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Post at: Jul 15 2021

विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट,2020

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 16 मार्च, 2020 को स्विट्जरलैंड की वायु गुणवत्ता प्रौद्योगिकी संगठन ‘IQ Air’ द्वारा ‘‘विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट,2020’’ जारी की गई है।
  • वैश्विक शहरों की रैंकिंग रिपोर्ट 106 देशों के PM 2.5 प्रदूषण के आंकड़ों पर आधारित है, जिसे ग्राउंड आधारित निगरानी स्टेशनों द्वारा मापा जाता है, जिनमें से अधिकांश (66.6 प्रतिशत) सरकारी एजेंसियों द्वारा संचालित होते हैं।
  • रिपोर्ट में वैश्विक कण प्रदूषण (PM 2.5) स्तरों पर कोविड-19 लाॅकडाउन और व्यवहार परिवर्तन के प्रभाव का भी पता चलता है।

पृष्ठभूमि

IQ Air

  • IQ Air वर्ष 1963 में स्थापित एक स्विस-आधारित वायु गुणवत्ता प्रौद्योगिकी संगठन है।
  • इस संगठन का प्राथमिक उद्देश्य सूचना, सहयोग और प्रौद्योगिकी समाधानों के माध्यम से व्यक्तियों, संगठनों और समुदायों को स्वच्‍छ हवा में सांस लेने के लिए सशक्त अैर जागरूक बनाना है।
  • IQ Air वायु प्रदूषण के उन्‍मूलन की मुहिम में ‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम’(United Nations Environment Program : UNDP) , संयुक्त राष्ट्र पर्यावास (UN Habitat) और ग्रीनपीस के प्रौद्योगिकी भागीदार के रूप में कार्य करती है।

महत्‍वपूर्ण तथ्य

‘विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट, 2020’ के महत्‍वपूर्ण निष्कर्ष-

(i) विश्व के शीर्ष प्रदूषित देश

प्रथम – बांग्‍लादेश (सर्वाधिक प्रदूषित देश)
द्वितीय – पाकिस्तान
तृतीय – भारत

नोट: वर्ष 2019 के दौरान भारत का पांचवां (5th) स्थान था।

(ii) विश्व के निम्नतम प्रदूषित देश

प्‍यूर्टोरिको (सबसे कम प्रदूषित देश)– प्रथम (106)
न्‍यू कैलेडोनिया– द्वितीय (105)
अमेरिकी वर्जिन आईलैंड– तृतीय (104)

(iii) अन्‍य प्रमुख देशों की रैंकिंग (प्रदूषित देशों के रूप में) चीन-14वां, दक्षिण अफ्रीका-49वां, ब्राजील-68वां, संयुक्त राज्‍य अमेरिका (USA)- 84वां, रूस-86वां।

(iv) वैश्विक राजधानियों की स्थिति (सर्वाधिक प्रदूषण के संदर्भ में) दिल्‍ली (भारत) को विश्व की सर्वाधिक प्रदूषित राजधानी शहर घोषित किया गया है।

प्रथम- दिल्‍ली (भारत)
द्वितीय – ढाका (बांग्‍लादेश)
तृतीय- उलानबटाेर (मंगोलिया)
चौथा- काबुल (अफगानिस्तान)
पांचवां- दोहा (कतर)

(v) विश्व के शहरों की स्थिति (सर्वाधिक प्रदूषण के संदर्भ में)

प्रथम- होटन (चीन)
द्वितीय- गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश, भारत)
तृतीय- बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश, भारत)

