ही मंजूरी दी गई थी।
  • संधोधित कीमतें अप्रैल, 2021 से लागू हो गई है।

पृष्ठभूमि

  • वैश्विक कोरोना महामारी के दौर में स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के मद्देनजर दवाओं और टीकों की महत्ता बढ़ गई है।
  • इस संदर्भ में दवाओं के निर्माण और इस्तेमाल से संबंधित दो राष्ट्रीय संस्थाएं लगातार चर्चा में रहीं हैं।

(i) ‘‘केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन’’ (CDSCO)
(ii) राष्ट्रीय औषधि मूल्‍य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA)

  • 3 जनवरी, 2021 को देश के औषधि नियामक ‘‘केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन’’(CDSCO) ने स्वदेश निर्मित कोविड-19 टीकों के सीमित आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी दी थी।

महत्‍वपूर्ण बिंदु

(1) केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO)

  • केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) स्वास्थ्य महानिदेशालय के अंतर्गत ‘‘स्वास्थ्य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय’’ का राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण है।
  • मुख्यालय: नई दिल्‍ली
  • देशभर में इसके 6 जोनल कार्यालय, चार सब-जोनल कार्यालय, 13 पोर्ट कार्यालय और 7 प्रयोगशालाएं हैं।
  • विजन: भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना और उसे बढ़ावा देना।

कार्य

(i) दवाओं, सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्‍सा उपकरणों की सुरक्षा, प्रभावकारिता और गुणवत्ता बढ़ाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा तय करना है।
(ii) औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और नियम 1945 (The Drugs &Cosmetics Act, 1940 and Rules 1945) के अंतर्गत CDSCO

  • दवाओं के अनुमोदन
  • नैदानिक परीक्षणों की मंजूरी
  • दवाओं के मानक तैयार करने

नई दवाओं का परीक्षण

  • देश में आयातित दवाओं की गुणवत्ता पर नियंत्रण
  • राज्‍य दवा नियंत्रण संगठनों को विशेषज्ञ सलाह प्रदान करना इत्‍यादि कार्य करती हैं।
  • उक्त कार्यों के माध्यम से CDSCO औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के प्रवर्तन में एकरूपता लाने के लिए उत्तरदायी है।

(2) औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940

  • भारत का ‘‘औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940’’ (Drugs and Cosmetics Act, 1940) औषधियों तथा प्रसाधनों के निर्माण, बिक्री, संवितरण तथा आयात को विनियमित करता है।
  • इसके अनुसार कोई भी व्यक्ति या फर्म राज्‍य सरकार द्वारा जारी उपयुक्त लाइसेंस के बिना औषधियों का स्टॉक, बिक्री या वितरण नहीं कर सकता।

(3) राष्ट्रीय औषधि मूल्‍य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA)

  • दवाओं के मूल्‍य निर्धारण और सस्ती कीमत पर दवाओं की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए NPPA की स्थापना 29 अगस्त, 1997 को एक स्वतंत्र नियामक के रूप में की गई थी।
  • इस प्रकार से यह एक स्वायत्त निकाय है जो औषधि विभाग (DOP), रसायन और उर्वरक मंत्रालय के एक संलग्‍न कार्यालय के रूप में कार्य करता है, जिसे भारत सरकार के प्रस्ताव के तहत गठित किया गया था।

NPPA के कार्य

  • विनियंत्रित थोक औषधियों व फॉर्मूलों का मूल्‍य निर्धारित व संशोधित करना।
  • निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप औषधियों के समावेशन व बहिर्वेशन के माध्यम से समय-समय पर मूल्‍य नियंत्रण सूची को अद्यतन करना।
  • दवाओं की उपलब्धता की निगरानी करना, कमी की पहचान करना एवं उपचारात्‍मक उपाय करना।
  • औषधि (मूल्‍य नियंत्रण) आदेश को प्राप्‍त शक्‍तियों के अनुसार लागू करना।
  • प्राधिकरण के निर्णयों से उत्‍पन्‍न होने वाले सभी कानूनी मामलों से निपटना।
  • औषधि नीति में परिवर्तन/संशोधन पर केंद्र सरकार को सलाह देना।
  • दवा कंपनियों के उत्‍पादन, आयात-निर्यात और बाजार हिस्सेदारी से जुड़े डेटा का रख-रखाव।
  • दवाओं के मूल्‍य निर्धारण से संबंधित मुद्दों पर संसद को सूचनाएं प्रेषित करने के साथ-साथ दवाओं की उपलब्धता का अनुपालन व निगरानी करना।

(4) आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची (NLEM)

  • औषधि मूल्‍य नियंत्रण आदेश, 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत ‘‘राष्ट्रीय औषधि मूल्‍य निर्धारण प्राधिकरण’’ (NPPA) द्वारा केवल ‘‘आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची’’ (NLEM)’’ में दर्ज दवाओं की कीमतों पर निगरानी और नियंत्रण किया जाता है।

(i) आवश्यक दवाएं (Essential Medicines)

  • वे होती हैं, जो आबादी के अधिकांश लोगों की स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकता वाली आवश्यकताओं को पूरा करती हैं।
  • NLEM का मुख्य उद्देश्य तीन महत्‍वपूर्ण पहलुओं-
    • लागत
    • सुरक्षा
    • प्रभावकारिता, पर विचार करते हुए दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना है।
    • DPCO (Drugs Price Control Order),2013 का अनुच्‍छेद 19, असाधारण परिस्थितियों में दवा की कीमतों में वृद्धि अथवा कमी से संबंधित है। हालांकि, कीमतों की सीमा में सुधार हेतु कोई निश्चित पूर्ण उदाहरण अथवा फाॅर्मूला निर्धारित नहीं है।
    • वर्तमान में ‘स्वास्थ्य’ राज्‍य सूची (State List) का विषय है।

 

(5) कुछ अन्‍य महत्‍वपूर्ण तथ्य

केरल, राज्‍य ड्रग्‍स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के तहत आवश्यक दवाओं और चिकित्‍सा उपकरणों की कीमतों के उल्‍लंघन की जांच करने के लिए एक ‘‘मूल्‍य निगरानी और अनुसंधान इकाई’’ (Pice Monitoring & Research Units) स्थापित करने वाला पहला राज्‍य है।

(ii) औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (Drugs Cosmetics Act, 1940) की धारा-3 के अनुसार 1 अप्रैल, 2020 से चिकित्‍सीय उपकरणों को ‘‘औषधि’’ (Drugs) का दर्जा प्रदान कर दिया गया है।
(iii) हाल ही में 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन.के. सिंह ने कहा कि ‘स्वास्थ्य’ (Health) को संविधान के तहत समवर्ती सूची (Concurrent List) में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

सं. शिशिर अशोक सिंह


Comments
List view
Grid view

Current News List