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Post at: Jul 10 2021

EAST एक कृत्रिम सूर्य

वर्तमान संदर्भ

  • हाल ही में चीन की एक परियोजना जिसका नाम ईस्ट (Exprimental Advanced Superconductiong Tokamak – EAST) है, ने सूर्य से 10 गुना ज्‍यादा तापमान उत्‍पन्‍न करने का रिकार्ड बनाया है।
  • चीन की राज्‍य संचालित मीडिया के अनुसार, प्रायोगिक उन्‍नत सुपरकंडक्‍टिंग टोकामक (EAST) द्वारा, 101 सेकेंड तक 120 मिलियन डिग्री सेल्‍सियस तथा 20 सेकेंड तक 160 मिलियन डिग्री सेल्‍सियस तापमान उत्‍पन्‍न किया गया, जो सूर्य के तापमान से 10 गुना ज्‍यादा है।
  • टोकामक एक प्रायोगिक मशीन है जिसे संलयन ऊर्जा का उपयोग करने के लिए डिजाइन किया गया है।

ईस्ट परियोजना

  • यह चीन के हेफेई में स्थित चीनी विज्ञान अकादमी के प्‍लाज्‍मा भौतिकी संस्थान (Institute of plasma Physics of the chinese Academy of science- ASIPP) में स्थित एक उन्‍नत परमाणु संलयन प्रयोगात्‍मक अनुसंधान उपकरण है।
  • इस उपकरण (कृत्रिम सूर्य) का उद्देश्य परमाणु संलयन की प्रक्रिया को दोहराना है, यह वही प्रक्रिया है जिससे सूर्य को ऊर्जा प्राप्‍त होती है।
  • ‘ईस्ट’ चीन की उन तीन टोकामक योजनाओं में से एक है जिसका संचालन जारी है।
  • अन्‍य दो परियोजनाएं क्रमश: HL – 2A एवं J – TEXT है।
  • चीन की सबसे बड़ी एवं सबसे उन्‍नत HL – 2A परियोजना का सामान्‍य प्रयोग दिसंबर, 2020 में हो चुका है।

अंतरराष्ट्रीय (International Thermonuclear Experimental Reactor – ITER) ताप नाभिकीय प्रायोगिक रिएक्‍टर

  • यह संलयन नाभिकीय प्रक्रिया पर आधारित प्रायोगिक रिएक्‍टर है, जिसका लक्ष्य नाभिकीय संलयन प्रक्रिया द्वारा इनपुट से 10 गुना अधिक ऊर्जा उत्‍पन्‍न करना है।
  • जेनेवा में वर्ष 1985 में फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका एवं सोवियत संघ के बीच आपसी सहमति से इस परियोजना का जन्‍म हुआ।
  • 21 नवंबर, 2006 को पेरिस में आईटीईआर सदस्य देशों के मंत्रियों द्वारा इस समझौत्‍ो पर अाधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए। इसमें जापान एवं यूरोपीय संघ भी शामिल थे।
  • उपर्युक्‍त देशों के अतिरिक्‍त वर्ष 2003 में चीन एवं दक्षिण कोरिया तथा वर्ष 2005 में भारत इसमें शामिल हुआ।
  • ईस्ट संयंत्र का परिचालन वर्ष 2006 में प्रारंभ हुआ था और यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय थर्मोन्‍यूक्‍लियर प्रायोगिक रिएक्‍टर (ITER) का हिस्सा है जो दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संलयन रिएक्‍टर है। वर्ष 2035 तक इसके चालू होने की संभावना है।
  • भारत को परियोजना में शामिल करने का कारण यह है कि भारत में पहले से प्‍लाज्‍मा अनुसंधान संस्थान, गांधीनगर द्वारा चुंबकीय परिसीमन द्वारा प्‍लाज्‍मा संलयन प्राप्‍त करने के लिए टोकामक का प्रयोग जारी है।
  • इस उद्देश्य हेतु आदित्‍य और स्थिर अवस्था सुपर कंडक्‍टिंग टोकामक नाम के दो रिएक्‍टर प्रचालनरत हैं।

ईस्ट की कार्य प्रणाली

  • ईस्ट टोकामक को सूर्य एवं तारों द्वारा किए जाने वाले परमाणु संलयन की प्रक्रिया को दोहराने के लिए निर्मित किया गया है।
  • परमाणु संलयन अभिक्रिया अपेक्षाकृत अल्‍प अपशिष्ट उत्‍सर्जन में अधिक ऊर्जा उत्‍पन्‍न करती है।
  • पहले ऊर्जा उत्‍पादन की विधि नाभिकीय विखंडन था, जिसमें नाभिकीय कचरा का उत्‍पादन अपेक्षाकृत अधिक होता था।
  • परमाणु विखंडन के विपरीत इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन के दो परमाणुओं को आपस में जोड़ा (संलयन) जाता है।
  • इसके लिए ड्‍यूटेरियम और ट्रिटियम हाइड्रोजन नाभिकों को अत्‍यधिक ताप एवं दाब के माध्यम से आपस में संलयन कराया जाता है तो उनके घटक भाग एक हीलियम परमाणु और एक तेज न्‍यूट्रॉन में पुनर्संयोजित हो जाते हैं। इससे अत्‍यधिक मात्रा में ऊर्जा उत्‍पन्‍न होती है।
  • संलयन की इस प्रक्रिया में ईंधन (परमाणु कण) का तापमान 150 मिलियन डिग्री सेल्‍सियस से अधिक होना चाहिए, ताकि उप परमाणु कणों का गर्म प्‍लाज्‍मा जिसे सूर्य भी कहा जाता है, निर्मित हो सके।
  • एक मजतबूत चुंबकीय क्षेत्र की मदद से, प्‍लाज्‍मा को रिएक्‍टर की दीवारों से दूर रखा जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके की ऊर्जा की क्षति न हो।
  • इस प्रकार संलयन की प्रक्रिया को लंबे समय तक संचालित करने हेतु प्‍लाज्‍मा को आब्‍ाद्ध कर दिया जाता है।

 

महत्‍व

(i) इस प्रयोग से तापमान को कुछ सेकेंड से आगे बढ़ाकर कई मिनट एवं घंटो तक बनाए रखने हेतु वैज्ञानिक शोध में सहायता मिलेगी।
(ii) यह भविष्य में हरित विकास एवं शून्‍य कार्बन उत्‍सर्जन की दिशा में महत्‍वपूर्ण उपलब्धि है।
(iii) इससे महंगे परमाणु संलयन ऊर्जा उत्‍पादन की लागत कम करने में सहायता मिलेगी।
(iv) वर्ष 2020 में दक्षिण कोरिया के KSTAR रिएक्‍टर ने भी 20 सेकेंड के लिए 100 मिलियन डिग्री सेल्‍सियस से अधिक के प्‍लाज्‍मा तापमान को बनाए रखने में सफलता प्राप्‍त की थी।

संकलन – मनीष प्रियदर्शी


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