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Post at: Jul 10 2021

आईएनएस करंज

वर्तमान परिप्रेक्ष्य-

  • 10 मार्च, 2021 की तीसरी स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस करंज को नौसैनिक बेड़े में शामिल किया गया।

पृष्ठभूमि-

  • वर्ष 1969 में आईएनएस करंज (एस-21) को रीगा के नौसैनिक बेड़े में शामिल किया गया था।
  • जो मुलत: रूस द्वारा निर्मित किया गया था।
  • यह वर्ष 2003 तक सेवारत था।
  • नवीन स्कार्पीन पनडुब्बियाँ वस्तुत: विश्व की आधुनिक पनडुब्बियों में से एक हैं।
  • यह अधिक घातक व समुद्र की सतह के ऊपर या नीचे छिपकर किसी भी खतरे को बेअसर करने के लिए अत्‍याधुनिक हथियारों से लैस है।
  • इसका नाम (करंज) करंजा द्वीप (जिसे उरण द्वीप भी कहा जाता है) से प्रेरित है।
  • जो रायगढ़ जिले का एक शहर है और यह मुंम्बई हार्बर के दक्षिण-पूर्व में स्थित है।

प्रोजेक्‍ट-75

  • आईएनएस करंज का निर्माण प्रोजेक्‍ट 75 के तहत किया गया है।
  • प्रोजेक्‍ट-75 भारतीय नौसेना का एक कार्यक्रम है, जिसके तहत छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
  • आईएनएस कलवरी, आईएनएस खांदेरी, आईएनएस वेला और आईएनएस वाग्‍शींर, आईएनएस वाग्‍शीर इत्‍यादि प्रोजेक्‍ट-75 की अन्‍य पनडुब्बियाँ हैं।

महत्‍वपूर्ण तथ्य

  • आईएनएस करंज को फ्रांसीसी मेसर्स नेवल ग्रुप के द्वारा डिजाइन किया गया है।
  • इसका निर्माण मझगाँव डॉक शिपबिल्‍डर्स के द्वारा किया गया है।
  • एमडीएल (MDL) भारत का अग्रणी जहाज निर्माण यार्ड और एकमात्र पनडुब्बी निर्माता है।
  • यह डीजल-इलेक्‍ट्रिक प्रणोदन प्रणाली द्वारा संचालित पनडुब्बी है।
  • आईएनएस करंज स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी है, जिसका वजन 1.500 टन है और यह 300 मीटर की गहराई तक जा सकती है। Æ
  • इसे पश्चिमी नौसेना कमान के पनडुब्बी बेड़े मे तैनात किया जाएगा।

निष्कर्ष

  • आईएनएस करंज की तैनाती के साथ ही भारत एक ‘सबमरीन बिल्‍डिंग नेशन’ के रूप में स्थापित हो गया।
  • एमडीएल (MDL) के द्वारा आईएनएस करंज का निर्माण भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और आत्‍मनिर्भर भारत अभियान की संकल्‍पना को कार्यरूप प्रदान करती है।

कन्‍हैया कृष्णा


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