(vi) भारत की स्थिति

  • भारत, विश्वभर के शीर्ष 30 सबसे प्रदूषित शहरों में से 22 शहरों के साथ सबसे प्रदूषित शहरों की रैंकिंग में शीर्ष पर है।
  • शीर्ष 10 प्रदूषित शहरों की सूची में से निम्न 9 भारतीय शहर शामिल हैं गाजियाबाद, बुलंदशहर,विसरख जलालपुर, भिवाड़ी (राजस्थान), नोएडा, ग्रेटर नोएडा, कानपुर, लखनऊ (8th), दिल्‍ली।
  • उत्तर प्रदेश के 10 शहरों को प्रदूषित शहरों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है गाजियाबाद, बुलंदशहर, विसरख जलालपुर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, आगरा, मुजफ्फरनगर।
  • बिहार का मुजफ्फरपुर 28वां प्रदूषित शहर के रूप में शामिल है।
  • हालांकि दिल्‍ली की वायु गुणवत्ता में वर्ष 2019 से 2020 तक लगभग 15 प्रतिशत का सुधार हुआ है। सुधार के बावजूद दिल्‍ली विश्व का 10वां सबसे प्रदूषित शहर और सर्वाधिक प्रदूषित राजधानी शहर के रूप में शीर्ष पर है। जहां दिसंबर, 2019 में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ संगठन के मानक से 14 गुणा ज्‍यादा था।

भारत में वायु प्रदूषण के मुख्य कारक

(i) परिवहन
(ii) भोजन पकाने के लिए जैव ईंधन का प्रयोग
(iii) बिजली उत्‍पादन
(iv) उद्योग-धंधे
(v) विनिर्माण कार्य
(vi) अपशिष्ट दहन
(vii) समय-समय पर कृषि अपशिष्टों (पराली) का दहन, इत्यादि।

  • भारत के शहरों में PM 2.5 प्रदूषकों का सबसे बड़ा स्रोत परिवहन क्षेत्र है।
  • भारत में भोजन पकाने हेतु जैव ईधन आंतरिक वायु प्रदूषण का मुख्य स्रोत है जो महिलाओं एवं बच्‍चों के स्वास्थ को प्रभावित करता है।

(vii) कुछ अन्‍य महत्‍वपूर्ण निष्कर्ष

  • कोविड-19 महामारी प्रेरित वैश्विक लॉकडाउन की वजह से वर्ष 2019 की तुलना में वर्ष 2020 में वैश्विक वायु गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है।
  • वर्ष 2020 में सभी भारतीय शहरों की वायु गुणवत्ता में वर्ष 2019 की तुलना में 63 प्रतिशत का सुधार हुआ है।
  • वर्ष 2019 की तुलना में वर्ष 2020 में विश्व के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता मंे सुधार देखा गया।
  • नई दिल्‍ली में PM2.5 कणों की सांद्रता में 15 प्रतिशत कमी आई है, वहीं बीजिंग में 11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
  • इसी प्रकार से, शिकागो में 13 प्रतिशत, लंदन में 16 प्रतिशत, पेरिस में 17 प्रतिशत और सियोल में 16प्रतिशत की कमी PM2.5 में दर्ज की गई है।
  • कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को रोकने के लिए किए गए उपयों के कारण विश्व के देशों की वायु गुणवत्ता में 84 प्रतिशत का सुधार हुआ है।
  • बांग्‍लादेश, भारत और पाकिस्तान के साथ दक्षिण एशिया विश्व का सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्र के रूप में दर्ज हुआ। उल्‍लेखनीय है कि विश्व के 50 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 42 इसी क्षेत्र में स्थित हैं।
  • वर्ष 2020 में यूरोपीय शहरों में से आधे से भी अधिक शहरों में PM2.5 प्रदूषण का स्तर विश्व सवास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित मानक से अधिक था।
  • संयुक्त राज्‍य अमेरिका (USA) के कई शहरों में वनाग्‍नि के वजह से कोरोना वायरस महामारी के बावजूद PM2.5 के प्रदूषण में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
  • अमेरिका के 38 प्रतिशत शहरों में वर्ष 2020 में ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (स्थापना :7 अप्रैल, 1948 मुख्यालय-जेनेवा) के दिशा-निर्देशों काे पूरा नहीं किया।
  • ब्रिक्‍स (BRICS) देशों में भारत (3rd) सर्वाधिक प्रदूषित देश है।
  • विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट-2020 में सूचीबद्ध 106 देशों में से केवल 24 देशों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वार्षिक दिशा-निर्देशों को पूरा किया।
  • वायु प्रदूषण वैश्विक स्तर पर 7 मिलियन समय पूर्व मृत्‍यु का कारण है।
  • साथ ही यह विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रति वर्ष 2.9 ट्रिलियन डॉलर का बोझ बढ़ाता है जो वैश्विक जीडीपी का 3.3 प्रतिशत है।
  • वर्ष 2019 में पर्यावरण को लेकर काम करने वाली संस्था ग्रीनपीस (स्थापना 1971, एम्सटर्डम, नीदरलैंड्स) की रिपोर्ट में झारखंड के ‘झरिया’ को देश का सबसे प्रदूषित शहर बताया गया था।
  • ‘दिल्‍ली’ प्रदूषण के मामले में देश में 10वें स्थान पर था, जबकि शीर्ष-10 प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के 6 शहर शामिल थे।

