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Post at: Jul 15 2021

मुल्‍लापेरियार बांध विवाद

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 19 मार्च को सर्वोच्‍च न्‍यायालय (Supreme court) ने मुल्‍लापेरियार बाध के 1886 पट्टा अनुबंध को समाप्‍त करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार केरल एवं तमिलनाडु राज्‍य सरकार को नोटिस जारी किया है।
  • यह बांध तमिलनाडु और केरल के बीच विवाद का एक स्रोत है।
  • सेफ्टी पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा याचिका दायर की गई थी जिसमें शीर्ष अदालत से अनुरोध किया गया था कि अगर तमिलनाडु 2014 में जारी संवैधानिक बेंच के निर्देश का उल्‍लंघन करता है तो केरल सरकार को 1886 के पट्टा अनुबंध को रद्द करने की अनुमति दी जाए।
  • वर्ष 2014 मंे सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने मुल्‍लापेरियार बांध से संबंधित सभी मुद्दों की देख-रेख के लिए एक स्थायी बांध पर्यवेक्षी समिति (Dam Supervisory Committee) का गठन किया था।

पृष्ठभूमि

संबंधित प्रकरण

  • मुल्‍लापेरियार बांध के जल स्तर को 130 फीट तक कम करने के लिए केरल के इडुक्‍की जिले के निवासियों ने एक याचिका दायर की थी।
  • याचिका के अनुसार, मानसूनी अवधि में वृद्धि के कारण राज्‍य के इस क्षेत्र में भूकंप (Earth quake) और बाढ़ (Flood) का खतरा है।
  • याचिकाकर्ता के अनुसार, पर्यवेक्षी समिति ने अपनी जिम्मेदारी को स्थानीय अधिकारियों की उप-समिति पर डाल दिया था।
  • बीते छ: वर्षों से इंस्ट्रूमेंटेशन स्कीम (Instrumentation Scheme), सुरक्षा तंत्र आदि को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

प्रमुख बिंदु
तमिलनाडु का पक्ष

  • बांध के नियम वक्र (Rule curve) को अंतिम रूप देने में देरी के लिए केरल को दोषी ठहराया।
  • बांध को मजबूत करने के उपाय किए जा चुके हैं।
  • केरल सरकार जलाशय के जल स्तर को बढ़ने के प्रयासों में बाधा उत्‍पन्‍न कर रही है।
  • जिस कारण मदुरै के किसानों को नुकसान हो रहा है।

केरल का पक्ष

  • वर्ष 1939 के पुराने ‘बांध-दरवाजा परिचालन कार्यक्रम’ (Gate Operation Schedule) को शुरू करने का आरोप लगाया।
  • केरल ने पेरियार बांध अभयारण्य के निकट स्थित बांध में जल स्तर की उचित निगरानी संबंधी कमी के बारे में भी आशंका व्यक्त की है।
  • वैज्ञानिकों का कहना है कि, इस क्षेत्र में रिक्‍टर पैमाने पर छ: माप से ऊपर भूकंप आने पर, तीन मिलियन से अधिक लोगों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा।

नियम वक्र (Rule curve)?

  • नियम वक्र, किसी बांध के जलाशय में उतार-चढ़ाव के स्तर को तय करता है।
  • बांध के गेट खोलने का कार्यक्रम ‘नियम वक्र’ पर आधारित होता है।
  • यह किसी बांध के ‘मुख्य सुरक्षा’ तंत्र का हिस्सा होता है।

न्‍यायालय का निर्देश

  • उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षी समिति को मुल्‍लापेरियार बांध के लिए ‘नियम वक्र’ संबंधी जानकारी देने में विफल रहने पर तमिलनाडु के मुख्य सचिव ‘व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार’ होंगे तथा इसके लिए उनके खिलाफ ‘उचित कार्रवाई’ की जाएगी।
  • पर्यवेक्षक समिति को तीन मुख्य सुरक्षा मुद्दों को संबोधित करने के लिए कदम उठाने तथा चार सप्‍ताह में एक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।

  • यह तीनों मुद्दे बांध की सुरक्षा से जुड़े हैं।
  • इनका प्रभाव आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्‍तियों पर पड़ेगा।

सं. आदित्‍य भारद्वाज


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