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Post at: Jul 10 2021

सुंदरबन (Sunderbans)

संदर्भ

  • हाल ही में आए उष्ण कटिबंधीय चक्रवात ‘यास’ ने बंगाल की खाड़ी के तटीय क्षेत्र में स्थित सुंदरबनों को भारी क्षति पहुंचाई है।
  • पिछले तीन वर्षों में सुंदरबन, चार उष्ण कटिबंधी चक्रवातो फानी (मई, 2019), बुल बुल (नवंबर, 2019) अम्फान (मई, 2020) और यास (मई, 2021) से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

यास चक्रवात का प्रभाव-

  • चक्रवात यास ने सुंदरबन के बड़े हिस्सों को जलमग्‍न कर दिया है।
  • चक्रवात ने प्राकृतिक तटबंधों को तोड़ दिया है जिससे सुंदरबन के बड़े क्षेत्र में पानी भर गया है।
  • समुद्री जल के भर जाने के कारण फसलों के विनाश के साथ-साथ यहां कृषि भी नहीं हो पाती, क्‍योंकि समुद्री जल में लवणता बहुत अधिक होती है।

सुंदरबन के बारे में –

  • गंगा, ब्रह्मपुत्र एवं मेघना नदियों के डेलटा भाग पर भारत और बांग्लादेश में फैले बंगाल की खाड़ी के तटीय क्षेत्र में एक विशाल वन पारिस्थितिकी तंत्र है। यह दुनियां का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है।

  • सुंदरबन को 1973 में भारत सरकार द्वारा टाइगर रिजर्व घोषित किया गया तथा 1984 में सुंदरबन नेशनल पार्क की स्थापना भी की गई।
  • 1987 में सुंदरबन नेशनल पार्क को यूनेस्कों द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया एवं वर्ष 2001 में सुंदरबन को बायोरिजर्व घोषित किया गया।
  • भारत के सुंदरबन आर्द्रभूमि को वर्ष 2019 में रामसर समझौते (1971) के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमि के रूप में घोषित किया गया है।

यहां पाए जाने वाले विशिष्ट जीव-जन्तु-

  • यहां पक्षियों की 428 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें चील, ऑस्प्रे, समुद्री बाज प्रमुख हैं।
  • यहां कछुओं की 11 प्रजातियां एवं सांपों की 30 प्रजातियां पाई जाती हैं।
  • यहां के मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र में मछलियों की लगभग 350 प्रजातियां तथा कीटों की 753 प्रजातियां पाई जाती हैं।
  • यहां पाए जाने वाले प्रसिद्ध बाघ रॉयल बंगाल टाइगर, खारे पानी का मगरमच्छ, वॉटर मॉनीटर छिपकली, गंगा डाॅल्फि तथा ओलिव टिडले कछुओं का घर है।

चुनौतियां

  • निचले तटीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण सुदरबन, बाढ़, भूकंप, चक्रवात, समुद्र स्तर में वृद्धि और समुद्र तट के कटाव के प्रति अधिक संवेदनशील है। सुंदरबन संरक्षण से संबंधित चुनौतियां निम्नलिखित हैं-

  • बदलती जलवायु परिस्थितियों जैसे-बाढ़, चक्रवात, समुद्री जल स्तर में वृद्धि एवं समुद्र तट कटाव के कारण सुंदरबन अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है।
  • अध्ययनों से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन से लवणता में वृद्धि हो रही है और उच्‍च ज्वारीय उछाल तथा भूमि जलमग्‍न हो रही है। इसके परिणामस्वरूप जैव-विविधता, जीव और वनस्पति दोनों के महत्वपूर्ण आवास का नुकसान हो रहा है।
  • सुंदरबन एक बड़ी मानव आबादी (लगभग 5 मिलियन) का घर है जो गरीबी से त्रस्त है। अपर्याप्‍त बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और परिवहन के साथ-साथ सीमित आजीविका विकल्पों के कारण, समुदायों को अपनी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए करना पड़ता है। यहां अधिवासित लोग अपनी आजीविका के स्रोत के रूप में मछली और केकड़े जैसे वन संसाधनों पर बहुत अधिक निर्भर हैं। इस जैविक दबाव और वन संसाधनों के निरंतर दोहन से प्राकृतिक आवास का ह्रास होता है, जिसके परिणामस्वरूप जैव-विविधता का नुकसान होता है।
  • सुंदरबन में अधिवासित लोगों को मैंग्रोव वनों से उनकी निकटता के कारण वे सर्पदंश से लेकर बाघों के हमले तक, जैविक खतरों के एक अनूठे सेट के संपर्क में हैं। एक रिकॉर्ड के अनुसार 1985 और 2008 के 789 लागों पर बाघों ने हमले किए हैं, जिसमें से 666 लोगों ने दम तोड़ दिया है। संघर्ष का यह स्तर वन्यजीव संरक्षण पहलों के प्रति विरोध की ओर ले जाता है।

संरक्षण की आवश्यकता-

आगे की राह-

  • सरकार को सुंदरबन डेल्टा क्षेत्र के संरक्षण के लिए तत्काल प्रसास करने की आवश्यकता है, क्‍योंकि इस क्षेत्र में समृद्ध प्राकृतिक संसाधन और विविधता प्रदान करने की क्षमता बहुत है।
  • हालांकि, सुंदरबन के क्षेत्रों को कानूनी रूप से संरक्षित करने का प्रयास शुरुआत से ही रहा है लेकिन इस क्षेत्र का भविष्य काफी हद तक स्थानीय कार्यों एवं प्रयासों पर निर्भर करेगा जो नदियों के कटाव को रोकने में मदद करेगा।
  • सरकार को उन नीतियों पर अधिक जोर देना चाहिए जो इस क्षेत्र में अपर्याप्‍त मानव विकास के कारण प्राकृतिक संसाधनों पर दबावों को दूर कर सकते हैं।

सं. अभिषेक कुमार


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