नोट:- वायु प्रदूषण (Air Pollution)

  • वायु प्रदूषण प्रदूषकों की प्रकृति के आधार पर दो प्रकार का होता है-

(i) गैसीय प्रदूषक (Gaseous Pollutants)
(ii) निलंबित कणिकीय पदार्थ प्रदूषक (SPM:Suspended Particulate Matter)

  • निलंबित कणिकीय पदार्थ (SPM) में ठोस एवं निम्न वाष्पदाब वाले द्रव कण आते हैं, जिनका आकार 0.01m (माइक्रोमीटर) से 100 m तक होता है।
  • इनमें पाए जाने वाले बड़े कण औद्योगिक धूलकण, ज्‍वालामुखी कण, सल्‍फेट व कार्बन कण और बहुनाभिकीय ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAH) होते हैं।
  • स्रोत जीवाश्म ईधन से चलने वाले मोटर वाहन, बिजली उत्‍पादन, औद्योगिक गतिविधि, कृषि एवं बायोमास जलाना आदि।
  • 10m से छोटे आकार के कण जिन्‍हें PM10 कहते हैं, ये ‘‘श्वसनशील निलंबित कणिकीय पदार्थ’ (Respirable Suspended Particulate Matter: RSPM) कहलाते हैं।
  • इसके अलावा, सबसे छोटे कण 0.5m से भी कम आकार के होते हैं, जिन्‍हें PM2.5 कहते हैं, जो कि मानव बाल के व्यास का लगभग 3 प्रतिशत होता है।
  • PM 2.5 श्वसन संबंधी समस्याओं (अस्थमा) का कारण बन सकता है और हमारे देखने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। साथ ही हृदय संबंधित रोग एवं समय पूर्व मृत्‍यु का भी कारण बनता है।

कुछ महत्‍वपूर्ण वायु प्रदूषक और उनसे संबंधित हानियां:-

(i) कार्बन यौगिक (CO और CO2) – हरित गृह प्रभाव, श्वसन संबंधी समस्याएं
(ii) सल्‍फर यौगिक और (SO2 और H2S) – अम्ल वर्षा (Acid Rain), श्वसन संबंधी समस्या, पौधों में क्‍लोरोसिस
(iii) नाइट्रोन यौगिक (NO और N2O) – अम्ल वर्षा, पादपांे की उत्‍पादकता में कमी, आंखों व फेफड़ों में जलन
(iv) निलंबित कण: दृश्यता में कमी, लाल रक्त कण (RBC) के निर्माण में बाधा, कैंसर
(v) हाइड्रोकार्बन (बेंजीन, ईथाइलीन) – कैंसर का कारण, श्वसन संबंधी समस्या, समयपूर्व पत्तियों व फलांे का गिर जाना।
(vi) क्‍लोरोफ्‍लोरोकार्बन (CFC) – भूमंडलीय उष्मन, ओजोन क्षरण
(vii) ओजोन (O3) – श्वसन संबंधी समस्याएं, पर्णसमूह को नुकसान
(viii) सीसा (Pb) – श्वसन संबंधी समस्याएं
(ix) रेशे (कपास, ऊन) – फेफड़ों पर दुष्प्रभाव
(x) एस्बेस्टस – श्वसन संबंधी, समस्याएं तथा कैंसर
(xi) स्मॉग (Smog) – आंखों में जलन, श्वसन संबंधी समस्याएं

विभिन्‍न धूल कणों से होने वाले रोग

(i) कपास की डस्ट – विस्रनोसिस
(ii) गन्‍ने की धूल – बेगासोसिस
(iii) अनाज की धूल – कृषक फुफ्फुस
(iv) सिलिका – सिलिकोसिस
(v) कोयला कण – ऐंथ्राकोसिस

वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए भारत के कदम

(i) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग

  • ‘‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग अध्यादेश, 2020 को केंद्र द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
  • यह आयोग एक ‘वैधानिक प्राधिकरण’ होगा।
  • यह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्‍ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे निकायों का अधिक्रमण (Supersede) करेगा।

(2) भारत स्टेज (BS)VI मानदंड

  • ये वायु प्रदूषण पर निगरानी के लिए सरकार द्वारा निर्धारित उत्‍सर्जन नियंत्रण मानक है।

(3) मॉनीटरिंग एयर क्‍वालिटी के लिए डैशबोर्ड

  • यह एक ‘राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम’ (NAMP) आधारित डैशबोर्ड है, जिसका निर्माण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता निगरानी (NAAQM) नेटवर्क के आंकड़ों के आधार पर किया गया है, जो वर्ष 1984-85 में शुरू किया गया था।

(4) राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक:-

  • ये ‘वायु (रोकथाम और प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम, 1981’ के तहत ‘केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ (CPCB) द्वारा अधिसूचित विभिन्‍न प्रदूषक तत्‍वों के संदर्भ में परिवेशी वायु गुणवत्ता के मानक हैं।

(5) ब्रीथ (BREATH)

  • यह नीति आयोग द्वारा वायु प्रदूषण के मुकाबले के लिए 15 प्‍वॉइंट एक्‍शन प्‍लान है।

(6) प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना (PMUY) (प्रारंभ:2 मई, 2016)

  • इसका उद्देश्य गरीब घरों में स्वच्‍छ खाना पकाने के लिए ईंधन उपलब्ध कराना और जीवन स्तर में गुणात्‍मक वृद्धि लाना है।

(7) राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)-

  • देश के बड़े शहरों में रियल टाइम आधार पर वायु गुणवत्ता की निगरानी करने और जरूरी कार्रवाई करने के लिए जन-जागरूकता में वृद्धि करने के लिए प्रधानमंत्री ने 6 अप्रैल, 2015 को ‘राष्ट्रीय वायु गुणवत्‍ता सूचकांक’ (Air Quality Index-AQI) का शुभारंभ किया है।
  • इसमें अच्‍छी, संतोषजनक, समान्‍य रूप से प्रदूषित, खराब, बहुत खराब और गंभीर नाम की 6 वायु गुणवत्‍ता सूचकांक श्रेणियां हैं।
  • इस सूचकांक को 8 प्रदूषणकारी तत्‍वों के आधार पर तैयार किया जाता है-

– PM 10
– PM 2.5 -NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्‍साइड)
-O3 (ओजोन)
-NH3 (अमोनिया)
-SO2 (सल्‍फर डाइऑक्‍साइड)
-CO (कार्बन मोनोक्‍साइड)
-Pb (लेड)

नोट- इसमें कार्बन डाइऑक्‍साइड (CO2) को शामिल नहीं किया जाता है।

सं. शिशिर अशोक सिंह


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